कपिलमुनि

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कपिल मुनि, जिनको भगवान का ही अवतार माना जाता है। ये अत्यंत क्रोध वाले स्वभाव व्यक्ति माने जाते है।

  कहा जाता है कि पवित्र नदी गंगा को धरती पर लाने में इनका ही अहम योगदान रहा है। क्युकी कहा जाता है कि राजा सगर ने जब अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए यज्ञ किया तो ईर्ष्या से इन्द्र ने उनका यज्ञ से निकला हुआ घोड़ा चुरा लिया और  पाताल लोक में तपस्या कर रहे ऋषि कपिल मुनि के पास में बांध दिया।

जब राजा सगर घोड़े को खोजने के लिए अपने 60 हजार पुत्रों को भेज दिया तो वो खोजते खोजते कपिल मुनि के तपस्या वाली जगह पर आ गए। और कपिल मुनि को दोषी समझ कर भला बुरा कहने लगे, ये सुनकर आत्यंत्त क्रोधी स्वभाव के कपिल मुनि एक ही बार में सबको भस्म कर दिया ।

  जब यह बात राजा सगर को पता चली तो वो भागे भागे कपिल मुनि के पास आए और माफी की गुहार करने लगे और कहने लगे की अब मृत्य आत्माओं को माफ कीजिए जो अनजाने में उनसे गलती हुई और कृपा उनके उद्धार का मार्ग प्रशस्त करे। तब उसके बाद कपिल मुनि का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने बताया कि अगर किसी तरह स्वर्ग में रहने वाली पवित्र नदी गंगा को पृथ्वी लोक पर लाकर इन सबके मृत्य शरीर के स्पर्श हो जाए तो इनका उद्धार हो सकता है।
   जहा कपिल मुनि तपस्या करते थे उस जगह को गंगा सागर कहते है । और चारो धाम पूरा करने के बाद इसका दर्शन करना अति महत्वपूर्ण है।