दहिया

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दहिया जाट और यदुवंशी अहीर[1] का एक कबीला है और उपनाम आमतौर पर भारत के बीच पाया जाता है। वे इतने शक्तिशाली हैं कि उन्हें कोई हरा नहीं सकता। वे मुख्य रूप से (हरियाणा में पाए जाते हैं।[2]

दय्या जाट ( दरोया)सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Gupta, Parmanand (1989). Geography from Ancient Indian Coins & Seals (अंग्रेज़ी में). Concept Publishing Company. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7022-248-4.
  2. "दहिया".

यह एक मजबूत योद्धा हे दय्या जाट को मध्यप्रदेश में दरोया जाट भी कहा जाता है इन जाट लोगो की एक अलग ही पहचान होती हैं इन को बात बात पर गुस्सा आ जाता है इनकी सबसे बड़ी कमजोरी इनका गुस्सा हे जिसको यह कंट्रोल नहीं कर पाते हैं

दय्या जाट मधयप्रदेश के मंदसौर जिले की सीतामऊ तहसील के बेटीखेड़ी नामक गांव में रहते हैं यहां इनकी आबादी पूरे गांव में ज्यादा हे लगभग यहां इनके 100 घर हे यहां के जाटों से आस पास के सारे गुंडे डरते हैं यह लोग गुण्डो के साथ गुंडे ओर प्रेम के साथ भाई हे ओर वेवार में ये लोग जान तक दे देते हैं

इन लोगो का मुख्य व्यवसाय कृषि हे कृषि कार्य करने में इनकी प्रमुख रुचि है


गांव बेटीखेदी में इनके प्राचीन देवता श्री भेरू बावजी महाराज का मन्दिर देवरी रोड़ पर स्थित है यहां पर इनके कुलदेवी मा आदिशक्ति सती माता ओर जुजार बावजी का मन्दिर हे इनके भेरू बावजी को प्राणनाथ के नाम से जाना जाता है तथा यहां पर अनेक श्रधालु आते हैं कहा जाता है जो बाबा के दर से मन्नत मांगने आते हैं उनकी हर मन्नत पूरी होती हैं श्री भेरू बावजी के यहां पर अनेक लोगों को संतान की प्राप्ति होती है और अनेक श्रधालु के रोगों का नाश होता है बहुत चमत्कारी बाबा भेरू बावजी का यह स्थान है दरोया गोत्र के लोग अपने हर त्योहार को सबसे पहले बाबा भेरू बावजी के दर पर मनाते है यहां पर भेरू जी महाराज को बाटी ओर बाकरा से पूजा जाता है साथ में बाबा मदिरा पान भी करते है ओर यहां पर बकरे की बलि भी चड़ाई जाती हैं बेशाख मास की पूर्णिमा जो भेरू पुनिमा के नाम से जानी जाती है इस दिन रात्रि में बाबा का रात्रि जागरण होता है जिसमें अखंड ज्योति चलती है और उसके अगले दिन एकम यानी ज्येष्ठ मास की एकम तिथि को यहां बाबा को महा भोग लगाया जाता है जिसमें बाटी बाकरॉ मदिरा ओर बकरे की बलि दी जाती है दरोया गोत्र में जन्म लेने वाले बालक ओर उसकी शादी के यहां बकरे की बलि दी जाती है दरोया गोत्र के लोग मध्यप्रदेश में राजस्थान के मारवाड़ देश से आए है इनका मारवाड़ मुख्य ठिकाना है मारवाड़ की पावन थरा डीडवाना तहसील हे मारवाड़ से दय्या गोत्र के कुल 6भाई निकले थे जो मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले की सीतामऊ तहसील के ग्राम बेटिखेढ़ी पहुंचते पहुंचते रास्ते में अन्य तीन गाव में ओर रुके थे जिन गाव में ये लोग रुके वहा के जमीदारो से स्वाभी मान की लड़ाई लडे और अपने 3 वीरो ओर सूरमा को वीरगति मिली थी इन अकेले6 भाईयो ने 50 से ज्यादा जमीदार को मार गिराया था ओर बचे 3भाई ने बेतिखेदी नामक गांव में आकर बस गए थे लगभग ये सूरमा मालवा प्रांत में आज से 700 वर्ष पूर्व आए थे ओर अभी यहां इनके100घर की आबादी है ये सभी इनके कुल देवता स्वामी प्राणनाथ श्री भेरू बावजी महाराज की कृपा से हुआ है


श्री बाबा प्राणनाथ जी का चरण सेवक

     (rishidev)
  जय भेरू बावजी महाराज
    जय प्राणनाथ