नीमच

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नीमच
Neemuch
नवतोरण मंदिर, खोर
नवतोरण मंदिर, खोर
नीमच is located in मध्य प्रदेश
नीमच
नीमच
मध्य प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 24°28′N 74°52′E / 24.47°N 74.87°E / 24.47; 74.87निर्देशांक: 24°28′N 74°52′E / 24.47°N 74.87°E / 24.47; 74.87
देश भारत
प्रान्तमध्य प्रदेश
ज़िलानीमच ज़िला
क्षेत्रफल
 • कुल40 किमी2 (20 वर्गमील)
ऊँचाई452 मी (1,483 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल1,28,095
भाषाएँ
 • प्रचलितहिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड458441
दूरभाष कोड07423
वाहन पंजीकरणMP-44
वेबसाइटwww.neemuch.nic.in

नीमच (Neemuch) भारत के मध्य प्रदेश राज्य के नीमच ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय है।[1][2]

विवरण[संपादित करें]

नीमच को 31 मई 1998 में मध्य प्रदेश का स्वतंत्र जिला घोषित किया गया था। प्रारंभ में यह मंदसौर जिले का हिस्सा था। ब्रिटिश शासन के दौरान यहां एक छावनी स्थापित की गई थी। आजादी के बाद छावनी को भारत की पैरा मिल्रिटी सेना की छावनी में परिवर्तित कर दिया गया। वर्तमान में यह सीआरपीएफ अर्थात क्रेन्दीय रिजर्व पुलिस बल के नाम से जाना जाता है। नीमच को सीआरपीएफ की जन्मस्थली माना जाता है। 3879 वर्ग किलोमीटर में फैला यह जिला सुखानंद महादेव, ऑक्‍टरलोनी इमारत, नीलकंठ महादेव, आंत्री माता मंदिर, जीरन का किला और भादवा माता मंदिर आदि के लिए विख्यात है। मंदसौर के समान यहां भी बड़े पैमाने पर अफीम का उत्पादन होता है। नीमच के दर्शनीय स्थलों में भादवा माता का मंदिर है, जिसमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघटा, काली, स्कन्दमाता और कात्यायनी माता की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। इस मंदिर में काले पत्थर से निर्मित विष्णु की प्रतिमा भी है। नीमच जिला में मालवा क्षेत्र की सबसे बड़ी प्रतिमा महाराणा प्रताप जी की प्रतिमा मौजूद हैं जिसका अनावरण श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना द्वारा 19 नवंबर 2019 को किया गया ।यहाँ की मंडी भी देश की बड़ी मंडियों में शामिल है.[3]

प्रमुख आकर्षण[संपादित करें]

भादवामाता मंदिर[संपादित करें]

भादवा माता मंदिर नीमच जिले का एक प्रसिद्द धार्मिक स्थल है जो नीमच जिले से लगभग 19 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। इस मंदिर में लकवा रोग से ग्रसित रोगी माँ भादवा के दर्शन के लिए आते हैं। हर साल नवरात्री पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। यहाँ सप्ताहांत और धार्मिक छुट्टियों में कई लोग दर्शन के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है की इस मंदिर के समीप स्थित बावड़ी के जल से स्नान करने और बावड़ी का जल पिने से लगवा रोग से ग्रस्त रोगीयों को रोग से मुक्ति मिलती है।

ऑक्‍टरलोनी इमारत[संपादित करें]

इस प्राचीन इमारत को सर डेविड ऑक्‍टरलोनी ने १८१८ ई. में बनवाया था। वर्तमान में यह शानदार इमारत सीआरपीएफ अधिकारियों की मेस अर्थात् भोजनालय है। अजमेर-खंडवा लाइन पर स्थित इस इमारत को देखने के लिए सड़क और रेलमार्ग से पहुंचा जा सकता है। नीमच से १२० किलोमीटर दूर उदयपुर यहां का नजदीकी विमानतल है।

नव तोरण मंदिर[संपादित करें]

