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दो की घात

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दो की घात1 से 1024 (20 से 210) तक दो की घात का चाक्षुषीकरण।

गणित में दो की घात का मतलब के रूप में लिखने योग्य संख्या से है जहाँ n एक पूर्णांक है, अर्थात 2 के आधार पर घातांक परिणाम जहाँ घातांक पूर्णांक  n है।

उस प्रसंग में जहाँ केवल पूर्णांक काम में लिए जाते हैं n अपूर्णांक मान नहीं रख सकता।[1] अतः हमें 1, 2 और 2 अपने ही विभिन्न गुणज प्राप्त होंगे।[2] क्योंकि दो द्वयाधारी संख्या पद्धति का आधार है अतः दो की घात संगणक विज्ञान में सामान्य है। द्वयाधारी में लिखने पर दो की घात हमेसा 100…0 या 0.00…01 के रूप में प्राप्त होती हैं जो दशमलव में 10 की घात के तुल्य है।

व्यंजक और अंकन

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मौखिक अभिव्यक्ति, गणितीय अंकन, संगणक प्रोग्रामन व्यंजक घात संकारक सहित अथवा फलन सहित:

2 की घात n
2 की n
2 power n
power(2, n)
pow(2, n)
2n
2 ^ n
2 ** n

कंप्यूटर विज्ञान

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दो की प्रथम 96 घात

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20 = 1 216 = 65,536 232 = 4,294,967,296 248 = 281,474,976,710,656 264 = 18,446,744,073,709,551,616 280 = 1,208,925,819,614,629,174,706,176 296 = 79,228,163,514,264,337,593,543,950,336
21 = 2 217 = 131,072 233 = 8,589,934,592 249 = 562,949,953,421,312 265 = 36,893,488,147,419,103,232 281 = 2,417,851,639,229,258,349,412,352
22 = 4 218 = 262,144 234 = 17,179,869,184 250 = 1,125,899,906,842,624 266 = 73,786,976,294,838,206,464 282 = 4,835,703,278,458,516,698,824,704
23 = 8 219 = 524,288 235 = 34,359,738,368 251 = 2,251,799,813,685,248 267 = 147,573,952,589,676,412,928 283 = 9,671,406,556,917,033,397,649,408
24 = 16 220 = 1,048,576 236 = 68,719,476,736 252 = 4,503,599,627,370,496 268 = 295,147,905,179,352,825,856 284 = 19,342,813,113,834,066,795,298,816
25 = 32 221 = 2,097,152 237 = 137,438,953,472 253 = 9,007,199,254,740,992 269 = 590,295,810,358,705,651,712 285 = 38,685,626,227,668,133,590,597,632
26 = 64 222 = 4,194,304 238 = 274,877,906,944 254 = 18,014,398,509,481,984 270 = 1,180,591,620,717,411,303,424 286 = 77,371,252,455,336,267,181,195,264
27 = 128 223 = 8,388,608 239 = 549,755,813,888 255 = 36,028,797,018,963,968 271 = 2,361,183,241,434,822,606,848 287 = 154,742,504,910,672,534,362,390,528
28 = 256 224 = 16,777,216 240 = 1,099,511,627,776 256 = 72,057,594,037,927,936 272 = 4,722,366,482,869,645,213,696 288 = 309,485,009,821,345,068,724,781,056
29 = 512 225 = 33,554,432 241 = 2,199,023,255,552 257 = 144,115,188,075,855,872 273 = 9,444,732,965,739,290,427,392 289 = 618,970,019,642,690,137,449,562,112
210 = 1,024 226 = 67,108,864 242 = 4,398,046,511,104 258 = 288,230,376,151,711,744 274 = 18,889,465,931,478,580,854,784 290 = 1,237,940,039,285,380,274,899,124,224
211 = 2,048 227 = 134,217,728 243 = 8,796,093,022,208 259 = 576,460,752,303,423,488 275 = 37,778,931,862,957,161,709,568 291 = 2,475,880,078,570,760,549,798,248,448
212 = 4,096 228 = 268,435,456 244 = 17,592,186,044,416 260 = 1,152,921,504,606,846,976 276 = 75,557,863,725,914,323,419,136 292 = 4,951,760,157,141,521,099,596,496,896
213 = 8,192 229 = 536,870,912 245 = 35,184,372,088,832 261 = 2,305,843,009,213,693,952 277 = 151,115,727,451,828,646,838,272 293 = 9,903,520,314,283,042,199,192,993,792
214 = 16,384 230 = 1,073,741,824 246 = 70,368,744,177,664 262 = 4,611,686,018,427,387,904 278 = 302,231,454,903,657,293,676,544 294 = 19,807,040,628,566,084,398,385,987,584
215 = 32,768 231 = 2,147,483,648 247 = 140,737,488,355,328 263 = 9,223,372,036,854,775,808 279 = 604,462,909,807,314,587,353,088 295 = 39,614,081,257,132,168,796,771,975,168

यहाँ यह देखा जा सकता है कि प्रथम व्यंजक का अन्तिम अंक  2 से आरम्भ होता है और उसके पश्चात आवर्त रूप से 4 और उसके बाद चक्रीय क्रम में 2–4–8–6–,

1024 की घात

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210 की कुछ घात जो 1000 से थोड़ी अधिक हैं:

210 = 1 024 ≈ 10001 (2.3% विचलन)
220 = 1 048 576 ≈ 10002 (4.6% विचलन)
230 = 1 073 741 824 ≈ 10003 (6.9% विचलन)
240 = 1 099 511 627 776 ≈ 10004 (9.1% विचलन)
250 = 1 125 899 906 842 624 ≈ 10005 (11.2% विचलन)
260 = 1 152 921 504 606 846 976 ≈ 10006 (13.3% विचलन)
270 = 1 180 591 620 717 411 303 424 ≈ 10007 (15.3% विचलन)

ये भी देखें IEEE 1541-2002.

दो की कुछ चयनित घात

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अन्य गुणधर्म

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ये भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. Lipschutz, Seymour (1982). Schaum's Outline of Theory and Problems of Essential Computer Mathematics. New York: McGraw-Hill. पृ॰ 3. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-07-037990-4.
  2. Sewell, Michael J. (1997). Mathematics Masterclasses. Oxford: Oxford University Press. पृ॰ 78. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-19-851494-8.