ज्ञान

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विश्व में तीन प्रकार के ज्ञान से मानव जीवन संचालित है ।

धर्म _____ सभी धर्मो की कथा संस्कृति रहन सहन खानपान पहनावा पूजा विधि विवाह विधि भाषा बोली आदि संस्कार तथा परमात्मा आत्मा और जीवात्मा की मान्यता।

समाज ____ विश्व राष्ट्र और क्षेत्र की राजनीति स्थिति अर्थिक स्थिति शासन प्रणाली मनोरंजन नागरिकों के मौलिक अधिकार लोगो की मनःस्थिति व मानसिक स्थिति ।

विज्ञान ____ क्षेत्र देश दुनिया का वातावरण भौगोलिक स्थिति विज्ञान के यंत्रो का अविष्कार उन्नत टेक्नालॉजी जीव जन्तु वनस्पति सूक्ष्मजीवों की जानकारी परमाणु अणु तत्व की जानकारी तथा रसायन भौतिक जीव ।

धर्म शास्त्र समाज शास्त्र और विज्ञान शास्त्र के कई शाखा इकाई अध्याय उपाध्याय है । धर्म समाज व विज्ञान के कारण ही प्रकृति व मानवीय परिस्थिति घटनाओं व गतिविधियों होती है जिसके कारण भूत भविष्य वर्तमान है ।




निरपेक्ष सत्य की स्वानुभूति ही ज्ञान है। यह प्रिय-अप्रिय, सुख-दु:ख इत्यादि भावों से निरपेक्ष होता है। इसका विभाजन विषयों के आधार पर होता है। विषय पाँच होते हैं - रूप, रस, गंध, शब्द और स्पर्श।

ज्ञान लोगों के भौतिक तथा बौद्धिक सामाजिक क्रियाकलाप की उपज ; संकेतों के रूप में जगत के वस्तुनिष्ठ गुणों और संबंधों, प्राकृतिक और मानवीय तत्त्वों के बारे में विचारों की अभिव्यक्ति है। ज्ञान दैनंदिन तथा वैज्ञानिक हो सकता है। वैज्ञानिक ज्ञान आनुभविक और सैद्धांतिक वर्गों में विभक्त होता है। इसके अलावा समाज में ज्ञान की मिथकीय, कलात्मक, धार्मिक तथा अन्य कई अनुभूतियाँ होती हैं। सिद्धांततः सामाजिक-ऐतिहासिक अवस्थाओं पर मनुष्य के क्रियाकलाप की निर्भरता को प्रकट किये बिना ज्ञान के सार को नहीं समझा जा सकता है। ज्ञान में मनुष्य की सामाजिक शक्ति संचित होती है, निश्चित रूप धारण करती है तथा विषयीकृत होती है। यह तथ्य मनुष्य के बौद्धिक कार्यकलाप की प्रमुखता और आत्मनिर्भर स्वरूप के बारे में आत्मगत-प्रत्ययवादी सिद्धांतों का आधार है।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. दर्शनकोश, प्रगति प्रकाशन, मास्को, १९८0, पृष्ठ-२२६, ISBN ५-0१000९0७-२

[[श्रेणी:ज्ञानमीमांसा]