देव प्रबोधिनी एकादशी
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| देव प्रबोधिनी एकादशी | |
|---|---|
| प्रकार | Hindu |
हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। आषाढ शुक्ल एकादशी को देव-शयन हो जाने के बाद से प्रारम्भ हुए चातुर्मास का समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन देवोत्थान-उत्सव होने पर होता है। इस दिन वैष्णव ही नहीं, स्मार्त श्रद्धालु भी बडी आस्था के साथ व्रत करते हैं।
उद्देश्य
[संपादित करें]भगवान विष्णु को चार मास की योग-निद्रा से जगाने के लिए घण्टा, शंख, मृदंग आदि वाद्यों की मांगलिक ध्वनि के बीचये श्लोक पढकर जगाते हैं-
उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द त्यजनिद्रांजगत्पते। त्वयिसुप्तेजगन्नाथ जगत् सुप्तमिदंभवेत्॥
उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमंगलम्कुरु॥
विधि
[संपादित करें]| This section is written like a manual or guidebook. (अप्रैल 2016) |
संस्कृत बोलने में असमर्थ सामान्य लोग-उठो देवा, बैठो देवा कहकर श्रीनारायण को उठाएं।
श्रीहरिको जगाने के पश्चात् उनकी षोडशोपचारविधि से पूजा करें। अनेक प्रकार के फलों के साथ नैवेद्य (भोग) निवेदित करें। संभव हो तो उपवास रखें अन्यथा केवल एक समय फलाहार ग्रहण करें। इस एकादशी में रातभर जागकर हरि नाम-संकीर्तन करने से भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं।[तथ्य या राय?]विवाहादिसमस्त मांगलिक कार्योके शुभारम्भ में संकल्प भगवान विष्णु को साक्षी मानकर किया जाता है। अतएव चातुर्मासमें प्रभावी प्रतिबंध देवोत्थान एकादशी के दिन समाप्त हो जाने से विवाहादिशुभ कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं।[तथ्य या राय?]
महिमा
[संपादित करें]पद्मपुराणके उत्तरखण्डमें वर्णित एकादशी-माहात्म्य के अनुसार श्री हरि-प्रबोधिनी (देवोत्थान) एकादशी का व्रत करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ तथा सौ राजसूय यज्ञों का फल मिलता है। इस परमपुण्यप्रदाएकादशी के विधिवत व्रत से सब पाप भस्म हो जाते हैं तथा व्रती मरणोपरान्त बैकुण्ठ जाता है। इस एकादशी के दिन भक्त श्रद्धा के साथ जो कुछ भी जप-तप, स्नान-दान, होम करते हैं, वह सब अक्षय फलदायक हो जाता है। देवोत्थान एकादशी के दिन व्रतोत्सवकरना प्रत्येक सनातनधर्मी का आध्यात्मिक कर्तव्य है।
उद्देश्य
[संपादित करें]इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
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