संधवालिया

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संधावालिया एक जाट गोत्र है। जोकि भारत व पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बस्ते है!

इतिहास[संपादित करें]

संधावालिया मूल रूप से राजस्थान से एक बहुत छोटा जाट जनजाति (या गोत्र) है और अब पंजाब में रह रहा है। 1881 की जनगणना में इसे जाट जनजातियों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। संधावालिया एक छोटा जाट गोत्रा ​​है जिसमें भूमि मालिक और उतरा-किसान व योद्वा वर्ग शामिल हैं।

पंजाब के जाट सिख शासक महाराजा रणजीत सिंह, और उनके परिवार ने इस जाट जनजाति से वंश उत्पन्न की जो जैसलमेर के राजा गज सिंह के पुत्र अपने शासक राजा शाह (साल्वाहन) से उत्पन्न हुई थी। रणजीत सिंह के दावे से पहले संधवालिया जाट जनजाति स्पष्ट थी, व इनके पूर्व चौधरी भारा ने 1570 में यह टाइटल ऊपयोग किया था!

विभाजन[संपादित करें]

1911 में ब्रिटिश पंजाब जनगणना के दौरान अमृतसर जिले में संधावालिया जनजाति की जनसंख्या 682 थी और 1 994 में अमृतसर जिले के भीतर 2,046 हो गई थी।

उल्लेखनीय लोग[संपादित करें]

•दमनदीप सिंह संधावालिया और सुखदेव सिंह संधावालिया, महाराजा रणजीत सिंह के वशंज।

•प्रेमिंदर सिंह संधवालिया, लेखक।

•राघबीर सिंह संधावालिया, संधावालिया - जाट, अमृतसर जिले से पंजाब प्रमुखों की सूची में था।

•सरदार साहिब सिंह और

•लाडवा के सरदार गुरदीत सिंह क्रोरा सिंघिया संघ के सदस्य थे। वे अमृतसर के दक्षिण में दस मील दूर बैन पॉइन के गांव के संधानवालिया जाट थे !

सन्दर्भ[संपादित करें]