नवतोरण मंदिर, खोर

भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर नीमच के खोर में स्थित है। 11वीं शताब्दी के इस मंदिर में भगवान विष्णु की आकर्षक और विशाल प्रतिमा स्थापित है। भगवान विष्णु की प्रतिमा यहां वराह रूप में देखी जा सकती है। यह मंदिर चित्तौडगढ़ से ३५ किलोमीटर की दूरी पर है।

अठाना[संपादित करें]

जिले का यह खूबसूरत नगर राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। नीमच यहां से २५ किलोमीटर दूर है। अठाना नंदन प्रिंट के लिए मशहुर हैँ। इस प्रिंट की खासियत है कि इसमें परंपरागत चटकीले रंगों का प्रयोग किया जाता है। सुखानंद महादेव यहां का नजदीकी दर्शनीय स्थल हैं। यहाँ कृष्णमहल हैँ। तथा जावद तहसील से 2 किलोमीटर दूर राजस्थान की सीमा से लगा हुआ तारापुर तथा उमेदपुरा गांव भी हैंड प्रिंट के लिए बहुत मशहूर है यहां पर विदो से विदेशों से फॉरेनर्स अपना सर्वे करने पहुंचते हैं और यहां की डिजाइन को विदेशों में मशहूर करते हैं। तारापुर से 100 से 200 मीटर की दूरी पर सोपुरापीर बाबा साहेब की दरगाह भी अधिक मशहूर है।

नयागांव[संपादित करें]

नयागांव नीमच जिले से १५ किलोमीटर उत्तर पश्चिम में है और इसकी सीमा राजस्थान से मिलती है। पवित्र चित्रकूट पहाड़ी पर बसा नयागांव, सीमेंट प्लांट के लिए लोकप्रिय है। राष्ट्रीय राजमार्ग ७९ यहीं से होकर गुजरता है। यहाँ से १० किमी दूर अठाना नगर हैँ।

रतनगढ[संपादित करें]

गांधीसागर अभयाराण्य में चंबल नदी

नीमच से ५२ किलोमीटर दूर स्थित रतनगढ नगर है। यह अरावलि पर्वत कि गोद मे बसा हुआ है। तिलस्मा महादेव मंदिर, गांधीसागर बाँध, राणा प्रताप सागर बाँध, किशोर सागर, कोटा का जग मंदिर, भीमताल टैंक और चित्तौडगढ़ किला रतनगढ के नजदीक लोकप्रिय दर्शनीय स्थलहैं। रतनगढ से १२० किलोमीटर दूर उदयपुर यहां का नजदीकी विमानतल है। रतनगढ के नजदीक मोडिया महादेव का पुराना मंदिर हे जो भव्य पहाडी के बीच बसा हुआ हे और नीमच रेलवे स्टेशन यहां का करीबी रेलवे स्थानक है।

जीरन का किला (दुर्ग)[संपादित करें]

नीमच से २१ किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक तथा सुन्दर नगर जीरन है। जीरन, नीमच जिले का एक तहसील केन्द्र है। जीरन के किला का एक विशेष महत्व है। इस किले ने इतिहास के कई उतार-चढाव देखे हैं। जीरन नगर मे एक सुन्दर सा तालाब है। किले मे भगवान शन्कर की प्राचीन मुर्ती है, जिसे किलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता हे। यहा पर फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। भगवान शिव का अभिषेक तथा इस दिन शिवभक्त, शिवलिंग पर बेल-पत्र आदि चढ़ाते, पूजन करते, उपवास करते तथा रात्रि को जागरण करते हैं।

डीकेन[संपादित करें]

