मंगल पांडे (क्रांतिकारी)
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| शहीद मंगल पांडे | |
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| "पहले भारतीय क्रांतिकारी" — मंगल पांडे | |
| जन्म | नागवा, जिला बलिया, उत्तर प्रदेश, भारत |
| मृत्यु | ८ अप्रेल, १८५७ बैरकपुर, कोलकाता, भारत |
मंगल पांडे, सन १८५७ के भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम के प्रथम नायक थे।
मंगल पांडे, कोलकाता के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में ३४वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के एक सिपाही थे। २९ मार्च सन १८५७ को उन्होने अंग्रेज अफसरों पर आक्रमण कर दिया। उन्होने अपने अन्य साथियों से उनका साथ देने का आह्वान किया। किन्तु उन्होने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें पकड लिया गया। उन पर मुकदमा (कोर्ट मार्शल) चलाकर ६ अप्रैल को फैसला सुना दिया कि १८ अप्रैल को फांसी दे दी जाये। किन्तु इस निर्णय की प्रतिक्रिया विकराल रूप न ले सके, इस रणनीति के तहत उन्होने मंगल पांडे को दस दिन पूर्व ही ८ अप्रैल सन १८५७ को फांसी दे दी।
मंगल पांडे द्वारा लगायी गयी चिनगारी बुझी नहीं। एक महीने बाद ही १० मई सन १८५७ को मेरठ की छावनी में विप्लव (बगावत) हो गया । यह विपलव देखते ही देखते पूरे उत्तरी भारत में छा गया और अंग्रेजों को स्पष्ट संदेश मिल गया कि अब भारत पर राज्य करना आसान नहीं है।
[संपादित करें] वाह्य सूत्र
गदर के पुरोधा (अमर उजाला)


