विष्णु श्रीधर वाकणकर

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डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर

डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर (4 मई 1919 – 3 अप्रैल 1988) भारत के एक प्रमुख पुरातत्वविद् थे। उन्होंने भोपाल के निकट भीमबेटका के प्राचीन शिलाचित्रों का अन्वेषण किया। अनुमान है कि यह चित्र १,७५,००० वर्ष पुरानें हैं। इन चित्रों का परीक्षण कार्बन-डेटिंग पद्धति से किया गया, इसीके परिणामस्वरूप इन चित्रों के काल-खंड का ज्ञान होता है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि उस समय रायसेन ज़िले में स्थित भीम बैठका गुफाओं में मनुष्य रहता था और वो चित्र बनाता था। वे संस्कार भारती से संबद्ध थे, संस्कार भारती के संस्थापक महामंत्री थे।

डॉ॰ वाकणकर जी ने अपना समस्त जीवन भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में अर्पित किया। उन्होंने अपने अथक शोध द्वारा भारत की समृद्ध प्राचीन संस्कृति व सभ्यता से सारे विश्व को अवगत कराया। इन्होंने सरस्वती नदी का भारतवर्ष में बहती थी इसकी अपने अन्वेषण में पुष्टि करने के साथ साथ इस अदृश्य हो गई नदी के बहने का मार्ग भी बताया। इनके शोध के परिणाम सम्पूर्ण विश्व को आश्चर्यचकित कर देने बाले हैं। आर्य-द्रविड़ आक्रमण सिद्धांत को झुठलाने बाली सच्चाई से सबको अबगत कराने का महत्वपूर्ण कार्य सम्पादित किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में आने पर उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक और शैक्षिक उत्थान कार्य किया, लगभग 50 वर्षों तक जंगलों में पैदल घूमकर विभिन्न प्रकार के हजारों चित्रित शैल आश्रयों का पता लगाकर उनकी कापी बनाई तथा देश विदेश में इस विषय पर विस्तार से लिखा, व्याख्यान दिए और प्रदर्शनी लगाई। प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में डॉ॰ वाकणकर ने अपने बहुविध योगदान से अनेक नये पथ का सूत्रपात किया। संस्कार भारती ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इस महान कलाविद, पुरातत्ववेत्ता, शोधकर्ता, इतिहासकार, महान चित्रकार का जन्म- शताब्दी वर्ष 4 मई 2019 से 3 मई 2020 तक मनाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। यह इस विश्व विख्यात कला-साधक को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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