राशियाँ

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राशियाँ राशिचक्र के उन बारह बराबर भागों को कहा जाता है जिन पर ज्योतिषी आधारित है। हर राशि सूरज के क्रांतिवृत्त (ऍक्लिप्टिक) पर आने वाले एक तारामंडल से सम्बन्ध रखती है और उन दोनों का एक ही नाम होता है - जैसे की मिथुन राशि और मिथुन तारामंडल। यह बारह राशियां हैं -

  1. मेष राशि:-

राशि चिह्न भेड़ अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 20 मार्च – 20 अप्रैल (2019, यूटीसी) नक्षत्र मेष तारामंडल राशि तत्त्व अग्नि राशि गुण कार्डिनल स्वामी मंगल डेट्रिमेण्ट शुक्र देवता एग्ज़ाल्टेशन सूर्य फ़ॉल शनि खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना मेष (Aries) संपादित करें

राशि चक्र की यह पहली राशि है, इस राशि का चिन्ह ”मेढा’ या भेडा है, इस राशि का विस्तार चक्र राशि चक्र के प्रथम 30 अंश तक (कुल 30 अंश) है। राशि चक्र का यह प्रथम बिन्दु प्रतिवर्ष लगभग 50 सेकेण्ड की गति से पीछे खिसकता जाता है। इस बिन्दु की इस बक्र गति ने ज्योतिषीय गणना में दो प्रकार की पद्धतियों को जन्म दिया है। भारतीय ज्योतिषी इस बिन्दु को स्थिर मानकर अपनी गणना करते हैं। इसे निरयण पद्धति कहा जाता है। और पश्चिम के ज्योतिषी इसमे अयनांश जोडकर ’सायन’ पद्धति अपनाते हैं। किन्तु हमे भारतीय ज्योतिष के आधार पर गणना करनी चाहिये। क्योंकि गणना में यह पद्धति भास्कर के अनुसार सही मानी गई है। मेष राशि पूर्व दिशा की द्योतक है, तथा इसका स्वामी ’मंगल’ है। इसके तीन द्रेष्काणों (दस दस अंशों के तीन सम भागों) के स्वामी क्रमश: मंगल-मंगल, मंगल-सूर्य, और मंगल-गुरु हैं। मेष राशि के अन्तर्गत अश्विनी नक्षत्र के चारों चरण और कॄत्तिका का प्रथम चरण आते हैं। प्रत्येक चरण 3.20' अंश का है, जो नवांश के एक पद के बराबर का है। इन चरणों के स्वामी क्रमश: अश्विनी प्रथम चरण में केतु-मंगल, द्वितीय चरण में केतु-शुक्र, तॄतीय चरण में केतु-बुध, चतुर्थ चरण में केतु-चन्द्रमा, भरणी प्रथम चरण में शुक्र-सूर्य, द्वितीय चरण में शुक्र-बुध, तॄतीय चरण में शुक्र-शुक्र, और भरणी चतुर्थ चरण में शुक्र-मंगल, कॄत्तिका के प्रथम चरण में सूर्य-गुरु हैं।

नक्षत्र चरणफल संपादित करें

अश्विनी भदावरी ज्योतिष नक्षत्र के प्रथम चरण के अधिपति केतु-मंगल जातक को अधिक उग्र और निरंकुश बना देता है। वह किसी की जरा सी भी विपरीत बात में या कर्य में जातक को क्रोधात्मक स्वभाव देता है, फ़लस्वरूप जातक बात बात मे झगडा करने को उतारू हो जाता है। जातक को किसी की आधीनता पसंद नहीं होती है। वह अपने अनुसार ही कार्य और बात करना पसंद करता है। दूसरे चरण के अधिपति केतु-शुक्र, जातक को ऐसो आराम की जिन्दगी जीने के लिये मेहनत वाले कार्यों से दूर रखता है, और जातक विलासी हो जाता है। तीसरे चरण के अधिपति केतु-बुध जातक के दिमाग में विचारों की स्थिरता लाता है, और जातक जो भी सोचता है, करने के लिये उद्धत हो जाता है। चौथे चरण के अधिपति केतु-चन्द्रमा जातक में भटकाव वाली स्थिति पैदा करता है, वह अपनी जिन्दगी में यात्रा को महत्व देता है, और जनता के लिये अपनी सहायतायें वाली सेवायें देकर पूरी जिन्दगी निकाल देगा। भरणी भदावरी ज्योतिष के प्रथम चरण के अधिपति शुक्र-सूर्य, जातक को अभिमानी और चापलूस प्रिय बनाता है। दूसरा चरण के अधिपति शुक्र-बुध जातक को बुद्धि वाले कामों की तरफ़ और संचार व्यवस्था से धन कमाने की वॄत्ति देता है। तीसरे चरण के अधिपति शुक्र-शुक्र विलासिता प्रिय और दोहरे दिमाग का बनाता है, लेकिन अपने विचारों को उसमे सतुलित करने की अच्छी योग्यता होती है। चौथे चरण के अधिपति शुक्र-मंगल जातक में उग्रता के साथ विचारों को प्रकट न करने की हिम्मत देते हैं, वह हमेशा अपने मन मे ही लगातार माया के प्रति सुलगता रहता है। जीवन साथी के प्रति बनाव बिगाड हमेशा चलता रहता है, मगर जीवन साथी से दूर भी नहीं रहा जाता है। कॄत्तिका नक्षत्र के प्रथम चरण के अधिपति सूर्य-गुरु, जातक में दूसरों के प्रति सद्भावना और सदविचारों को देने की शक्ति देते हैं, वे अपने को समाज और परिवार में शालीनता की गिनती मे आते है। लगन संपादित करें

जिन जातकों के जन्म समय में निरयण चन्द्रमा मेष राशि में संचरण कर रहा होता है, उनकी मेष राशि मानी जाती है, जन्म समय में लगन मे मेष राशि होने पर भी यह अपना प्रभाव दिखाती है। मेष लगन मे जन्म लेने वाला जातक दुबले पतले शरीर वाला, अधिक बोलने वाला, उग्र स्वभाव वाला, रजोगुणी, अहंकारी, चंचल, बुद्धिमान, धर्मात्मा, बहुत चतुर, अल्प संतति, अधिक पित्त वाला, सब प्रकार के भोजन करने वाला, उदार, कुलदीपक, स्त्रियों से अल्प स्नेह, इनका शरीर कुछ लालिमा लिये होता है। मेष लगन मे जन्म लेने वाले जातक अपनी आयु के 6,8,15,20,28,34,40,45,56 और 63 वें साल में शारीरिक कष्ट और धन हानि का सामना करना पडता है,16,20,28,34,41,48 और 51 साल मे जातक को धन की प्राप्ति वाहन सुख, भाग्य वॄद्धि, आदि विविध प्रकार के लाभ और आनन्द प्राप्त होते हैं।

प्रकॄति/स्वभाव संपादित करें

मेष अग्नि तत्व वाली राशि है, अग्नि त्रिकोण (मेष, सिंह, धनु) की यह पहली राशि है, इसका स्वामी मंगल अग्नि ग्रह है, राशि और स्वामी का यह संयोग इसकी अग्नि या ऊर्जा को कई गुना बढा देती है, यही कारण है कि मेश जातक ओजस्वी, दबंग, साहसी, और दॄढ इच्छाशक्ति वाले होते हैं, यह जन्म जात योद्धा होते हैं। मेश राशि वाले व्यक्ति बाधाओं को चीरते हुए अपना मार्ग बनाने की कोशिश करते हैं।

शीर्षक संपादित करें

आर्थिक गतिविधियां संपादित करें

मेष जातकों के अन्दर धन कमाने की अच्छी योग्यता होती है, उनको छोटे काम पसंद नहीं होते हैं, उनके दिमाग में हमेशा बडी बडी योजनायें ही चक्कर काटा करती है, राजनीति के अन्दर नेतागीरी, संगठन कर्ता, उपदेशक, अच्छा बोलने वाले, कम्पनी को प्रोमोट करने वाले, रक्षा सेवाओं में काम करने वाले, पुलिस अधिकारी, रसायन शास्त्री, शल्य चिकित्सिक, कारखानों ए अन्दर लोहे और इस्पात का काम करने वालेभी होते हैं, खराब ग्रहों का प्रभाव होने के कारण गलत आदतों में चले जाते हैं, और मारकाट या दादागीरी बाली बातें उनके दिमाग में घूमा करतीं हैं, और अपराध के क्षेत्र मे प्रवेश कर जाते हैं।

