रावत
रावत एक भारतीय उपनाम है। सामान्यतः यह राजकुमार का समानार्थी शब्द है,[1] और यह माना जाता है कि पहले यह एक प्रकार की उपाधि थी जिसे वीरता के सम्मान में राजाओं द्वारा दी जाती थी, जिसे वंश-परंपरा के अनुसार नाम के आगे लिखने का प्रचलन हो गया। [2]
रावत प्राचीन समय के ऐसे महान योद्धा होते थे। जो राजा के बाद सबसे पूजनीय स्थान रखते थे। इनके शौर्य,पराक्रम,वीरता के कारण दुश्मन इनसे खौफ खाते थे।अंग्रेजों को भी इनसे हार का सामना करना पड़ा था। जिससे यह भारत में एकमात्र स्वतंत्र उपनाम वाली उपाधि रह गई थी।
क्षेत्रीय विस्तार
पश्चिमी भारत
आधुनिक समय में रावत समाज के लोग विभिन्न विभिन्न प्रकार के कार्य कर रहे हैं परन्तु अधिकतर रावतवंश के लोग कृषि प्रेमी रहे हैं तथा कृषि करते हैं। आधुनिक समय में भी ८१% रावत कृषि करते हैं।[उद्धरण चाहिए]
भाषाएँ
रावत समुदाय के लोग स्थानानुसार मेवाड़ी, मारवाड़ी, ढूंढारी, कुमाउनी, गढ़वाली, अवधी, ब्रजभाषा,मैथिली,भोजपुरी बुन्देली भाषाएँ अथवा बोलियाँ बोलते हैं।[1]
सन्दर्भ
- 1 2 Joshua Project (2012-09-02). "Rawat in India". Joshua Project. अभिगमन तिथि: 2017-05-13.
- ↑ "उत्तराखंड : जानिए उत्तराखंड में रावत जाति की कहानी, गौरवशाली है इनका इतिहास - Khabar Uttarakhand News". 28 नवम्बर 2017.
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