नीमच से ४० किलोमीटर दूर स्थित डीकेन एक छोटा-सा नगर है। भादवा माता मंदिर, जोगनिया माता मंदिर, डीकेन के नजदीकी और लोकप्रिय दर्शनीय स्थल हैं। डीकेन के पास गुदिया महादेव का प्राचिन स्थान हे डीकेन के पास करेन महादेव मे मेघवाल समाज कि सति माता का स्थान हैं। डीकैन के पास स्थित भगवानपुरा गांव में बहुत बड़ा सोलर पावर प्लांट बना हुआ हैं। पास ही रतनगढ़ की खूबसूरत पहाड़ी पर से गुजरता हुआ कोटा रोड़ की घुमावदार सड़क एक नयनाभिराम दृश्य उत्पन्न करती है , बड़ी संख्या में लोग इसे अपने कैमरे में कैद करने के लिए पहुचते है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर विमानतल नीमच का निकटतम विमानतल है, जो यहां से २७२ किलोमीटर दूर है। इंदौर विमानतल देश के अनेक बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग

नीमच रेलवे स्थानक चित्तौडगढ़-रतलाम रेल मार्ग का एक महत्वपूर्ण रेलवे स्थानक है। यह रेलवे स्थानक नीमच को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है।

सड़क मार्ग

राष्ट्रीय राजमार्ग ५६ और राष्ट्रीय राजमार्ग १५६ नीमच को अन्य पड़ोसी शहरों से जोड़ते है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि कई शहरों से यहां के लिए नियमित बसों की व्यवस्था है।

देश के मुख्य शहरों से दूरी

चित्तौड़गढ - ६० कि॰मी॰; उदयपुर - १३५ कि॰मी॰; रतलाम - १३८ कि॰मी॰; कोटा - १८१ कि॰मी॰; उज्जैन - २४९ कि॰मी॰; अजमेर - २६२ कि॰मी॰; इंदौर - २७२ कि॰मी॰; जयपुर - ३७५ कि॰मी॰; भोपाल - ४६२ कि॰मी॰; ग्वालियर - ५४० कि॰मी॰; दिल्ली - ६०८ कि॰मी॰; मुंबई - ८७२ कि॰मी॰

रेलवे समय सारणी[संपादित करें]

रतलाम की ओर

गाडी सं गाडी नाम से तक दिन आना जाना
२२९०२ उदयपुर बान्द्रा सु॰फ़ा॰ उदयपुर बान्द्रा १,४,६ ००:३० ००:३३
२२९९६ अजमेर बान्द्रा सु॰फ़ा॰ अजमेर बान्द्रा ३,५,७ ०१:१५ ०१:१७
१२९९६ उदयपुर बान्द्रा सु॰फ़ा॰ उदयपुर बान्द्रा ३,५,७ ०१:१५ ०१:१७
१२७१९ नागार्जुन सु॰फ़ा॰ एक्सप्रेस अजमेर हैदराबाद ३,५ २१:५६ २१:५८
१९६०६ अजमेर कोलकाता एक्सप्रेस अजमेर कोलकाता २०:५२ २०:५४
१९६५४ रतलाम एक्सप्रेस अजमेर रतलाम रोजाना १८:१५ १८:२०
१९३२८ चित्तौड़गढ रतलाम एक्सप्रेस चित्तौड़गढ रतलाम रोजाना ०५:०२ ०५:१२
७९३०२ चित्तौड़गढ रतलाम डीएमयू चित्तौड़गढ रतलाम रोजाना ०६:४० ०६:४५
१९६५६ जयपुर भोपाल एक्सप्रेस जयपुर भोपाल रोजाना ०१:५५ ०२:००
७९३०४ नीमच रतलाम डीएमयू नीमच रतलाम १,२,३,५,६ - १४:२५
७९३०३ रतलाम नीमच डीएमयू रतलाम नीमच १,२,३,५,६ १३:२५ -
५९८१२ हल्दीघाटी पैसेंजर आगरा किला रतलाम रोजाना १२:१० १२:२०
१९६५८ उदयपुर इन्दौर एक्सप्रेस उदयपुर इन्दौर २,४,६ २३:५५ २३:५९

