१/४+ १/१६ + १/६४ + १/२५६ + · · ·

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
(१/४+ १/१६ + १/६४ + १/२५६ + ⋯ से अनुप्रेषित)
Jump to navigation Jump to search
'आर्किमिडिज़' चित्र जहाँ a = 3/4

गणित में अनन्त श्रेणी 1/4 + 1/16 + 1/64 + 1/256 + · · · गणित के इतिहास में संकलनित की गई अनन्त श्रेणियों के प्रथम उदाहरणों में से एक है; यह लगभग ई॰ पू॰ 250-200 के लगभग आर्किमिडिज़ ने उपयोग किया।[1] जैसा कि ज्ञात है यह एक गुणोत्तर श्रेणी है जिसका प्रथम पद 1/4 और सार्वानुपात 1/4 है इसका योग

है।

दृश्य प्रदर्शन[संपादित करें]

3s = 1.

श्रेणी 1/4 + 1/16 + 1/64 + 1/256 + · · · को एक सरल दृश्य में प्रदर्शित किया जा सकता है क्योंकि वर्ग और त्रिभुज दोनों को ही चार समरूप भागों में विभक्त किया जा सकता है जिनमें प्रत्येक का क्षेत्रफल मूल का चौथाई होता है।

बायीं दिसा में स्थित चित्र में,[2][3] यदि बड़े वर्ग का क्षेत्रफल 1 (इकाई) है तो सबसे बड़े काले वर्ग का क्षेत्रफल (1/2)(1/2) = 1/4 होगा। इसी प्रकार द्वितीय सबसे बड़े वर्ग का क्षेत्रफल 1/16 और तृतीय सबसे बड़े का 1/64 होगा। सभी काले वर्गों द्वारा घेरा गया कुल क्षेत्रफल 1/4 + 1/16 + 1/64 + · · · होगा और यह धूसर और श्वेत वर्गों द्वारा घेरे गये क्षेत्रफल के समान है। चूँकि इन तीनों तरह के सभी वर्गों से मिलकर पूरे वर्ग का क्षेत्रफल बनता है जो 1 है, अतः चित्र के अनुसार

आर्किमिडिज़ का चित्रण[4] इससे थोड़ा भिन्न है, जो समीकरण के निकट है

पुनः 3s = 1

See below for details on Archimedes' interpretation.

ठीक यही ज्यामिति त्रिभुज के लिए भी कारगर है, जैसा कि दक्षिणहस्त चित्र में प्रदर्शित है:[2][5][6] यदि सबसे बड़े त्रिभुज का क्षेत्रफल 1 है, तो सबसे बड़े कृष्ण त्रिभुज का क्षेत्रफल 1/4 और इसी प्रकार होगा। सम्पूर्ण चित्र बड़े त्रिभुज और इसके उपरी उप-त्रिभुज से स्व समानता रखते हैं और इस प्रकार उपरोक्त समीकरण प्राप्त होती है।[7]

आर्किमिडिज़[संपादित करें]

यह वक्र एक परवलय है। छेदक रेखा AE पर बिन्दुओं के मध्य दूरी समान है

प्रास्ताविकी 23

सीमा[संपादित करें]

आर्किमिडिज़ प्रास्ताविकी 24 के अनुसार परवलय के अन्दर स्थित क्षेत्रफल का प्रास्ताविकी 23 में परिमित (परन्तु अनिश्चित) संकलन लागू होता है।

चूँकि अनन्त श्रेणी के संकलन का मान इसके आंशिक संकलनों पर सीमा से परिभाषित होता है,

टिप्पणी[संपादित करें]

  1. Shawyer and Watson p. 3.
  2. Nelsen and Alsina p. 74.
  3. Ajose and Nelson.
  4. Heath p.250
  5. Stein p. 46.
  6. Mabry.
  7. Nelson and Alsina p.56

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • Ajose, Sunday and Roger Nelsen (1994). "Proof without Words: Geometric Series". Mathematics Magazine. 67 (3): 230. doi:10.2307/2690617. JSTOR 2690617. Unknown parameter |month= ignored (help)
  • Heath, T. L. (1953) [1897]. The Works of Archimedes. Cambridge UP. Page images at Casselman, Bill. "Archimedes' quadrature of the parabola". Archived from the original on 17 दिसंबर 2006. Retrieved 22 मार्च 2007. Check date values in: |accessdate=, |archive-date= (help) HTML with figures and commentary at Otero, Daniel E. (2002). "Archimedes of Syracuse". Archived from the original on 7 मार्च 2007. Retrieved 22 मार्च 2007. Check date values in: |accessdate=, |archivedate= (help)
  • Mabry, Rick (1999). "Proof without Words: 14 + (14)2 + (14)3 + · · · = 13". Mathematics Magazine. 72 (1): 63. JSTOR 2691318. Unknown parameter |month= ignored (help)
  • Nelsen, Roger B. and Claudi Alsina (2006). Math Made Visual: Creating Images for Understanding Mathematics. MAA. ISBN 0-88385-746-4.
  • Shawyer, Bruce and Bruce Watson (1994). Borel's Methods of Summability: Theory and Applications. Oxford UP. ISBN 0-19-853585-6.
  • Stein, Sherman K. (1999). Archimedes: What Did He Do Besides Cry Eureka?. MAA. ISBN 0-88385-718-9.
  • Swain, Gordon and Thomas Dence (1998). "Archimedes' Quadrature of the Parabola Revisited". Mathematics Magazine. 71 (2): 123–30. doi:10.2307/2691014. JSTOR 2691014. Unknown parameter |month= ignored (help)