स्वास्थ्य और रोग संपादित करें अधिकतर मेष राशि वाले जातकों का शरीर ठीक ही रहता है, अधिक काम करने के उपरान्त वे शरीर को निढाल बना लेते हैं, मंगल के मालिक होने के कारण उनके खून मे बल अधिक होता है, और कम ही बीमार पडते हैं, उनके अन्दर रोगों से लडने की अच्छी क्षमता होती है। अधिकतर उनको अपनी सिर की चोटों से बच कर रहना चाहिये, मेष से छठा भाव कन्या राशि का है, और जातक में पाचन प्रणाली मे कमजोरी अधिकतर पायी जाती है, मल के पेट में जमा होने के कारण सिरदर्द, जलन, तीव्र रोगों, सिर की बीमारियां, लकवा, मिर्गी, मुहांसे, अनिद्रा, दाद, आधाशीशी, चेचक, और मलेरिया आदि के रोग बहुत जल्दी आक्रमण करते हैं। __________________________________

  1. वृष राशि:-

राशि चिह्न सांड अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 20 अप्रैल – 21 मई (2019, यूटीसी) नक्षत्र वृषभ तारामंडल राशि तत्त्व पृथ्वी राशि गुण फ़िक्स्ड स्वामी शुक्र डेट्रिमेण्ट मंगल देवता एग्ज़ाल्टेशन चंद्रमा फ़ॉल कोई ग्रह नहीं खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना वॄष (Taurus) संपादित करें राशि चक्र की यह दूसरी राशि है, इस राशि का चिन्ह ’बैल’ है, बैल स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी और बहुत अधिक वीर्यवान होता है, साधारणत: वह शांत रहता है, किन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है। यह स्वभाव वॄष राशि के जातक में भी पाया जाता है, वॄष राशि का विस्तार राशि चक्र के 30 अंश से 60 अंश के बीच पाया जाता है, इसका स्वामी शुक्र ग्रह है। इसके तीन देष्काणों में उनके स्वामी ’शुक्र-शुक्र”, शुक्र-बुध’, और शुक्र-शनि, हैं। इसके अन्तर्गत कॄत्तिका नक्षत्र के तीन चरण,रोहिणी के चारों चरण, और मॄगसिरा के प्रथम दो चरण आते हैं। इन चरणों के स्वामी कॄत्तिका के द्वितीय चरण के स्वामी सूर्य-शनि, तॄतीय चरण के स्वामी चन्द्रमा-शनि, चतुर्थ चरण के स्वामी सूर्य-गुरु, हैं।रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण के स्वामी चन्द्रमा-मंगल, दूसरे चरण के स्वामी चन्द्रमा-शुक्र, तीसरे चरण के स्वामी चन्द्रमा-बुध, चौथे चरण के स्वामी चन्द्रमा-चन्द्रमा, है।मॄगसिरा नक्षत्र के पहले चरण के मालिक मंगल-सूर्य, और दूसरे चरण के मालिक मंगल-बुध है। च्च्म्, च्ह्ग्फ्म्म्क्

नक्षत्र चरण फ़ल संपादित करें कॄत्तिका के दूसरे चरण और तीसरे चरण के मालिक सूर्य-शनि, जातक के जीवन में पिता पुत्र की कलह फ़ैलाने में सहायक होते है, जातक का मानस सरकारी कामों की तरफ़ ले जाने, और सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता देते हैं, पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिक तर मंगल के बद हो जाने की दशा में शराब, काबाब और भूत के भोजन में अपनी रुचि को प्रदर्शित करता है। कॄत्तिका के चौथे चरण के मालिक सूर्य और गुरु का प्रभाव जातक में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है, वह जब भी कोई बात करता है तो गर्व की बात करता है, सरकारी क्षेत्रों की शिक्षाये और उनके काम जातक को अपनी तरफ़ आकर्षित करते हैं, और किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है। रोहिणी के प्रथम चरण का मालिक चन्द्रमा-मंगल है, दोनो का संयुक्त प्रभाव जातक के अन्दर मानसिक गर्मी को प्रदान करता है, कल कारखानों, अस्पताली कामों और जनता के झगडे सुलझाने का काम जातक कर सकता है, जातक की माता आपत्तियों से घिरी होती है, और पिता का लगाव अन्य स्त्रियों से बना रहता है। रोहिणी के दूसरे चरण के मालिक चन्द्र-शुक्र जातक को अधिक सौन्दर्य बोधी और कला प्रिय बनादेता है। जातक कलाकारी के क्षेत्र में अपना नाम करता है, माता और पति का साथ या माता और पत्नी का साथ घरेलू वातावरण में सामजस्यता लाता है, जातक या जातिका अपने जीवन साथी के अधीन रहना पसंद करता है। रोहिणी के तीसरे चरण के मालिक चन्द्र-बुध जातक को कन्या संतान अधिक देता है, और माता के साथ वैचारिक मतभेद का वातावरण बनाता है, जातक या जातिका के जीवन में व्यापारिक यात्रायें काफ़ी होती हैं, जातक अपने ही बनाये हुए उसूलों पर अपना जीवन चलाता है, अपनी ही क्रियायों से वह मकडी जैसा जाल बुनता रहता है और अपने ही बुने जाल में फ़ंस कर अपने को समाप्त भी कर लेता है। रोहिणी के चौथे चरण के मालिक चन्द्र-चन्द्र है, जातक के अन्दर हमेशा उतार चढाव की स्थिति बनी रहती है, वह अपने ही मन का राजा होता है। मॄगसिरा के पहले चरण के मालिक मंगल-सूर्य हैं, अधिक तर इस युति मैं पैदा होने वाले जातक अपने शरीर से दुबले पतले होने के वावजूद गुस्से की फ़ांस होते हैं, वे अपने को अपने घमंड के कारण हमेशा अन्दर ही अन्दर सुलगाते रहते हैं। उनके अन्दर आदेश देने की वॄति होने से सेना या पुलिस में अपने को निरंकुश बनाकर रखते है, इस तरह के जातक अगर राज्य में किसी भी विभाग में काम करते हैं तो सरकारी सम्पत्ति को किसी भी तरह से क्षति नहीं होने देते. मॄगसिरा के दूसरे चरण के मालिक मंगल-बुध जातक के अन्दर कभी कठोर और कभी नर्म वाली स्थिति पैदा कर देते हैं, कभी तो जातक बहुत ही नरम दिखाई देता है, और कभी बहुत ही गर्म मिजाजी बन जाता है। जातक का मन कम्प्यूटर और इलेक्ट्रोनिक सामान को बनाने और इन्ही की इन्जीनियरिंग की तरफ़ सफ़लता भी देता है। लगन संपादित करें जब चन्द्रमा निरयण पद्धति से वॄष राशि में होता है तो जातक की वॄष राशि मानी जाती है, जन्म समय में जन्म लगन वॄष होने पर भी यही प्रभाव जातक पर होता है। इस राशि में पैदा होने वाले जातक शौकीन तबियत, सजावटी स्वभाव, जीवन साथी के साथ मिलकर कार्य करने की वॄत्ति, अपने को उच्च समाज से जुड कर चलने वाले, अपने नाम को दूर दूर तक फ़ैलाने वाले, हर किसी के लिये उदार स्वभाव, भोजन के शौकीन, बहुत ही शांत प्रकॄति, मगर जब क्रोध आजाये तो मरने मारने के लिये तैयार, बचपन में बहुत शैतान, जवानी में कठोर परिश्रमी, और बुढापे में अधिक चिताओं से घिरे रहने वाले, जीवन साथी से वियोग के बाद दुखी रहने वाले, और अपने को एकांत में रखने वाले, पाये जाते हैं। इनके जीवन में उम्र की 45 वीं साल के बाद दुखों का बोझ लद जाता है, और अपने को आराम में नहीं रखपाते हैं। वॄष पॄथ्वी तत्व वाली राशि और भू मध्य रेखा से 20 अंश पर मानी गई है, वॄष, कन्या, मकर, का त्रिकोण, इनको शुक्र-बुध-शनि की पूरी योग्यता देता है, माया-व्यापार-कार्य, या धन-व्यापार-कार्य का समावेश होने के कारण इस राशि वाले धनी होते चले जाते है, मगर शनि की चालाकियों के कारण यह लोग जल्दी ही बदनाम भी हो जाते हैं। गाने बजाने और अपने कंठ का प्रयोग करने के कारण इनकी आवाज अधिकतर बुलन्द होती है। अपने सहायकों से अधिक दूरी इनको बर्दास्त नहीं होती है।