चित्तौड़गढ की ओर

गाडी सं गाडी नाम से तक दिन आना जाना
१९६५३ अजमेर एक्सप्रेस रतलाम अजमेर रोजाना ०८:५५ ०९:००
१२९९५ बान्द्रा उदयपुर सु॰फ़ा॰ बान्द्रा उदयपुर १,४,६ ०५:०७ ०५:०९
२९०१९ नीमच कोटा लिंक एक्सप्रेस नीमच मेरठ शहर रोजाना - १३:४०
२९०२० कोटा नीमच लिंक एक्सप्रेस मेरठ शहर नीमच रोजाना १३:१५ -
१९६५५ भोपाल जयपुर एक्सप्रेस भोपाल जयपुर रोजाना ०१:१० ०१:२०
५९८३४ नीमच कोटा पैसेंजर नीमच कोटा रोजाना - २२:३०
५९८३३ कोटा नीमच पैसेंजर कोटा नीमच रोजाना ०६:०१ -
५९३०७ इन्दौर जयपुर लिंक एक्सप्रेस इन्दौर जयपुर रोजाना ०१:१० ०१:२०
५९८३५ नीमच उदयपुर पैसेंजर नीमच उदयपुर रोजाना - ०७:१५
५९८३६ उदयपुर नीमच पैसेंजर उदयपुर नीमच रोजाना १९:५० -
१९६५७ उदयपुर शहर एक्सप्रेस इन्दौर उदयपुर ३,५,७ १५:०५ १५:१०
७९३०१ रतलाम चित्तौड़गढ डीएमयू रतलाम चित्तौड़गढ रोजाना २१:२५ २१:२७
५९८११ हल्दीघाटी पैसेंजर रतलाम आगरा किला रोजाना १२:०५ १२:१०
१९३२७ रतलाम चित्तौड़गढ एक्सप्रेस रतलाम चित्तौड़गढ रोजाना २०:०५ २०:१५
१२७२० हैदराबाद अजमेर सु॰फ़ा॰ हैदराबाद अजमेर २,४ २२:१५ २२:१७
१९६०५ कोलकाता अजमेर एक्सप्रेस कोलकाता अजमेर ०३:४७ ०३:४९

उल्लेखनीय लोग[संपादित करें]

  • उमाशंकर मूलजीभाई त्रिवेदी नीमच के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व थे। वह पहली और तीसरी लोकसभा में सांसद रहे। वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक वरिष्ठ वकील भी थे। उनका निवास स्थान नीमच कैंट में बंगला नंबर 11 था। और पुस्तक बाजार में उनका कार्यालय रहा।
  • वी. एस. वाकणकर एक भारतीय पुरातत्ववेत्ता थे। जिन्होंने 1957 में भीमबेटका चट्टान गुफाओं की खोज की थी।[4] जनवरी 1975 में इंदिरा गांधी सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
  • सुंदरलाल पटवा, 20 जनवरी 1980 - 17 फरवरी 1980 और 5 मार्च 1990 - 15 दिसंबर 1992 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उन्हें भारत सरकार द्वारा 2017 में मरणोपरांत दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। [5][6]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh Archived 2019-07-03 at the Wayback Machine," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172
  2. "Tourism in the Economy of Madhya Pradesh," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293
  3. "Neemuch Mandi bhav". neemuchmandibhav.in.
  4. Centre, UNESCO World Heritage. "Rock Shelters of Bhimbetka". UNESCO World Heritage Centre (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2023-07-19.
  5. "List of Padma awardees 2017". The Hindu (अंग्रेज़ी में). 2017-01-25. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 0971-751X. अभिगमन तिथि 2023-07-19.
  6. "Sunderlal Patwa, 'Doctor Dadi' among Padma awardees from Madhya Pradesh". The Times of India. 2017-01-27. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 0971-8257. अभिगमन तिथि 2023-07-19.
  7. "CP Gurnani - Managing Director and Chief Executive Officer - Tech Mahindra". web.archive.org. 2016-04-22. मूल से पुरालेखित 22 अप्रैल 2016. अभिगमन तिथि 2023-07-19.सीएस1 रखरखाव: BOT: original-url status unknown (link)
  8. Society India January 2019.
  9. "TEDxJSSATE | TED". www.ted.com. अभिगमन तिथि 2023-07-19.
  10. "Shorya Mahanot art exhibition". The Art Guide (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2023-07-19.