मुख्य उपनिषद

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मुख्य उपनिषद् 11 माने जाते हैं,जिनके नाम इस प्रकार हैंः-- 1. ईशावास्योपनिषद्, 2. केनोपनिषद् 3. कठोपनिषद् 4. प्रश्नोपनिषद्, 5. मुण्डकोपनिषद्, 6. माण्डूक्योपनिषद्, 7. ऐतरेयोपनिषद्, 8. तैत्तरीयोपनिषद्, 9. श्वेताश्वतरोपनिषद्, 10. बृहदारण्यकोपनिषद्, और--11. छान्दोग्योपनिषद्आदि शंकराचार्य ने इनमें से १० उपनिषदों पर टीका लिखी थी। इनमें मांडूक्योपनिषद सबसे छोटा है (१२ श्लोक) औऱ ब्रह्दरणयक सबसे बड़ा। संभवतः इशावास्योपनिषद सबसे पुराना है क्योंकि यह यजुर्वेद का ही अंतिम अध्याय है।

इनको मुख्य मानने का कारण इनको ऋषिकृत (यानि आर्ष) और प्राचीनतम मानना है। बाद में कई उपनिषद लिखे गए जो उतने मान्य नहीं हैं। यहाँ तक कि सोलहवीं सदी में अल्लोपनिषद भी लिखा गया - जिसमें अरबी के शब्दों को संस्कृत में ढाला गया प्रतीत होता है।