प्रकॄति और स्वभाव संपादित करें वृष राशि वाले जातक शांति पूर्वक रहना पसंद करते हैं, उनको जीवन में परिवर्तन से चिढ सी होती है, इस राशि के जातक अपने को बार बार अलग माहौल में रहना अच्छा नहीं लगता है। इस प्रकार के लोग सामाजिक होते हैं और अपने से उच्च लोगों को आदर की नजर से देखते है। जो भी इनको प्रिय होते हैं उनको यह आदर खूब ही देते हैं, और सत्कार करने में हमेशा आगे ही रहते है। सुखी और विलासी जीवन जीना पसंद करते हैं।

आर्थिक गतिविधियां संपादित करें इस राशि के जातको में धन कमाने की प्रवॄति और धन को जमा करने की बहुत इच्छा होती है, धन की राशि होने के कारण अक्सर ऐसे जातक खुद को ही धन के प्रयुक्त करते हैं, बुध की प्रबलता होने के कारण जमा योजनाओं में उनको विश्वास होता है, इस राशि के लोग लेखाकारी, अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, कलाकार, सजावट कर्ता, सौन्दर्य प्रसाधन का कार्य करने वाले, प्रसाधन सामग्री के निर्माण कर्ता, आभूषण निर्माण कर्ता, और आभूषण का व्यवसाय करने वाले, विलासी जीवन के साधनो को बनाकर या व्यापार करने के बाद कमाने वाले, खाद्य सामग्री के निर्माण कर्ता, आदि काम मिलते हैं। नौकरी में सरकारी कर्मचारी, सेना या नौसेना में उच्च पद, और चेहरे आदि तथा चेहरा सम्भालने वाले भी होते हैं। धन से धन कमाने के मामले में बहुत ही भाग्यवान माने जाते हैं।

स्वास्थ्य और रोग संपादित करें वॄष राशि वालो के लिये अपने ही अन्दर डूबे रहने की और आलस की आदत के अलावा और कोई बडी बीमारी नहीं होती है, इनमे शारीरिक अक्षमता की आदत नहीं होती है, इनके अन्दर टांसिल, डिप्थीरिया, पायरिया, जैसे मुँह और गले के रोग होते हैं, जब तक इनके दांत ठीक होते है, यह लोग आराम से जीवन को निकालते हैं, और दांत खराब होते ही इनका जीवन समाप्ति की ओर जाने लगता है। बुढापे में जलोदर और लकवा वाले रोग भी पीछे पड जाते है। __________________________________

  1. मिथुन राशि:-

राशि चिह्न जुड़वां अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 21 मई – 21 जून (2019, यूटीसी) नक्षत्र मिथुन राशि तत्त्व वायु राशि गुण म्युटेबल स्वामी बुध डेट्रिमेण्ट बृहस्पति एग्ज़ाल्टेशन कोई ग्रह नहीं फ़ॉल कोई ग्रह नहीं खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना मिथुन राशि ज्यौतिष के राशिचक्र में की तृतीय राशी है। इसका उद्भव मिथुन तारामंडल से माना जाता है। __________________________________

  1. कर्क राशि:-

राशि चिह्न केकड़ा अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 21 जून – 23 जुलाई (2019, यूटीसी) नक्षत्र कर्क राशि तत्त्व जल राशि गुण कार्डिनल स्वामी चंद्रमा डेट्रिमेण्ट शनि एग्ज़ाल्टेशन बृहस्पति फ़ॉल मंगल खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना Cancerb.jpg राशि चक्र की यह चौथी राशि है, यह उत्तर दिशा की द्योतक है, तथा जल त्रिकोण की पहली राशि है, इसका चिन्ह केकडा है, यह चर राशि है, इसका विस्तार चक्र 90 से 120 अंश के अन्दर पाया जाता है, इस राशि का स्वामी चन्द्रमा है, इसके तीन द्रेष्काणों के स्वामी चन्द्रमा, मंगल और गुरु हैं, इसके अन्तर्गत पुनर्वसु नक्षत्र का अन्तिम चरण, पुष्य नक्षत्र के चारों चरण तथा अश्लेशा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

नक्षत्र चरण/फ़ल संपादित करें

पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे चरण के मालिक हैं गुरु-चन्द्रमा, जातक के अन्दर कल्पनाशीलता भरते हैं। पुष्य नक्षत्र के पहले चरण के मालिक शनि-सूर्य हैं, जो कि जातक को मानसिक रूप से अस्थिर बनाते हैं और जातक में अहम की भावना बढाते हैं, कार्य पिता के साथ होने से जातक को अपने आप कार्यों के प्रति स्वतन्त्रता नही मिलने से उसे लगता रहता है, कि उसने जिन्दगी मे कुछ कर ही नही पाया है, जिस स्थान पर भी वह कार्य करने की इच्छा करता है, जातक को परेशानी ही मिलती है। जिसके साथ मिलकर कार्य करने की कोशिश करता है, सामने वाला भी कार्य हीन होकर बेकार हो जाता है।भदावरी ज्योतिष के अनुसार एक वॄतांत मिलता है, कि इस तरह का जातक अपने लिये लगातार पिता से हट कर कार्य करने की कोशिश करता है, वह सबसे पहले खान विभाग मे क्रेसर लगाकर काम करता है और कुछ दिनो में वह खान विभाग बन्द कर देता है, खान (शनि) के बाद वह राजनीति (सूर्य) में जाने की कोशिश करता है और कुछ दिनों मे वह सरकार ही गिर जाती है, वह फ़िर एक बार अपना भाग्य रेलवे के कामों की तरफ़ ले जाता है और एक ठेकेदार के साथ मिलकर कार्य करने की कोशिश करता है, कुछ समय बाद जिस ठेकेदार के साथ मिलकर कार्य करता है, वह भी फ़ेल होकर घर बैठ जाता है, तीसरी बार जमीनी कामों मे अपना भाग्य अजवाने के लिये वह जमीनो को खरीदने बेचने का काम करना चाहता है, लेकिन जिन जमीनो के लिये वह सौदा करना चाहता है, उन जमीनो के मालिक अपना फ़ैसला ही बदल कर बेचने की मनाही कर देते है। इस प्रकार से बाद में वह अपने पिता के द्वारा चलाया जाने वाला एक छोटा सा जनरल स्टोर पिता के साथ चलाता है और आज भी पैंतालीस साल की उम्र में बेरोजगारी का जीवन बिता रहा है। पुष्य नक्षत्र के दूसरे चरण के मालिक शनि-बुध हैं, शनि कार्य और बुध बुद्धि का ग्रह है, दोनो मिलकर कार्य करने के प्रति बुद्धि को प्रदान करने के बाद जातक को होशियार बना देते है, जातक मे भावनात्मक पहलू खत्म सा हो जाता है और गम्भीरता का राज हो जाता है। तीसरे चरण के मालिक ग्रह शनि-शुक्र हैं, शनि जातक के पास धन और जायदाद देता है, तो शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है। शनि अधिक वासना देता है, तो शुक्र भोगों की तरफ़ जाता है। चौथे चरण के मालिक शनि-मंगल है, जो जातक में जायदाद और कार्यों के प्रति टेकनीकल रूप से बनाने और किराये आदि के द्वारा धन दिलवाने की कोशिश करते हैं, शनि दवाई और मंगल डाक्टर का रूप बनाकर चिकित्सा के क्षेत्र में जातक को ले जाते हैं। अश्लेशा नक्षत्र के पहले चरण के मालिक बुध-गुरु है, बुध बोलना और गुरु ज्ञान के लिये, जातक को उपदेशक बनाने के लिये दोनो अपनी शक्ति प्रदान करते है, बुध और गुरु की युती जातक को धार्मिक बातों को प्रसारित करने के प्रति भी अपना प्रभाव देते हैं। दूसरे चरण के मालिक बुध-शनि है, जो जातक को बुध आंकडे और शनि लिखने का प्रभाव देते हैं। तीसरे चरण के मालिक भी बुध-शनि हैं, जो कि कम्प्यूटर आदि का प्रोग्रामर बनाने में जातक को सफ़लता देते है, जातक एस्टीमेट बनाने मे कुशल हो जाता है। चौथे चरण के मालिक बुध-गुरु होते हैं, जो जातक में देश विदेश में घूमने और नई खोजों के प्रति जाने का उत्साह देते है। लगन संपादित करें

