श्रावक (जैन)

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गोमतेश्वर प्रतिमा की पूजा करते जैन श्रावक

जैन धर्म में, श्रावक शब्द का प्रयोग जैन धर्मावलंबियों (गृहस्थ) का उल्लेख करने के लिए किया जाता हैं।[1][2] श्रावक शब्द का मूल 'श्रवण' शब्द में हैं, अर्थात, वह जो (संतों के प्रवचन) सुनता हैं। [1]

अवलोकन[संपादित करें]

छह आवश्यक[संपादित करें]

एक जैन श्रावक पूजा करते हुए

बारह प्रतिज्ञा[संपादित करें]

अणुव्रत[संपादित करें]

गुण व्रत[संपादित करें]

शिक्षा व्रत[संपादित करें]

सल्लेखना[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Singh, Abhay Kumar; Arora, Udai Prakash (2007-01-01). Udayana. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788179751688. https://books.google.co.in/books?id=d4VeYJdww2YC&pg=PA423. 
  2. Jain 2012, प॰ xiii.

स्रोत[संपादित करें]