धौल्या

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धौल्या या धौलिया राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु आदि में पाए जाने वाले जाटों का एक गोत्र है।[1] धौल्या का शाब्दिक अर्थ सफेद होता है। राठौड़ के शासन से बहुत पहले किशनगढ़ और मारवाड़ में धौल्या शासक थे। धौल्या गोत्र में सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति तेजाजी हैं। उनका जन्म विक्रम संवत ११३० में हुआ था।

उस समय राजस्थान पर छोटे गणराज्य राज्यों का शासन था, जो जातियों में विभाजित थे। तेजाजी के पिता ताहरजी थे जो खरनाल के प्रमुख थे। उसका शासन खरनाल से रूपनगर तक फैला हुआ था। उनका पड़ोसी राज्य नागों का था। नागौर से नागों का सफाया हो गया था। भीनमाल में गुर्जरों को खारिज कर दिया गया। मीणा जयपुर के विभिन्न भागों में शासक थे। तेजाजी का विवाह पनेर गांव में हुआ था, जो वर्तमान में अजमेर जिले में है तथा उस समय में जयपुर क्षेत्र में बनास नदी के तट पर स्थित था।[2]

इस गोत्र के उल्लेखनीय व्यक्ति[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. मनसुख रणवा, क्षत्रिय शिरोमणी वीर तेजाजी, 2001, पृ॰13
  2. डॉ गोपीनाथ शर्मा: 'राजस्थान के इतिहास के स्त्रोत', 1983, पृ.68