जिन जातकों के जन्म समय में निरयण चन्द्रमा कर्क राशि में संचरण कर रहा होता है, उनकी जन्म राशि कर्क मानी जाती है, जन्म के समय लगन कर्क राशि के अन्दर होने से भी कर्क का ही प्रभाव मिलता है, कर्क लगन मे जन्म लेने वाला जातक श्रेष्ठ बुद्धि वाला, जलविहारी, कामुक, कॄतज्ञ, ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों का सेवी और भोगी होता है, उसे शानो शौकत से रहना पसंद होता है, वो असाधरण प्रतिभा से अठखेलियां करता है, तथा उत्कॄष्ट आदर्श वादी, सचेतक और निष्ठावान होता है, उसके रोम रोम में मातॄ-भक्ति भरी रहती है।

प्रकॄति/स्वभाव संपादित करें

कर्क जातकों की प्रवॄति और स्वभाव समझने के लिये हमें कर्क के एक विशेष गुण की आवश्य ध्यान देना होगा, कर्क केकडा जब किसी वस्तु या जीव को अपने पंजों के जकड लेता है, तो उसे आसानी से नही छोडता है, भले ही इसके लिये उसे अपने पंजे गंवाने पडें. कर्क जातकों में अपने प्रेम पात्रों तथा विचारोम से चिपके रहने की प्रबल भावना होती है, यह भावना उन्हें ग्रहणशील, एकाग्रता और धैर्य के गुण प्रदान करती है, उनका मूड बदलते देर नही लगती है, उनके अन्दर अपार कल्पना शक्ति होती है, उनकी स्मरण शक्ति बहुत तीव्र होती है, अतीत का उनके लिये भारी महत्व होता है, कर्क जातकों को अपने परिवार में विशेषकर पत्नी तथा पुत्र के के प्रति प्रबल मोह होता है, उनके बिना उनका जीवन अधूरा रहता है, मैत्री को वे जीवन भर निभाना जानते हैं, अपनी इच्छा के स्वामी होते हैं, तथा खुद पर किसी भी प्रकार का अंकुश थोपा जाना सहन नहीं करते, ऊंचे पदों पर पहुंचते हैं और भारी यश प्राप्त करते हैं, वो उत्तम कलाकार, लेखक, संगीतज्ञ, या नाटककार बनते हैं, कुछ व्यापारी या उत्तम मनोविश्लेषक बनते हैं, अपनी गुप्त विद्याओं धर्म या किसी असाधारण जीवन दर्शन में वो गहरी दिलचस्पी पैदा कर लेते हैं।

आर्थिक गतिविधिया संपादित करें

कर्क जातक बडी बडी योजनाओं का सपना देखने वाले होते हैं, परिश्रमी और उद्यमी होते हैंउनको प्राय: अप्रत्यासित सूत्र या विचित्र साधनों से और अजनबियों के संपर्क में आने से आर्थिक लाभ होता है, कुच अन्य आर्थिक क्षेत्र जिनमे वो सफ़ल हो सकते है, उअन्के अन्दर जैसे दवाओं और द्रव्यों का आयात, अन्वेशण और खोज, भूमि या खानों का विकास, रेस्टोरेन्ट, जल से प्राप्त होने वाली वस्तुओं और दुग्ध पदार्थ आदि, वे जन उपयोगी बडी बडी कम्पनियों में धन लगाना भी उनके लिये लाभदायक रहता है।

स्वास्थ्य/रोग संपादित करें

कर्क जातक बचपन में प्राय: दुर्बल होते हैं, किन्तु आयु के साथ साथ उनके शरीर का विकास होता जाता है, चूंकि कर्क कालपुरुष की वक्षस्थल और पेट का प्रतिधिनित्व करती है, अत: कर्क जातकों को अपने भोजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, अधिक कल्पना शक्ति के कारण कर्क जातक सपनों के जाल बुनते रहते हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है, उन्हें फ़ेफ़डों के रोग, फ़्लू, खांसी, दमा, श्वास रोग, प्लूरिसी और क्षय रोग भी होते हैं, उदर रोग और स्नावयिक दुरबलता, भय की भावना, मिर्गी, पीलिया, कैंसर और गठिया रोग भी होते देखे गये है। __________________________________

  1. सिंह राशि:-

राशि चिह्न

सिंह

अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 23 जुलाई – 23 अगस्त (2019, यूटीसी) नक्षत्र सिंह राशि तत्त्व अग्नि राशि गुण फ़िक्स्ड स्वामी सूर्य डेट्रिमेण्ट शनि एग्ज़ाल्टेशन कोई ग्रह नहीं फ़ॉल कोई ग्रह नहीं खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना सिंह (Leo) राशि चक्र की पाचवीं राशि है। और पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिन्ह शेर है। इसका विस्तार राशि चक्र के 120 अंश से 150 अंश तक है।सिंह राशि का स्वामी सूर्य है, और इस राशि का तत्व अग्नि है। इसके तीन द्रेष्काण और उनके स्वामी सूर्य,गुरु, और मंगल, हैं। इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण,पूर्वाफ़ाल्गुनी के चारों चरण, और उत्तराफ़ाल्गुनी का पहला चरण आता है। यह बहुत शक्तिशाली है।

नक्षत्र चरण और उनके फ़ल संपादित करें मघा के प्रथम चरण का मालिक केतु-मंगल है, जो जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। द्वितीय चरण के मालिक केतु-शुक्र है, जो जातक में सजावटी और सुन्दरता के प्रति भावना को बढाता है। तीसरा चरण केतु-बुध के अन्तर्गत आता है, जो जातक में कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिये सोच पैदा करता है, चौथा चरण चन्द्र-केतु के अन्तर्गत आता है, जो जातक में की जाने वाली कल्पना शक्ति का विकास करता है। पूर्वाफ़ाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण शुक्र-सूर्य के सानिध्य में जातक को स्वाभाविक प्रवॄत्तियों की तरफ़ बढाता है। दूसरा चरण सुन्दरता का बोध करवाने में सहायक होता है। तीसरा चरण सुन्दरता के प्रति मोह देता है और कामुकता की तरफ़ भेजता है। चौथा चरण जातक के द्वारा किये गये वादे को क्रियात्मक रूप मे बदलने में सहायता करता है। उत्तराफ़ाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण जातक में अपने प्रति स्वतन्त्रता की भावना भरता है, और जातक को किसी की बात न मानने के लिये बाध्य करता है। लगन संपादित करें जिन व्यक्तियों के जन्म समय में चन्द्रमा सिंह लगन मे होता है, वे सिंह राशि के जातक कहलाते हैं, जो इस लगन में पैदा होते हैं वे भी इस राशि के प्रभाव में होते है।पांडु मिट्टी के रंग वाले जातक,पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले लोग, रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं, कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है, छाती बडी होने के कारण इनमें हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नही चूकते.इस लगन में जन्म लेने वाला जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अन्तिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है।

