श्रमण परम्परा

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जैन भिक्षु या जैन साधु को श्रमण कहते हैं, जो पूर्णत: हिंसादि का प्रत्याख्यान करता और सर्वविरत कहलाता है। श्रमण को पाँच महाव्रतों - सर्वप्राणपात, सर्वमृष्षावाद, सर्वअदत्तादान, सर्वमैथुन और सर्वपरिग्रह विरमण को तन, मन तथा कार्य से पालन करना पड़ता है।

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