गुरू-पूर्णिमा

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गुरू पूर्णिमा
Shukracharya and Kacha.jpg
एक शिष्य को आशीर्वाद देते गुरू
आधिकारिक नाम गुरू पूर्णिमा (ग्रीष्मकाल के पूर्ण चाँद के दिन गुरू पूजा)
अनुयायी जैन, हिन्दू भक्त & भारत के बौद्ध भिक्षु
उद्देश्य आध्यात्मिक गुरू के लिए कृतज्ञता व्यक्त करना[1]
उत्सव गुरू पूजा और मंदिर में जाना[2]
अनुष्ठान गुरू पूजा
तिथि आषाढ़ पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष, पूर्ण चाँद का चमकिल चन्द्र पक्ष) (जून–जुलाई)
2020 date 5 जुलाई (रवि)[3]
2021 date 24 जुलाई (शनि)[4]
आवृत्ति वार्षिक

गुरू पूर्णिमा Writer-Vaibhav उन सभी आध्यात्मिक और अकादमिक गुरूजनों को समर्पित परम्परा है जिन्होंने कर्म योग आधारित व्यक्तित्व विकास और प्रबुद्ध करने, बहुत कम अथवा बिना किसी मौद्रिक खर्चे के अपनी बुद्धिमता को साझा करने के लिए तैयार हों। इसको भारत, नेपाल और भूटान में हिन्दू, जैन और बोद्ध धर्म के अनुयायी उत्सव के रूप में मनाते हैं। यह पर्व हिन्दू, बोद्ध और जैन अपने आध्यात्मिक शिक्षकों / अधिनायकों के सम्मान और उन्हें अपनी कृतज्ञता दिखाने के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के हिन्दू माह आषाढ़ की पूर्णिमा (जून-जुलाई) मनाया जाता है।[5][6] इस उत्सव को महात्मा गांधी ने अपने आध्यात्मिक गुरू श्रीमद राजचन्द्र सम्मान देने के लिए पुनर्जीवित किया।[7] ऐसा भी माना जाता है कि व्यास पूर्णिमा वेदव्यास के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।[8]

पर्व[संपादित करें]

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।[9]

यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे। उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्तिकाल के संत घीसादास का भी जन्म इसी दिन हुआ था वे कबीरदास के शिष्य थे।[10]

शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है।[11] अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को 'गुरु' कहा जाता है।

  • "अज्ञान तिमिरांधश्च ज्ञानांजन शलाकया,चक्षुन्मीलितम तस्मै श्री गुरुवै नमः "

गुरु तथा देवता में समानता के लिए एक श्लोक में कहा गया है कि जैसी भक्ति की आवश्यकता देवता के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी। [क] बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है। गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है। [ख]

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।[12]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Guru Purnima India: Date, Story, Quotes, Importance, Special Messages". SA News. अभिगमन तिथि 23 जुलाई 2021.
  2. "Guru Purnima 2020: Know Why We Celebrate Guru Purnima". NDTV.com. अभिगमन तिथि 2020-07-03.
  3. https://www.timeanddate.com/holidays/india/guru-purnima
  4. https://www.timeanddate.com/holidays/india/guru-purnima
  5. "गुरू पूर्णिमा - Guru Purnima".
  6. poornima.html "Guru Poornima (Vyas Puja)" जाँचें |url= मान (मदद) [गुरू पूर्णिमा (व्यास पूजा)] (अंग्रेज़ी में). Sanatan.org. अभिगमन तिथि 3 जुलाई 2020.
  7. थॉमस वेबर (2 दिसम्बर 2004). Gandhi as Disciple and Mentor [गुरू और शिष्य के रूप में गांधी]. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस. पपृ॰ 34–36. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-139-45657-9.
  8. "Guru Purnima 2019: Date, Time and Significance of Vyasa Purnima" [गुरू पूर्णिमा २०१९: व्यास पूर्णिमा का दिन, समय और महत्त्व]. न्यूज़ 18 (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2020-08-03.
  9. "गुरू पूर्णिमा पर विशेष". अमर उजाला. मूल (एएसपी) से 27 सितंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2007.
  10. "भक्तिकाल के सन्त घीसादास". सृजनगाथा. मूल (एचटीएम) से 16 मई 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2007.
  11. "गुरू की महिमा". वेब दुनिया. मूल (एचटीएम) से 8 नवंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2007.
  12. "गुरू पूर्णिमा पर विशेष". अमर उजाला. मूल (एएसपी) से 27 सितंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2007.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]