प्रकॄति और स्वभाव संपादित करें सिंह राशि शाही राशि मानी जा्ती है, सोचना शाही, करना शाही, खाना शाही, और रहना शाही, इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं, उनके अन्दर छछोडपन वाली बात नही होती है, अपनी मर्यादा में रहना, और जो भी पहले से चलता आया है, उसे ही सामने रख कर अपने जीवन को चलाना, इस राशि वाले व्यक्ति से सीखा जा सकता है। सिह राशि वाला जातक जब किसी के घर जायेगा, तो वह किसी के द्वारा दिये जाने वाले आसन की आशा नही करेगा, वह जहां भी उचित और अपने लायक आसन देखेगा, जाकर बैठ जायेगा, वह जो खाता है वही खायेगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नही है, जिस किसी से प्रेम करेगा, उसके मरते दम तक निभायेगा, जीवन साथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नही है, और सबसे अधिक अपने जीवन साथी के बारे में वह किसी का दखल पसंद नही कर सकता है,

आर्थिक गतिविधियां संपादित करें इस राशि वाले जातक कठोर मेहनत करने के आदी होते हैं, और राशि के प्रभाव से धन के मामलों में बहुत ही भाग्यशाली होते हैं, पंचम राशि का प्रभाव कालपुरुष की कुन्डली के अनुसार इनको तुरत धन वाले क्षेत्रों में भेजता है, और समय पर इनके द्वारा किये गये पूर्व कामों के अनुसार ईश्वर इनको इनकी जरूरत का चैक भेज देता है। इस राशि वाले जातक जो भी काम करते हैं वे दूसरों को अस्मन्जस में डाल देने वाले होते है, लोग इनके कामों को देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं। स्वर्ण, पीतल, और हीरा जवाहरात के व्यवसाय इनको बहुत फ़ायदा देने वाले होते हैं,सरकार जैसे और राजाओं जैसे ज़िन्दगी जीने का शौक रखते हैं|

स्वास्थ्य और रोग संपादित करें इस राशि के जातकों की वाणी और चाल में शालीनता पायी जाती है। इस राशि वाले जातक सुगठित शरीर के मालिक होते हैं |अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ रहते है, या फ़िर आजीवन बीमार रहते हैं, जिस वातावरण में इनको रहना चाहिये, अगर वह न मिले, इनके अभिमान को कोई ठेस पहुंचाये, या इनके प्रेम में कोई बाधा आये, तो यह लोग अपने मानसिक कारणों से बीमार रहने लगते है, इनके लिये भदावरी ज्योतिष की यह कहावत पूर्ण रूप से खरी उतरती है, कि मन से तन जुडा है, और जब मन बीमार होगा तो उसका प्रभाव तन पर पडेगा, अधिकतर इस राशि के लोग रीढ की हड्डी की बीमारी या चोटों से अपने जीवन को खतरे में डाल लेते हैं, और इस हड्डी का प्रभाव सम्पूर्ण शरीर पर होने से, चोट अथवा बीमारी से शरीर का वही भाग निष्क्रिय हो जाता है, जिस भाग में रीढ की हड्डी बाधित होती है। वैसे इस राशि के लोगों के लिये ह्रदय रोग,धडकन का तेज होना,लू लगना, और संधिवात ज्वर होना आदि होता है. __________________________________

  1. कन्या राशि:-

राशि चिह्न कुवांरी कन्या अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 23 अगस्त – 23 सितम्बर (2019, यूटीसी) नक्षत्र कन्या तारामंडल राशि तत्त्व पृथ्वी राशि गुण म्युटेबल स्वामी बुध डेट्रिमेण्ट बृहस्पति एग्ज़ाल्टेशन बुध फ़ॉल देवता खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार Astrology project

कन्या राशि यह राशि चक्र की छठी राशि है।दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फ़ूल की डाली लिये कन्या है। इसका विस्तार राशि चक्र के १५० अंशों से १८० अंश तक है। इस राशि का स्वामी बुध है, इस राशि के तीन द्रेष्काणों के स्वामी बुध,शनि और शुक्र हैं। इसके अन्तर्गत उत्तराफ़ाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण,चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते है। उत्तराफ़ाल्गुनी के दूसरे चरण के स्वामी सूर्य और शनि है, जो जातक को उसके द्वारा किये जाने वाले कार्यों के प्रति अधिक महत्वाकांक्षा पैदा करते है, तीसरे चरण के स्वामी भी उपरोक्त होने के कारण दोनो ग्रहों के प्रभाव से घर और बाहर के बंटवारे को जातक के मन में उत्पन्न करती है। चौथा चरण भावना की तरफ़ ले जाता है और जातक दिमाग की अपेक्षा ह्रदय से काम लेना चालू कर देता है। इस राशि के लोग संकोची और शर्मीले प्रभाव के साथ झिझकने वाले देखे जाते है। मकान, जमीन.और सेवाओं वाले कार्य ही इनकी समझ में अधिक आते हैं, कर्जा, दुश्मनी और बीमारी के प्रति इनका लगाव और सेवायें देखने को मिलती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से फेफड़ों में ठन्ड लगना और पाचन प्रणाली के ठीक न रहने के कारण आंतों में घाव हो जाना, आदि बीमारियाँ इस प्रकार के जातकों में मिलती है।

देवी दुर्गा का एक नाम।

कन्या राशि संपादित करें यह राशि चक्र की छठी राशि है।दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फ़ूल की डाली लिये कन्या है। इसका विस्तार राशि चक्र के १५० अंशों से १८० अंश तक है। इस राशि का स्वामी बुध है, इस राशि के तीन द्रेष्काणों के स्वामी बुध,शनि और शुक्र हैं। इसके अन्तर्गत उत्तराफ़ाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण,चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते है। इन चरणों के स्वामीऔर विस्तार इस प्रकार से है।

नक्षत्र चरण और फ़ल संपादित करें उत्तराफ़ाल्गुनी के दूसरे चरण के स्वामी सूर्य और शनि है। जो जातक को उसके द्वारा किये जाने वाले कार्यों के प्रति अधिक महत्वाकांक्षा पैदा करते है, तीसरे चरण के स्वामी भी उपरोक्त होने के कारण दोनो ग्रहों के प्रभाव से घर और बाहर के बंटवारे को जातक के मन में उत्पन्न करती है। चौथा चरणभावना की तरफ़ ले जाता है और जातक दिमाग की अपेक्षा ह्रदय से काम लेना चालू कर देता है।

प्रकॄति संपादित करें सकोची और शर्मीले प्रभाव के साथ झिझकने वाले जातक कन्या राशि के ही देखे जाते है।

आर्थिक फ़ल संपादित करें मकान, जमीन.और सेवाओं वाले कार्य ही इनकी समझ में अधिक आते हैं,कर्जा,दुश्मनी और बीमारी के प्रति इनका लगाव और सेवायें देखने को मिलती है।

स्वास्थ्य संपादित करें फ़ेफ़डों में ठन्ड लगना और पाचन प्रणाली के ठीक न रहने के कारण आंतों में घाव हो जाना, आदि बीमारिया इस प्रकार के जातकों में मिलती है। सारावली,भदावरी ज्योतिष| __________________________________

