कालपुरुष

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कालपुरुष की परिकल्पना भारतीय ज्योतिष में मिलती है जिसमें समस्त राशिचक्र को मनुष्य के शरीर के समतुल्य वर्णित किया जाता है।

सारावली ग्रंथ में कहा गया है कि :

शीर्षास्यबाहुह्रदयं जठरं कटिबस्तिमेहनोरुयुगम। जानू जंघे चरणौ कालस्यागांनि राशयोअजाद्या: ॥[1]

१२ राशियां के रूप में कालपुरुष के शरीर के अवयव इस प्रकार से हैं:

भदावरी ज्योतिष के अनुसार समय पर जो सामने है वही कालपुरुष की छवि कही गई है। ब्रहमा, विष्णु और महेश, यह तीनों कालपुरुष के धनात्मक, रूप तथा महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली कालपुरुष का ॠणात्मक रूप माने जाते हैं।

इस रूप में कालपुरुष के शरीर के अवयव मानव शरीर के अवयवों के समान्तर माने गये हैं। राशियों के अनुसार ही जातक के जीवन का फ़लादेश किया जाता है, जो फ़लित ज्योतिष कहलाती है। उदाहरण के लिए - लग्न में जो भी राशि होती है, उसी के अनुसार जातक की प्रकॄति और बनावट होती है, कद काठी और हाव भाव आदि लग्न के अनुरूप ही बखान किये जाते हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. कैलाशनाथ उपाध्याय (२०००). जन्मांग फल विचार. मोतीलाल बनारसीदास पब्लिकेशन. पृ॰ १०७. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788120826045.