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घूमर

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यह राजस्थान राज्य नृत्य के रूप में प्रसिद्ध है घूमर मूलतः गणगौर के पर्व से जुड़ा है लेकिन वर्तमान में विभिन्न मांगलिक अवसरों व पर्वों पर महिलाओं द्वारा किया जाता हैं

प्रमुख वाद्ययंत्र - शहनाई, ढोल, नगाड़ा, आदि इस नृत्य में बार बार घूमने के साथ हाथों का लचकदार संचलन प्रभावित करने वाला है

इस नृत्य में लहंगे के घेर को घुम्म कहते हैं

इस नृत्य में घूमर के साथ अष्टताल कहरवा लगाया जाता है जिसे सवाई कहते है

इसका विकास भील जाति की महिलाओं द्वारा सरस्वती माता की आराधना करते समय हुआ

इसका संरक्षण 1986 में मुम्बई में किया गया था

घूमर के समान नृत्य - लूर, घुमरा ,झुमरिया आदि

राजस्थान में इसका प्रारंभ राजा उम्मेद सिंह के काल से माना जाता है [1]

घूमर
A Rajput Woman performing Ghoomar
मूल नामघूमर
विधालोक नृत्य
उपकरणढोल, शहनाई
उत्पत्तिस्थलराजस्थान, भारत

घूमर प्रायः विशेष अवसरों जैसे कि विवाह समारोह, त्यौहारों और धार्मिक आयोजनों पर किया जाता है, और अक्सर कुछ घंटो तक चलता है।

घूमर गीत

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राजपूत महिला द्वारा घूमर नाच

सामान्यतः निम्न गीतों पर घूमर नृत्य किया जाता है।

  • "म्हारी घूमर"
  • "चिरमी म्हारी चिरमली"
  • "आवे हिचकी" - पारम्परिक राजस्थानी घूमर गीत
  • "घूमर"
  • "जंवाई जी पावणा"
  • "तारां री चुंदड़ी"
  • "म्हारो गोरबन्द नखतरालो"
  • "म्हारी घूमर"
  • "घूमर रे घूमर रे"
  • "घूमर" - 2018 की फिल्म पद्मावत से

ये नृत्य गणगौर के अवसर पर आयोजित होता है ।। इस नृत्य की वेशभूषा 80/120 कली का लंहगा है। घूमर नृत्य को राजस्थान का रजवाड़ी नृत्य भी कहते है।

सन्दर्भ

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  1. "Ghoomar Dance, Rajasthan". मूल से से 18 मई 2012 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 31 अक्तूबर 2017.