धनगर

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धनगर जाति धनगर एक जाति है जो गड़रिया समाज में आती है जैसे पाल,बघेल,धनगर,कुरुबा, गाडरी,गायरी,भरवाड़,देसाई,आदि अलग अलग राज्यो में अलग अलग नाम से गड़रिया समाज की जातिया निवास करती है धनगर जाति भारत में धन का तात्पर्य पशुओं से है लेकिन धनगर का शाब्दिक अर्थ धेनुगर होता है जो धेनु संस्कृत से और गर पाली भाषा से लगा है। प्राचीनकाल से गड़रिया समाज भेड़ बकरी एवं उनकी ऊन से कम्बल बनाकर बेचने का कार्य करते थे। वर्तमान में जंगलो में भेड़ ,बकरी चराने के लिए कम जंगल होने के कारण धनगर जाति के लोग इस व्यवसाय को छोड़ते जा रहे है परंतु प्राचीन काल से ही गड़रिया समाज को भेड़ बकरियों चरवाहा के रुप में जाना जाता रहा है। सत्ररहवीं सदी के इंदौर नरेश श्री मल्हार राव होल्कर की जाति जो तत्कालीन अंग्रेज सरकार के गजेटियर में धनगर अंकित है। ✓ सन् १८९१की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में धनगर जाति की जनसंख्या लगभग ८.५० लाख है।

✓ १९०५ के आगरा गजेटियर में धनगर जाति का वाकायदा उल्लेख किया गया है।
✓ १९३१ की जनगणना में धनगर जाति उल्लिखित है।
✓  भारत सरकार के विभिन्न शासनादेश यथा १९५०, १९५५, १९७४ में धनगर जाति वर्णित है।
 ✓ हाइकोर्ट के आदेश २००६ में धनगर को गडरिया की एक उपजाति के रुप में परिभाषित किया गया है।
 ✓ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार ने धनगर जाति संबंधित अपने द्वारा सर्वे के आधार पर 2012 में दिये गए निर्णय में धनगर उपजाति/जाति के व्यक्तियों को धनगर अनुसूचित जाती प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को आदेशित किया गया।
✓ भातीय अनुसूचित जाति आयोग के द्वारा समय समय पर जारी आदेशो में स्पष्ठ किया गया है कि उत्तर प्रदेश में गड़रिया की उपजाति धनगर व नीखर दो उपजातियां 

निवासरत है,जिसमे धनगर उपजाति को अनुसूचित जाति के रूप में क्रम संख्या 27 पर अधिसूचित किया गया है ,तथा यह भी स्पष्ठ किया कि "dhangar is a sub-caste of gadariya & as per govt. order dhangar is a scheduled cast in utter pradesh "

✓ २०१४ में जनपद बुलंदशहर,2015 में जनपद अमरोहा व 2017 में मुरादाबाद मण्डल में हुई स्थलीय जांच पड़ताल  में भी धनगर अनुसूचित जाति के व्यक्तियों का निवासरत होना उल्लेखित है, मुरादाबाद मण्डल,मेरठ मण्डल,कानपुर मण्डल व अन्य मण्डलों में 1960-70 के दशक से लेकर 2015 तक के धनगर जाति संबंधित साक्ष्य उपलब्ध है ,जिसमे धनगर जाति के पुराने जाति प्रमाण पत्र, स्कूल स्थान्तरण प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकले, जमीन बैनामे इत्यादि । 
✓ शासनादेशों में कई बार धनगर की हिन्दी बर्तनी में धनगर के स्थान पर धांगड़/धांगर इत्यादि क्लेरिकल मिस्टेक हो जाने के कारण धनगर(DHANGAR) अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को संबैधानिक व्यवस्था का लाभ ठीक प्रकार से नही मिल पाया है है । 
✓ माननीय हाइकोर्ट व भारतीय अनुसूचित जाति आयोग  के आदेशानुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने समय समय पर कड़ाई के साथ धनगर जाति के व्यक्तियों को धनगर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आदेशित किया गया है। यह भी सर्वविदित है कि धनगर जाति के लोगो का मुख्य व्यवसाय भेड़ ,बकरी पालना एवं उनके बालो से कम्बल बनाकर बेचना रहा है। 
✓ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार जातियां भी अनेक शाखाओं/उपजातियों में विभक्त है और इनमें भी उच्चता तथा निम्नता का एक क्रम होता है व रीति रिवाज भी भिन्न होते है व खान-पान का सम्बन्ध भी नही होता है । 
✓ संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार पिछड़ी जाति की अनेक उपजातियो को भाषा, भेषभूषा, रहन सहन ,खान पीन,रीति रिवाजों व ऊंच, नीच के आधार पर अनुसूचित जातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है । 
✓ उदाहरण के तौर उत्तर प्रदेश में गड़रिया की मुख्यतया दो उपजातियां पाई जाती है:

1-धनगर(DHANGAR)

2-नीखर(नीखर का अर्थ pure गड़रिया है)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 में वर्णित व्यवस्था के अनुसार उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियों की सूची में धनगर उपजाति को अनुसूचित जाति के रूप में क्रमांक संख्या 27 पर अधिसूचित किया गया है। प्रायः यह भी देखने मे आया है कि धनगर जाति के अधिकांश लोग पाल,बघेल शब्दो का प्रयोग करते है।