शतपथ ब्राह्मण

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शतपथ ब्राह्मणमाध्यन्दिनीय वाजसनेयि शुक्लयजुर्वेदतथा काण्व वाजसनेयि शुक्लयजुर्वेद दोनों का ब्राह्मणग्रन्थ है। १००/१०४ अध्याय ,१४/१७ काण्ड ,४३८/४३५ ब्राह्मण में विभक्त है |२४०००का यह ग्रन्थ विशाल कायमें उपलब्ध है | ब्राह्मणग्रन्थों में इसे सर्वाधिक प्रमाणिक माना जाता है। इस ग्रन्थके उपर चतुर्वेदभाष्यकर्ता सायणका भाष्य मिलता है |

शतपथ ब्राह्मणमे गणित[संपादित करें]

कात्यायन आदिशुल्बसूत्रों का मुख्य स्रोत शतपथ ब्राह्मण ही है | शुल्बसूत्रौंमें यज्ञ की वेदियाँ तथा अन्य ज्यामितीय रचनाएँ बनाने की विधियाँ दी गयीं हैं।