"करवा चौथ" के अवतरणों में अंतर

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→‎व्रत की विधि: श्रीमद्भगवद्गीता के ६.१६ में जो लिखा है उसकी अतिशयोक्ति का दुरुपयोग किया गया है।
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[[File:Karva2.jpg|thumb|305x305px|चौथ पूजा के उपरांत महिलाएं समूह मे सूर्य को जल का अर्क देती हुई]]
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी अर्थात उस चतुर्थी की रात्रि को जिसमें चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रातः स्नान करके अपने सुहाग (पति) की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें। जानिए कैसे हुई इसकी शुरुआत। कैसे करें पूजन और व्रत की पूरी विधि <ref>{{cite web|url = http://www.amarujala.com/photo-gallery/chandigarh/karva-chauth-karva-chauth-2017-auspicious-time-of-karwa-chauth-puja|title = Karva Chauth.|date = |accessdate = 08 October 2017|website = |publisher = ''[[अमर उजाला]]''|last = |first = |archive-url = https://web.archive.org/web/20171008081254/http://www.amarujala.com/photo-gallery/chandigarh/karva-chauth-karva-chauth-2017-auspicious-time-of-karwa-chauth-puja|archive-date = 8 अक्तूबर 2017|url-status = live}}</ref>.
 
करवा चौथ का व्रत करना वर्थ है, क्योंकि [[श्रीमद्भगवद्गीता|भगवद गीता]] अध्याय 6 के श्लोक 16 में व्रत करने की मनहि है। करवा चौथ का व्रत करने से न तो पति की आयु लम्बी होती और न ही कोई सुख प्राप्त होता है, क्योंकि यह शास्त्र अनुकूल साधना नहीं है।
 
 
 

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