गिद्धौर

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गिद्धौर
पत्संदा
कस्बा (ब्लॉक)
मिंटो टॉवर
मिंटो टॉवर
गिद्धौर की बिहार के मानचित्र पर अवस्थिति
गिद्धौर
गिद्धौर
बिहार, भारत में अवस्थिति।
निर्देशांक: 24°51′29″N 86°18′01″E / 24.857941°N 86.300369°E / 24.857941; 86.300369निर्देशांक: 24°51′29″N 86°18′01″E / 24.857941°N 86.300369°E / 24.857941; 86.300369
देशFlag of India.svg भारत
राज्यबिहार
क्षेत्रमगध
मंडलमुंगेर
ज़िलाजमुई
ऊँचाई26 मी (85 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल9,353
भाषा
 • आधिकारिकहिन्दी, अंगिका, उर्दू
समय मण्डलआईएसटी (यूटीसी+5:30)
पिन811305
टेलिफोन कोड06345
वाहन पंजीकरणBR46
लिंगानुपात910/1000(2011) /
वेबसाइटgidhaur.com

गिद्धौर (जिसे पत्संदा के नाम से भी जाना जाता है) बिहार के जमुई जिले का एक छोटा सा शहर है। प्रारंभिक-आधुनिक काल में, यह एक जमींदारी संपत्ति का केंद्र था।

इतिहास[संपादित करें]

1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन से पहले गिद्धौर भारत की एक जमींदारी संपत्ति का केंद्र था। । चंदेल वंश के राजाओं ने छह शताब्दियों से अधिक समय तक पत्संदा पर शासन किया। राजा बीर विक्रम सिंह ने 1266 में इस रियासत की स्थापना की। जो सिंगरौली के बाड़ी के राजा के छोटे भाई थे। कहा जाता है कि वंश के नौवें राजा पुराण सिंह द्वारा झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ (भगवान शिव) का मंदिर बनाया गया था।[कृपया उद्धरण जोड़ें][स्पष्ट करें]

पत्संदा का नाम बदलकर गिद्धौर रख दिया गया, जोकि शहर से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक रेलवे स्टेशन का नाम था। 1994 में गिद्धौर एक ब्लॉक बन गया, इसके पहले यह लक्ष्मीपुर ब्लॉक के अन्तर्गत आता था।

भूगोल[संपादित करें]

गिधौर, राज्य की राजधानी पटना से 167 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में उलाई नदी के तट पर स्थित है। यह ज़िला मुख्यालय जमुई से पूर्व की ओर 19 किलोमीटर दूर स्थित है।

उलई एक मानसून नदी है जो शहर के समानांतर बहती है और दक्षिणी-पश्चिमी सीमा बनाती है। शहर के उत्तर और दक्षिण की दिशा में दो पहाड़ी सेवा-पहर और बांधोरा-पहाड़ हैं।

आबादी मिंटो टॉवर के आसपास समान रूप से वितरित है। शहर को अलग-अलग स्थानों को वर्गीकृत करने के लिए पूर्वी भाग (झाझा पक्ष) और पश्चिमी पक्ष (जमुई पक्ष) में विभाजित किया जा सकता है।

जलवायु[संपादित करें]

गिद्धौर में मार्च के अंत से लेकर जून की शुरुआत तक बेहद गर्म ग्रीष्मकाल के साथ आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय जलवायु होती है, जून के अंत से सितंबर तक मानसून का मौसम और नवंबर से फरवरी तक हल्की सर्दी होती है। गर्मियों में, तापमान 45°C तक बढ़ जाता है, और सर्दियों में यह 5°C से नीचे चला जाता है।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

जनसंख्या जनगणना 2011 के अनुसार, पत्संदा की आबादी 9353 है, जिसमें से 4897 पुरुष और 4456 महिलाएं हैं। 2011 में, बिहार में 61.80% की तुलना में यहां साक्षरता दर 67.72% थी। जिसमें पुरुष साक्षरता 79.53% थी जबकि महिला साक्षरता दर 54.46% थी।[1][2]

गिद्धौर ब्लॉक[संपादित करें]

गिद्धौर ब्लॉक का भौगोलिक क्षेत्रफल 71.11 किमी 2 है। 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 60,670 थी। गिधौर ब्लॉक में बीस गाँव हैं।

  • बंधौरा
  • गंग्रा
  • खरहा
  • माहुलि
  • रतनपुर
  • बञ्हुलिया
  • गेनादी
  • कोल्हुआ
  • मौरा
  • संसारपुर
  • छतरपुर
  • गुगुल्डिह
  • कुमारडीह
  • नयागांव
  • सेवा
  • धोबघाट
  • केत्रू नवादा
  • कुंधुर
  • पत्संदा
  • सिमरिया
  • तारडीह
  • सोहजना

परिवहन[संपादित करें]

