गड़रिया

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गडरिया समाज, प्राचीन एवं प्रतिष्ठित समाज में से एक है। यह समुदाय पाल, बघेल , चंदेल , धनगर , होल्कर , और वीर गड़रिया के नाम से भी जाना जाता है।

गडरिया का शाब्दिक अर्थ गाडरवाला या भेड़वाला लेकिन ये दोनों शब्द क्रमशः पारसी और अरबी भाषाओं से भारत में आयें है । भारतीय भाषाओं की जननी संस्कृत और पाली परिवार की किसी भी भाषा या बोली के होते तो मेषपाल या मेढ़पाल और बकरीपाल होते तो अजपाल या कुरीपाल (कुरूमा) होना चाहिए था । ये सभी चंद्रवंशी क्षत्रिय है। पालों ने बंगाल में पाल वंश की स्थापना की गडरिया एक जाति है जो अन्य पिछड़े वर्ग में आती है। इनका व्यवसाय भेड़-बकरी पालना| गडरिया जाति के लोग पशुपालक के अलावा अच्छे योद्धा भी होते हैं और अगर देखा जाये तो आर्यों भी भेड़-बकरी और गाय पालते थे यह जाति भारत में प्रायः सभी राज्यों में निवास करती है। उत्तर प्रदेश में गड़रिया की दो उपजातियां धनगर व नीखर निवास करते है। उत्तर प्रदेश में धनगर जाति जिसे गड़रिया की उपजाति भी माना गया है, केवल धनगर उपजाति को ही धनगर अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित किया गया है। अधिकतर लोग हिंदू धर्म को मानते है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाडरी, गारी(भेड़-मेवाती बोली में), भारूड़, भारवाड़(भरड़=भेड़ गुजराती में),घोसी-ग्वाल, भारत में हर जातियों की साड़ेसात सह/उपजातियां होती हैं । छत्तीसगढ़ के समस्त जिलो मे निवास करती गड़रिया जाति की मुख्यतः 4 प्रमुख उपजाति निवास करती है -(1)- ढेंगर (2)-देशहा, (3)-झेरिया, (4)-कोसरिया।

इसके अलावा झाडे, वराडे, और नीखर उपजाति भी कुछ भागोंं में निवास करती हैं।


झेरिया गड़रिया जाति के गोत्र - लहुरिया,नायक, बर,हिरन,तुमा,कोकिया,सारस,चंदैनी,कस्तुमारिया,भांवर,लखेर |

गड़रिया जाति के होल्कर (इन्दौर नरेश, मध्य प्रदेश , भारत) इनके राजवंश

  • मल्हार राव होलकर प्रथम (शासन: २ नवम्बर १७३१ से १९ मई १७६६)
  • मालेराव होलकर (शासन: २३ अगस्त १७६६ से ५ अप्रैल १७६७)
  • अहिल्याबाई होलकर (शासन: २७ मार्च १७६७ से १३ अगस्त १७९५)
  • तुकोजीराव होलकर (शासन: १३ अगस्त १७९५ से २९ जनवरी १७९७)
  • काशीराव होलकर (शासन: २९ जनवरी १७९७ से १७९८)
  • यशवंतराव होलकर प्रथम (शासन: १७९८ से २७ अक्टूबर १८११)
  • मल्हार राव होलकर तृतीय (शासन: २७ अक्टूबर १८११ से २७ अक्टूबर १८३३)
  • मार्तण्डराव होलकर (शासन: १७ जनवरी १८३४ से २ फ़रवरी १८३४)
  • हरिराव होलकर (शासन: १७ अप्रैल १८३४ से २४ अक्टूबर १८३४)
  • खांडेराव होलकर तृतीय (शासन: १३ नवम्बर १८४३ से १७ फ़रवरी १८४४)
  • तुकोजीराव होलकर द्वितीय (शासन: २७ जून १८४४ से १७ जून १८८६)
  • शिवाजीराव होलकर (शासन: १७ जून १८८६ से ३१ जनवरी १९०३)
  • तुकोजीराव होलकर तृतीय (शासन: ३१ जनवरी १९०३ से २६ फ़रवरी १९२६)
  • यशवंतराव होलकर द्वितीय (शासन: २६ फ़रवरी १९२६ से १९४८)

(2) पाल (क्षत्रिय) वंश के प्रमुख राजा -महाराजा

  • गोपाल (पाल) (७५०-७७०)
  • धर्मपाल (७७०-८१०)
  • देवपाल (८१०-८५०)
  • शूर पाल महेन्द्रपाल (८५० - ८५४)
  • विग्रह पाल (८५४ - ८५५)
  • नारायण पाल (८५५ - ९०८)
  • राज्यो पाल (९०८ - ९४०)
  • गोपाल २ (९४०-९६०)
  • विग्रह पाल २ (९६० - ९८८)
  • महिपाल (९८८ - १०३८)
  • नय पाल (१०३८ - १०५५)
  • विग्रह पाल ३ (१०५५ - १०७०)
  • महिपाल २ (१०७० - १०७५)
  • शूर पाल २ (१०७५ - १०७७)
  • रामपाल (१०७७ - ११३०)
  • कुमारपाल (११३० - ११४०)
  • गोपाल ३ (११४० - ११४४)
  • मदनपाल (११४४ - ११६२)
  • गोविन्द पाल (११६२ - ११७४)

महाराज गोपाल ने ओदंतपुरी (बिहार शरीफ) मे बोद्ध विहार की स्थापना की थी ।

(3)स्वतन्त्रता सेनानी संगोली रायन्ना (कर्नाटक के स्वतन्त्रता सेनानी एवं वीर योद्धा थे। (4) संत कनकदास -कर्नाटक के महान संत कवि

(5)बछेन्द्री पाल - प्रथम  महिला पर्वतारोही जिन्होंने एवरेस्ट फतह की |

(6) स्वतंत्रता सेनानी विपिनचंद्र पाल का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में विशेष योगदान है