  1. तुला राशि:-

राशि चिह्न तराजु अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 23 सितम्बर – 23 अक्टूबर (2019, यूटीसी) नक्षत्र तुला तारामंडल राशि तत्त्व वायु राशि गुण कार्डिनल स्वामी शुक्र डेट्रिमेण्ट मंगल देवता एग्ज़ाल्टेशन शनि फ़ॉल सूर्य खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना तुला राशि के जातकों की मनोदशा का केवल यही वर्णन नहीं है। भारतीय जनतंत्र में आज जिस व्‍यक्ति की छाप सबसे बड़ी है वह तुला राशि का ही जातक था। मैं बात कर रहा हूं राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की। बाजार में अपनी तुला लिए खड़े व्‍यक्ति के रूप में तुला राशि को दिखाया गया है। विचारों से सम और हर बात को पूरी तरह तौलकर देखने वाला जातक तुला राशि का होगा। हालाँकि इस राशि पर शुक्र का आधिपत्‍य है, इस कारण तुला राशि के जातकों को बनने संवरने, संगीत, चित्रकारी और बागवानी जैसे शौक होते हैं। इसके बावजूद रचनात्‍मक आलोचना और राजनैतिक चातुर्य इन जातकों का ऐसा कौशल होता है कि दूसरे लोग इनसे चकित रहते हैं। वणिक बुद्धि के कारण वाद विवाद में पड़ने के बजाय समझौता करने में अधिक यकीन रखते हैं। इन जातकों का शरीर दुबला पतला और अच्‍छे गठन वाला होता है। चेहरा सुंदर भी न हो तो मुस्‍कान मोहक होती है। इन जातकों को विपरीत योनि वाले सहज आकर्षित करते हैं। हालाँकि इन जातकों की शारीरिक संरचना सुदृढ़ होती है, लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण बीमारियों की पकड़ में जल्‍दी आते हैं। साझीदार के साथ व्‍यापार करना इनके लिए ठीक रहता है। जातक उचित समय पर सही सलाह देता है। ऐसे में साझेदार भी ज्‍यादातर फायदे में रहते हैं। एक बार मित्र बना लें तो हमेशा के लिए अच्‍छे मित्र सिद्ध होते हैं। इन जातकों का पंचमेश शनि होता है। इस कारण तुला लग्‍न के जातकों के अव्‍वल तो संतान कम होती है और अधिक हो भी जाए तो संतान का सुख कम ही मिलता है। इनके लिए शुभ दिन रविवार और सोमवार बताए गए हैं। शुभ रंग नारंगी, श्‍वेत और लाल तथा शुभ अंक एक व दस हैं। ________________________________

  1. वॄश्चिक राशि:-

राशि चिह्न बिच्छू, चील या फ़ीनिक्स अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 23 अक्टूबर – 22 नवम्बर (2019, यूटीसी) नक्षत्र स्कॉर्पियस राशि तत्त्व जल राशि गुण स्थिर स्वामी प्लूटो, मंगल डेट्रिमेण्ट शुक्र एग्ज़ाल्टेशन युरेनस, सूर्य फ़ॉल चंद्र __________________________________

  1. धनु राशि:-

राशि चिह्न धनुर्धर अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 22 नवम्बर – 22 दिसम्बर (2019, यूटीसी) नक्षत्र धनु राशि तत्त्व अग्नि राशि गुण म्यूटेबल स्वामी बृहस्पति डेट्रिमेण्ट बुध एग्ज़ाल्टेशन कोई ग्रह नहीं (कुछ के अनुसार दक्षिणी धुरी) फ़ॉल कोई ग्रह नहीं (कुछ के अनुसार चंद्र धुरी) खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना युवाओं के पथ प्रदर्शक स्‍वामी विवेकान्‍द धनु लग्‍न के जातक थे, तो आपके दिमाग में धनु लग्‍न अथवा धनु राशि से प्रभावित जातकों की छवि तुरंत बन जाएगी। धनु राशि का स्‍वामी गुरु है। इन जातकों की खासियत यह होती है कि ये विपरीत परिस्थिति में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। ये जातक बहुत अधिक सोचते हैं। इस कारण निर्णय करने में देरी भी करते हैं, लेकिन एक बार जिस निर्णय पर पहुंच जाए उससे डिगते नहीं हैं। सत्‍य के साथ रहते हैं और किसी के साथ अन्‍याय हो रहा हो तो उसके साथ जा खड़े होते हैं। बोलने में इतने मुंहफट होते हैं कि यह जाने बिना कि सामने वाले पर क्‍या बीत रही होगी, बोलते जाते हैं। इन लोगों की बोली में ही व्‍यंग्‍य समाया हुआ होता है। सीधी बात कहने की बजाय टोंटिंग में ही बोलते नजर आएंगे। अच्‍छे चेहरे मोहरे, सुगठित शरीर, लम्‍बा चौड़ा ललाट, ऊंची और घनी भौंहों वाले आकर्षक व्‍यक्तित्‍व को देखकर ही समझा जा सकता है कि यह धनु लग्‍न या धनु राशि प्रधान व्‍यक्ति है। ये निडर, साहसी, महत्‍वाकांक्षी, अति लोभी और आक्रामक होते हैं। इन लोगों को जिंदगी में अनायास लाभ नहीं होता है। ये रिश्‍तेदारों के प्रति निर्मम और अपरिचितों के लिए नम्र होते हैं। ये तेजी से मित्र बनाते हैं और लम्‍बे समय तक उसे निभाते भी हैं। अगर किसी व्‍यक्ति की धनु राशि या धनु लग्‍न की कन्‍या से विवाह हो तो उसे भाग्‍यशाली समझना चाहिए। क्‍योंकि ऐसी कन्‍या अपने पति को समझने वाली और सही परामर्श देने वाली होती है। इनके लिए शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार बताए गए हैं। शुभ रंग श्‍वेत, क्रीम, हरा, नारंगी और हल्‍का नीला बताया गया है। शुभ अंक छह, पांच, तीन और आठ हैं। _________________________________

  1. मकर राशि:-

राशि चिह्न मगरमच्छ अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 22 दिसम्बर – 20 जनवरी (2019, यूटीसी) नक्षत्र मकर तारामंडल राशि तत्त्व पृथ्वी राशि गुण कार्डिनल स्वामी शनि डेट्रिमेण्ट चंद्र देव एग्ज़ाल्टेशन मंगल फ़ॉल बृहस्पति खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना मकर राशि बारह राशियों के समूह में १०वीं है। इसका स्वामी शनि है।

लम्‍बे और पतले मकर लग्‍न अथवा राशि के जातकों को एक बारगी देखने पर यकीन नहीं होता कि ये लोग बड़े समूह या संगठन का सफल संचालन कर रहे हैं। बचपन में इन्‍हें देखें तो लगता है पता नहीं कब बड़े होंगे और कब अपने पैरों पर खड़े होंगे। पर, किशोरावस्‍था में अचानक तेजी से बढ़ते हैं और इतना विकास करते हैं कि अचानक युवा दिखाई देने लगते हैं। यह अवस्‍था भी इतने अधिक लम्‍बे समय तक रहती है कि साथ के युवक अधेड़ दिखने लगते हैं और इन पर जैसे अवस्‍था का असर ही दिखाई नहीं देता। यह त्‍याग और बलिदान की राशि है। कृष्‍णामूर्ति बताते हैं कि जो व्‍यक्ति पिछले जन्‍म में अपना बलिदान देता है वह इस जन्‍म में मकर राशि में पैदा होता है। ये जातक मितव्‍ययी, नीतिज्ञ, विवेक बुद्धियुक्‍त, विचारशील, व्‍यावहारिक बुद्धि वाले होते हैं। इनमें विशिष्‍ट संगठन क्षमता होती है। असाधारण सहनशीलता, धैर्य और स्थिर प्रवृत्ति इन्‍हें बड़ा संगठन खड़ा करने में मदद करती है। इन लोगों को उपहास से हमेशा भय लगा रहता है। इस कारण समूह में बोल नहीं पाते। ऐसे में लोग समझते हैं कि ये लोग अंतर्मुखी हैं। इस राशि का स्‍वामी शनि है। शनि अच्‍छा होने पर ये लोग ईमानदार, सजग और विश्‍वसनीय होते हैं और शनि खराब होने पर ठीक उल्‍टा होता है। इन्‍हें एक साथी हमेशा साथ में चाहिए। तब इनका कार्य अधिक उत्‍तम होता है। इन जातकों में अहंकार, निराशावाद, अत्‍यधिक परिश्रम की कमियां होती हैं। इन्‍हें चिंतन पक्षाघात (एनालिसिस पैरालिसिस) की समस्‍या होती है। जातकों को सजग रहकर इन समस्‍याओं से बचने की कोशिश करनी चाहिए। ये लोग अपने परिजनों से प्रेम करते हैं लेकिन उसका प्रदर्शन नहीं करते। इसलिए परिवार के लोग, यहां तक कि इनकी संतान भी ही समझती है कि उनके पिता उन पर ध्‍यान नहीं देते। एक बात है जो इनके व्‍यवहार के विपरीत होती है वह यह कि जहां समूह में एक भी बाहर का व्‍यक्ति हो तो ये लोग चुप्‍पी मार जाते हैं, लेकिन यदि परिवार के लोग या सभी निकट के परिचित लोग हो तों परिहास की हल्‍की फुल्‍की ऐसी बातें करते हैं कि सभा में उपस्थित सभी लोगों का हंसते हंसते बुरा हाल हो जाता है। इनके लिए शुभ दिन शुक्रवार, मंगलवार और शनिवार होता है। शुभ रंग लाल, नीला और सफेद है। __________________________________