गिद्धौर रेलवे स्टेशन

गिद्धौर दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग पर स्थित है। रेलवे स्टेशन (स्टेशन कोड GHR) शहर के केंद्र से 2 किलोमीटर दूर है। वर्तमान में, दस एक्सप्रेस ट्रेन और आठ पैसेंजर ट्रेन यहाँ रुकती हैं। रेलवे स्टेशन से ऑटो-रिक्शा और टमटम (घोड़ा-गाड़ी) द्वारा पहुंचा जा सकता है। झाझा, एक प्रमुख रेलवे स्टेशन, केवल 13 किमी दूर है, जो देशभर में गिद्धौर को जोड़ता है।

सड़क[संपादित करें]

स्टेट हाईवे एसएच -18 गिद्धौर मुख्य बाजार से गुजरता है, जो इसे जिला मुख्यालय जमुई और पास के प्रमुख रेलवे स्टेशन से जोड़ता है। पिछले 5 वर्षों में सड़क की स्थिति में नाटकीय रूप से सुधार हुआ है।

संस्कृति[संपादित करें]

समारोह[संपादित करें]

गिधौर की दुर्गा-पूजा बहुत प्रसिद्ध है। नवरात्रि में दुर्गा मंदिर में हजारों लोग आते हैं।

इसके अलावा, होली, दिवाली, छठ पूजा, ईद, मुहर्रम, रामनवमी व्यापक रूप से मनाई जाती है।

भोजन[संपादित करें]

गिद्धौर का तिलकुट बहुत प्रसिद्ध है। यह तिल और खोआ से तैयार किया जाता है। यह शरीर को गर्मी और ऊर्जा प्रदान करता है जो सर्दी जुकाम को मात देने में मदद करता है। यह डिश बहुत लोकप्रिय और स्वादिष्ट है।

पर्यटक स्थल[संपादित करें]

मिंटो टॉवर[संपादित करें]

मिंटो टॉवर का निर्माण 1909 में गिद्धौर के महाराजा ने तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड इरविन की गिद्धौर यात्रा के दौरान करवाया था। यह मुख्य जमुई-झाझा राज्य राजमार्ग पर गिद्धौर मार्केट के बीच में है। इसमें 12 बड़े स्तंभ हैं। चार बाहरी स्तंभों पर बड़े बैठे शेर रखे गए है। टॉवर में चार-घंटे की घंटी वाली घड़ी है। 2008-09 में 100 वीं वर्षगांठ के लिए टॉवर का नवीनीकरण किया गया था। टॉवर गिद्धौर का सबसे प्रमुख प्रतीक है।

महाराजा महल[संपादित करें]

गढ़

यह 14 वीं शताब्दी का एक महल है जो मुख्य बाज़ार के किनारे और उलई नदी के किनारे स्थित है। महल के प्रवेश द्वार पर दो बड़ी तोपें और चारदीवारी पर गार्ड की प्रतिमा पहली बार देखने वालों के लिए मुख्य आकर्षण हैं।

लालकोठी[संपादित करें]

लालकोठी

यह स्वर्गीय महाराजा रावणेश्वर प्रसाद सिंह द्वारा निर्मित और गिद्धौर के स्वर्गीय राजमाता (स्वर्गीय महाराजा बहादुर प्रताप सिंह पूर्व बांका के गिरिराज कुमारी माता) द्वारा स्वर्गीय सुरेन्द्र सिंह को दिया गया निजी घर है। इसके अंदर सुंदर बगीचा है। सभी इमारत की दीवारें बड़ी आयताकार लाल ईंटों से बनाई गई हैं और इस प्रकार इसका नाम अलाल-कोठी (लाल इमारत) पड गया।

कोकिलचंद बाबा मंदिर, गंगरा[संपादित करें]

जमुई जिले में गंगरा एक गाँव है, जो बाबा कोकिलचंद के पैतृक निवास के लिए प्रसिद्ध है। कोकिलचंद बाबा मंदिर में चारों ओर से लोग पूजा करने आते हैं। यह 700 साल पुराना माना जाता है।

प्रशिद्ध लोग[संपादित करें]

  • महाराजा बहादुर प्रताप सिंहजी (1935 - 2012) पूर्व संसद सदस्य, बांका (बिहार)
  • दिग्विजय सिंह, (1955-2010) पूर्व केंद्रीय मंत्री
  • पुतुल कुमारी, पूर्व सांसद बांका (डब्ल्यू / ओ दिग्विजय सिंह)
  • श्रेयसी सिंह, भारतीय डबल ट्रैप शूटर, स्वर्ण पदक विजेता

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Patsanda, Overview. "Demographics". Census 2011. मूल से 21 जुलाई 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 July 2015.
  2. "Population of Patsanda Village, Gidhaur, Bihar". populationofindia.co.in. मूल से 18 फ़रवरी 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 February 2015.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]