दहिया

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दहिया एक भारतीय जाति और उपनाम है जो मुख्यतः जाट जाति के लिए प्रयुक्त होता है।[1][2][3][4][5]

इतिहास:

दहिया जाट राजवंशी चन्द्रवन्सी क्षत्रिय 

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।  डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम|| शिव के 1008नामो मे 489नम्बर नाम महा जटा जुट म्त्ल्ब विराट जाट है, इसके बेटे का नाम कार्तिकेय जोह रोहितिके है जिससे रोह्तक बसा जाटो का garh पार्चिन गंगा यमुना सरस्वती का इलका, हरिद्वार से आज की दिल्ली,देव सेना का commander एक जट सेनपती कार्तिकेय.

शिवजी का दत्तक पुत्र वीरभद्र से के पांच बेटे और दो पुत्रों के नाम पर 7 जाट कुल गोत्र,चले जिनसे 1पोन बद्र से पुनिया जाट गोत्.,2कल्हनभद्र से कल्हन जाट गोत्र, 3.अती सुर भद्र 4.अंजना भद्रा से अंजना जाट गोत्र, 5.dahi भद्र से दहिया जाट गोत्रा 6.जख्भद्र से jakhar जाट गोत्र, 7.भिम्भ्द्र से भिम्बोर्लिया जाट गोत्र.

जिससे सपश्ट है की दधिची से कइ हजरो साल pehle दहिया जाट का अस्तित्वा, य्ह है ग्रन्थो के हिसाब से आये अब करे world history की बात क्युकी जाट एक अंतरराष्ट्रीय कौम है।

महाभारत के बाद अलग-अलग जाट राजवंश विदेसो की तरफ मुंह किया और वहां बसते रहे ईसाई और मुस्लिम काल में जिन जाटों ने वहां का धर्म मान लिया वह वही बसे रहे बाकी वापस अपने मूल देश भारत में आ गए, इसको अंग्रेजों ने आर्य जाटों का आना दिखाया है पर भारत से विदेश जाना नहीं दिखाया क्योंकि उनकी ईसाईयत और उनकी इस्लाम पर फर्क पड़ता.

World history ka father herodotus लिख्ते है, इससे हजारों वर्ष पूर्व में दहिया जाट महासन्घ सिर दरिया के पुर्वी भाग मे बाद में आबाद हो गया था और उनके आसपास के क्षेत्र में भुल्लर सियाग और बेनीवाल जाट बसे हुए थे ,सिकंदर की सेना के साथ युद्ध में दहिया जाटों ने भाग लिया भुत्काल का इतिहास गवाह है इस बात का भूतकाल में इन्हीं दहिया जाटों के नाम पर कैस्पियन सागर का नाम ददाहय सागर कहलाता था ,सिकंदर की सेना के साथ यह दहिया जाट हिंदुस्तान में प्रवेश किया था ,सोनीपत की जिस टुकड़ी में सिकंदर की सेना को जाटों के साथ युद्ध करना पड़ा वही पर बाद में दहिया जाट आबाद हुए ,आज भी यहां पर इनके बावन गांव हैं खरखोदा तहसील में ,40 से ज्यादा गांव उनके उत्तर प्रदेश में है ,कुल मिलाकर दहिया जाटों के 200 के आसपास गांव पूरे हिंदुस्तान में हैं और राजपूत सिर्फ मेवाड़ के चालीसगांव और रोपड़ पंजाब के 12 गांव कुल 52 गांव राजपूतों के हैं ,जिससे स्पष्ट है कि दहिया जाट संग राजपूत जाति के दहिया से हजारों वर्ष पुराना है ,बाद में मेवाड़ में दहिया जाटों ने खुद को राजपूत संघ में शामिल कर लिया और आज यह लोग वहां के 40 गांव में दहिया राज्पुत kehlaate है,

529bc मे महारानी तोम्रिस दहिया जाटनी का फ़ारस की लडाई का युध इतिहास के पितामाह herodotus उस टाइम का सब्से भ्यन्कर युध लिख्ते है, जैसे और भी स्पष्ट हो जाता है कि जाट संग एक अंतर्राष्ट्रीय नस्ल है हजारों वर्षों से मानव इतिहास जबकि भारत का या कोई भी राजपूत इतिहासकार ब्राह्मण इतिहासकार मुस्लिम इतिहासकार या भारत की कोई भी यूनिवर्सिटी राजपूतों को 8 वीं शताब्दी से पूर्व का नही मान्ते आबु हवन से पेहले, constitution of india me jatiyo me कइ प्रकार के राज्पुत है sc st obc genral, राज्पुत सन्घ तोह dasvi satabadi मे जाट गुजर और अदिवासिओ को मिला कर बनया गया एक सन्घ था,

दहिया गोत्र को Raja वीरभद्र से उत्पत्ति मानी गई है ,दहिया जाट चंद्रवंशी क्षत्रिय हैं ,वैदिक काल से कैलाश पर्वत से लेकर हरिद्वार तक आबाद थे ,बाद में यह लोग इससे हजारों वर्ष पूर्व विरार कैस्पियन सागर अमु दरिया घाटी तक फैल गए ,529 ईसापूर्व में महान सम्राट साइरस के साथ महारानी तोम्रिस दहिया जाट्नी का भयंकर युद्ध हुआ था ,जिसमें महारानी तोम्रिस दहिया ने साइरस का मृत शरीर खोज कर उसका सिर काट कर खून कर भरे बर्तन में रख दिया और अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार जाट क्षत्राणी ने उसको उसका ही खून पिलाया पढ़ें फारस का इतिहास ,लेखक इतिहासकार राहुल सांकृत्यायन ने लिखा है कि दहिया जाट लोग उच्च कोटि के घुड्सवार, निशानेबाज थे, स्त्रेबो युनानी इतिहास्कर persiaa को जिताने वाले दहिया जाट थे,

जोधपुर के समीप किनसरिया गांव में केवाय माता मंदिर में शिलालेख मिला है जिस पर लिखा है 21 अप्रैल 999 ईस्वी में राजा चचराना ने लिख्वाया है की "कुलम दहियाकम जाट्म" देखे archalogical सुर्वे ओफ़्फ़ इन्दिआ जोध्पुर पार्चिन लेखो मे.[6]