  1. कुम्भ राशि:-

Aquarius.svg राशि चिह्न कुम्भ अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 20 जनवरी – 19 फ़रवरी (2019, यूटीसी) नक्षत्र कुम्भ तारामंडल राशि तत्त्व वायुजल राशि गुण कार्डिनल स्वामी अरुण डेट्रिमेण्ट सूर्य देव एग्ज़ाल्टेशन कोई ग्र नहीं फ़ॉल कोई ग्रह नहीं खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना कुंभराशि के लोग मूल रूप से मजबूत और आकर्षक व्यक्तित्व के अधिकारी होते हैं। कुंभ राशि के लोग दो प्रकार के होते हैं :- एक शर्मीली, संवेदनशील, कोमल और धैर्य और अन्य विपुल, जीवंत और दिखावटी है, कभी कभी निरर्थक व्यापार का लबादा के तहत उनके चरित्र की काफी गहराई छुपा. दोनों प्रकार के अपने अलग अलग तरीकों में मजबूत इच्छाशक्ति, सशक्त और मजबूत प्रतिबद्धता है, वे आम तौर पर काफी ईमानदार होते हैं। वे विस्तार दृष्टि के है जो एक पूरी तर्क में विभिन्न कारकों लाता है और जो पक्ष लेने के लिए के रूप में बिना दुविधा किसी तर्क के दोनों पक्षों को देख सकते हैं। नतीजतन वे निष्पक्ष और सहनशील हैं। एक कुंभ राशि हमेशा एक मेषराशि वाले का सहजता से समर्थन करते है और बदले में अरियन भी कुंभ राशि की रचनात्मकता और अभिनव विचारों की प्रशंसा.

भचक्र ही यह ग्‍यारहवीं राशि है। इस पर शनि का आधिपत्‍य है। वायु तत्‍वीय, विषम और स्थिर राशि है। इस राशि में कोई भी ग्रह उच्‍च या नीच का नहीं होता। इस लग्‍न के जातक आमतौर लंबे, दुबले, क्रियाशील, नकारात्‍मक सोच वाले, काम में लगे रहने वाले और मजबूत शरीर वाले होते हैं। ये दिमागी रूप से इतने सजग होते हैं कि इन्‍हें प्रशंसा अथवा अन्‍य चापलूसी वाले तरीकों से खुश किया या बरगलाया नहीं जा सकता।

इसी प्रवृत्ति के कारण ये लोग नई बातों को समझने और आत्‍मसात करने के मामले में कुछ कमजोर होते हैं, इसके चलते कुंभ राशि के जातकों पर बहुत जल्‍दी पुरातनपंथी होने का ठप्‍पा लग जाता है। अपनी तय नियमों और सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं, इस कारण सामाजिक स्‍तर पर कई बार बहिष्‍कार की स्थिति तक पहुंच जाते हैं। केएस कृष्‍णामूर्ति तो कहते हैं कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में कुंभ राशि के जातक काम के प्रति झुके हुए होते हैं, यहां काम का अर्थ उन्‍होंने अभिलाषा से लगाया है। ऐसे जातक अगर अकेले में या बिना मित्रों के रहेंगे तो खराब स्थिति में रहेंगे।

भले ही सावधानी से मित्रों का चुनाव करे, लेकिन मित्र जरूर रखें। कुंभ राशि अथवा लग्‍न वाली स्त्रियां अपने साथी को संतोषजनक पाने पर उनका पूरा साथ देती हैं, लेकिन असंतुष्‍ट होने पर अपने पति को छोड़ देने के लिए भी हिचकिचाती नहीं हैं। कुंभ जातकों के लिए गुरु, शुक्र, मंगल और सोमवार श्रेष्‍ठ बताए गए हैं। शुभ रंग पीला, लाल, सफेद और क्रीम है।

कुंभ लक्षण संपादित करें

गुण: प्रगतिशील, मूल, स्वतंत्र, मानवीय

अवगुण: भावनात्मक अभिव्यक्ति से भागना, मनमौजी, अटल, एकांत

कुंभ की पसंद: मित्रों के साथ मस्ती, दूसरों की मदद, किसी कारण के लिए लड़ना, बौद्धिक वार्तालाप, एक अच्छा श्रोता

कुंभ की नापसंद: अंकुश, टूटे वादे, अकेला रहना, सुस्त या उबाऊ स्थिति, लोग जो उनसे असहमत हैं

कुंभ राशि में जन्मे लोग शर्मीले और शांत होते हैं, लेकिन दूसरी ओर वे सनकी और ऊर्जावान हो सकते हैं। हालांकि, दोनों ही मामलों में वे गहन विचारक और अत्यधिक बौद्धिक लोग हैं जिन्हें दूसरों की मदद करना पसंद है। दोनों पक्षों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना देख पाने में सक्षम रहने के कारण वे आसानी से समस्याओं का समाधान करने वाले होते हैं।

भले ही वे आसानी से अपने चारों ओर से घिरी ऊर्जा के अनुकूल हो सकते हैं, उर्जा बहाल करने के क्रम में, कुंभ राशि में जन्मे लोगों को कुछ समय के लिए अकेले और सब कुछ से दूर रहने की गहन जरूरत होती है। कुंभ राशि में जन्मे लोग संभावनाओं से भरी एक जगह के रूप में दुनिया को देखते हैं।

कुंभ एक वायु राशि है, और इस तरह हर अवसर पर अपने मन का उपयोग करता है। अगर कोई मानसिक उत्तेजना नहीं होती है, तो वे उब जाते हैं और सबसे अच्छा परिणाम प्राप्त करने के लिए एक प्रेरणा की कमी रहती है।

कुंभ का स्वामी ग्रह यूरेनस का एक डरपोक, अचानक और कभी-कभी आक्रामक स्वभाव है, लेकिन यह कुंभ को दूरदर्शी गुणवत्ता भी देता है। वे भविष्य देख पाने में सक्षम और जानते हैं कि अब से पांच या दस वर्ष मंं क्या करना चाहेंगे।

यूरेनस ने उन्हें जल्दी और आसानी से परिवर्तन की शक्ति भी दी है, तो उन्हें विचारकों, प्रगतिशीलों और मानवतावादियों के रूप में जाना जाता है। उन्हें एक समूह या एक समुदाय अच्छा लगता है, तो वे लगातार दूसरे लोगों से घिरे रहने का प्रयास करते हैं।

कुंभ में जन्मे जातकों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह एहसास है कि वे सीमित या विवश हैं। सभी के लिए स्वतंत्रता और समानता की इच्छा के कारण वे हमेशा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गतिविधि सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। कुंभ राशि में जन्मे लोगों की ठंडे और असंवेदनशील व्यक्तियों रूप में एक प्रतिष्ठा है, लेकिन यह समय से पहले अंतरंगता के खिलाफ सिर्फ उनका सुरक्षा तंत्र है। उन्हें एक स्वस्थ तरीके से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और दूसरों पर भरोसे के लिए सीखने की जरूरत है।

