बघेल

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""बघेल """क्षत्रिय कुुल एक """कुुल""""हे । यह गढ़रिया राजायो ने बनाया था । जिसमे नेना गढ के राजा नरपाल ने मुख्य भुमिका निभाई ।।इस कुल मे उस समय के 52 गढ़ के सम्सत राजा शामिल हुये। जेसे नेना गढ़ के राजा नरपाल ,माडो गढ़ के राजा जम्भे ओर कडिया बघेले राय, पथरी गढ़ के जलन्पाल (जल सिंह) ग्वालियर के भीम पाल कछवाये ,कालिंजर के महीपाल (माहिल) परिहार,परहुल गंगापाल परमार,,नरवर गढ़ के मोतीमल बघेेेले राय ,कोट कसोंधी के महाराज गजराजा विसेने राय,ढाका के महाराज जवाहर लाल पाल ,कनौज के महाराज अजय पाल ,बांधो गढ़ के वीर सिंह जाधव राय,पिथोरागढ के चहामान ,गढ़ महोबा के परिमाल चंदेले राय ।

गढ़रिया =10वी शताब्दी मे गढ़ शब्द का प्रचलन था ।किला ,दुर्ग,परकोटा,की तरह ही 10वी शताब्दी मे किलो को गढ़ कहा जाता था ।इस लिये जो गढ़ (किला)मे रहते थे उन्हे गढ़रिया कहा जाता था।
10 वी शताब्दी मे पशुपालन ही मुुुख्य् जीवन का आधार था ।

सन्दर्भ आल्हा काव्य[संपादित करें]

आक्रमण = पहले तो यह राजा आपस मे लड़ते झगड़ते रहे ।कभी सीमा के विवाद के लिये ।कभी शादी विवाह के लिये ।कभी कर (टेक्स ) के लिये । यहा तक गढ (किला) पे कब्जे के लिये भी युुुध्द् हुये ।सिरसागढ़ का युुुध इसका प्रमाण है।

आल्हा काव्य=%=। आल्हा ओर उदल निडर पराक्रमी वीर ।।

।।तीन वेेर गढ़ देहली लूटी मारेे मान पिथोरा राय।।