कुंभ प्यार और सेक्स संपादित करें

बौद्धिक उत्तेजना कुंभ राशि के लिए अब तक की सबसे बड़ी कामोद्दीपक होती है। एक व्यक्ति के साथ एक दिलचस्प वार्तालाप की तुलना में कुंभ को आकर्षित करने योग्य कुछ भी नहीं है। खुलापन, संवाद, कल्पना और जोखिम की इच्छा इस राशि के जीवन के परिप्रेक्ष्य में अच्छी तरह से समाने वाले गुण हैं। इस गतिशील व्यक्ति के साथ एक लंबी अवधि के रिश्ते चाहने वाले लोगों में निष्ठा और ईमानदारी सबसे जरूरी है। प्यार में वे वफादार और प्रतिबद्ध हैं हक जताने वाले नहीं - वे अपने साथियों को स्वतंत्रता देंगे और उन्हें बराबर मानते हैं।

कुंभ मित्र एवं परिवार संपादित करें

भले ही कुंभ राशि में जन्मे लोग मिलनसार हैं, उन्हें लोगों का करीबी होने के लिए समय की जरूरत है। वे बेहद संवेदनशील लोग हैं इसे ध्यान में रखते हुए उन से निकटता का मतलब भेद्यता है।

उनके मजबूत विचारों के साथ मिश्रित त्वरित व्यवहार, उन्हें मिलने के लिए एक चुनौती बना देता है। यदि जरूरी हुआ तो कुंभ अपने प्रिय के आत्म बलिदान जैसा कुछ भी करेंगे।

उनके मित्रों को यह तीन गुण रखने चाहिए: रचनात्मकता, बुद्धि और अखंडता। जब परिवार की बात आती है, उनकी उम्मीदें भी कुछ कम नहीं होती। भले ही उनमें रिश्तेदारों के लिए कर्तव्य की भावना है, मित्रों में भी वे घनिष्ठ संबंध बनाए नहीं रखेंगे अगर उनकी उम्मीदों को पूरा नहीं करते हैं।

कुंभ करियर और पैसा संपादित करें

कुंभ राशि में जन्मे जातक नौकरी में उत्साह भर देते हैं और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए अपनी कल्पना का दोहन करने की एक अनूठी क्षमता है। अवधारणा के विकास और प्रदर्शन में सक्षम बनाने वाला करियर इस राशि के लिए अनुरूप होगा। अपनी प्रतिभा को साझा करने की उनकी इच्छा के साथ मिश्रित उनकी तीक्ष्ण बुद्धि उस माहौल में काम करने वालों को प्रेरित करती है। कुंभ एक दूरदर्शी किस्म है जो मानवता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की जाने वाली गतिविधियों में संलग्न होना पसंद करती है।

जब पैसे बात आती है, इस राशि में राशि को खर्च करने और पैसे की बचत के बीच एक संतुलन बनाए रखने की प्रतिभा है। कुंभ राशि में जन्मे अधिकांश लोग फैशन के लिए उनके अहसास को दिखाने से नहीं डरते और अच्छी तरह से अनुकूलित होते हैं। कुंभ राशि के जातकों को साहसपूर्वक चमकीले रंग का सूट पहनते देखना असामान्य नहीं है।

अभिनय, लेखन, शिक्षण, फोटोग्राफी या विमान संचालक के रूप में करियर इस राशि के लिए उपयुक्त हैं। उनके लिए सबसे अच्छा वातावरण वह है जो उन्हें सख्त दिशा निर्देशों के बिना समस्या का समाधान करने की स्वतंत्रता देता है। कुंभ एक अपरंपरागत प्रकार है और अगर उन्हें अपनी प्रतिभा व्यक्त करने का अवसर दिया जाए तो उल्लेखनीय सफलता हासिल कर सकते हैं।

कुंभ के लिए विचार योग्य संगत राशि: मेष, मिथुन, तुला, धनु

भाग्यशाली दिन शनिवार भाग्यशाली रंग ब्लू, नीले, ब्लैक भाग्यशाली पत्थर दूधिया पत्थर और नीलम भाग्यशाली पक्षी उल्लू सकारात्मक गुण सत्य के साधक, ईमानदार, जांच, तेज़ दिमाग और रचनात्मक . नकारात्मक गुण संकोच, सनकी और अक्षम. हस्तिया सुभाष चंद्र बोस, अब्राहम लिंकन, चार्ल्स डार्विन, थॉमस एडीसन और खुशवंत सिंह: __________________________________

  1. मीन राशि:-

राशि चिह्न मछली अवधि (ट्रॉपिकल, पश्चिमी) 19 फ़रवरी – 20 मार्च (2019, यूटीसी) नक्षत्र मीन तारामंडल राशि तत्त्व जल राशि गुण कार्डिनल स्वामी वरुण डेट्रिमेण्ट बुध देवता एग्ज़ाल्टेशन शुक्र फ़ॉल बुध खगोलशास्त्र प्रवेशद्वार खगोलशास्त्र परियोजना यह गुरु की दूसरी और भचक्र की अंतिम राशि है। इस राशि के जातकों में करुणा की भावना होती है, स्‍वयं बढ़कर भले ही सहायता न करे, लेकिन पुकारे जाने पर पूरी तरह सहायता के लिए तत्‍पर हो उठते हैं। ये दार्शनिक होते हैं, रोमांटिक जीवन जीते हैं, साहस के साथ स्‍पष्‍ट बोलने वाले और विचारशील होते हैं। अपनी सज्‍जनता के कारण जिंदगी में सफलताओं के कई मौके गंवा बैठते हैं।

द्विस्‍वभाव राशि का असर जातकों के विचारों पर भी पड़ता है, एक समय इनके एक प्रकार के विचार होते हैं तो परिस्थितियां बदलने पर विचार भी बदल जाते हैं। मीन जातकों को प्राय: गैस संबंधी शिकायत होती है। मदिरा के सेवन के शौक को मीन राशि वाले जातकों को नियंत्रण में रखना चाहिए। ये लोग आमतौर पर भण्‍डारी, शिक्षक, मुनीम अथवा बैंक में कर्मचारी होते हैं।

एकाग्रता कम होने के कारण निरन्‍तर नए कार्यों की ओर उन्‍मुख होते रहते हैं। अपनी संतान के आश्रित बनने से बचने क लिए ये जातक युवावस्‍था में ही निवेशों पर ध्‍यान देने लगते हैं। मीन लग्‍न के जातक अपेक्षाकृत तेजी से मित्र बनाते हैं, ऐसे में इनके मित्रों में हर तरह के लोग शामिल होते हैं। इन जातकों को हमेशा ध्‍यान रखना चाहिए कि अपने सभी भेद मित्रों के सामने नहीं खोलें, अन्‍यथा परेशानी में फंस सकते हैं। मीन राशि के लिए गुरु, मंगल और रविवार श्रेष्‍ठ दिन हैं। लाल, पीला, गुलाबी और नारंगी रंग शुभदायी हैं। एक, चार, तीन और नौ अंक शुभ हैं। __________________________________

इन बारह तारा समूह ज्योतिष के हिसाब से महत्वपूर्ण हैं। यदि पृथ्वी, सूरज के केन्द्र और पृथ्वी की परिक्रमा के तल को चारो तरफ ब्रम्हाण्ड में फैलायें, तो यह ब्रम्हाण्ड में एक तरह की पेटी सी बना लेगा। इस पेटी को हम १२ बराबर भागों में बांटें तो हम देखेंगे कि इन १२ भागों में कोई न कोई तारा समूह आता है। हमारी पृथ्वी और ग्रह, सूरज के चारों तरफ घूमते हैं या इसको इस तरह से कहें कि सूरज और सारे ग्रह पृथ्वी के सापेक्ष इन १२ तारा समूहों से गुजरते हैं। यह किसी अन्य तारा समूह के साथ नहीं होता है इसलिये यह १२ महत्वपूर्ण हो गये हैं। इस तारा समूह को हमारे पूर्वजों ने कोई न कोई आकृति दे दी और इन्हे राशियां कहा जाने लगा।

यदि आप किसी आखबार या टीवी पर राशिचक्र को देखें या सुने तो पायेंगें कि वे सब मेष से शुरू होते हैं, यह अप्रैल-मई का समय है। यह विषुव अयन (precession of equinoxes) के कारण है।

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