दमोह ज़िला

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दमोह भारतीय राज्य मध्य प्रदेश का एक जिला है।जिले का मुख्यालय दमोह है।इसका क्षेत्रफल 7306 वर्ग कि.मी.[कृपया उद्धरण जोड़ें] एंव जनसंख्या (२००१ जनगणना के अनुसार१०,८१,९०९) है।दमोह ८०% साक्षर है।

इतिहास[संपादित करें]

दमोह का महत्व 14वीं शताब्दी से रहा है जब खिलजी ने क्षेत्रीय प्रशासनिक केंद्र को चंदेरी के बटियागढ़ से दमोवा (दमोह) स्थानातंरित किया। दमोह मराठा गर्वनर की सीट थी। ब्रिटिश काल के बाद यह मध्य प्रांत का भाग हो गया। तथा 1867 में इसे म्यूसिपालिटी बना दिया गया था। यहां आयल मिल, हैण्डलूम तथा धातु के बर्तन, बीडी-सिगरेट, सीमेंट तथा सोने-चांदी के जेवर आदि बनाए जाते हैं। दमोह के आसपास बड़ी संख्या में पान के बाग भी है। यहां से इसका निर्यात भी होता है। यहां पर नागपंचमी पर वार्षिक मेला आयोजित होता है तथा जनवरी में जटाशंकर मेले का भी आयोजन होता है। यहां पर पशु बाजार लगता है तथा कई छोटे उद्योग भी है। साथ ही हथकरघा और मिट्टी के बर्तन भी बनाए जाते हैं। दमोह जिला 2816 वर्ग कि॰मी॰ क्षेत्र में उत्तर से दक्षिण तक फैला है। साथ ही चारों ओर पहाड़ियों (भाऩरेर ऋणी) तथा जंगल से घिरा हुआ है। जिले की अधिकांश भूमि उपजाऊ है। जिले में मु्ख्यतः दो नदियां सुनार और बैरमा बहती हैं। जिले में मुख्यतः नदियों से ही सिंचाई की जाती हैं।

विकास[संपादित करें]

  • 1861: मध्य प्रांत का गठन हुआ।
  • 1861: दमोह पूर्ण जिला बना।
  • 1867:दमोह जिले की जनसंख्या 2,62,600
  • 1867: जबलपुर और इलाहाबाद के बीच रेलवे लाइन पूरी हुई।
  • 1896-1897: दमोह जिले में सूखा और अकाल पड़ा।
  • 1898: 1899 दमोह-कटनी को रेल मार्ग से जोड़ा गया।
  • 1900: जिले में आंशिक अकाल पड़ा।
  • 1923: सेठ गोविंद को चार हिन्दी नाटक लिखने पर जेल जाना पड़ा।
  • 1933: महात्मा गांधी ने दमोह की यात्रा की।
  • 1946: 18 जुलाई को सागर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
  • 1947: देश आजाद हुआ। मध्य प्रांत की जगह मध्य प्रदेश का गठन हुआ।
  • 1960-1991: दमोह जिले की जनसंख्या 8,98,125 हो गई।
  • 2001: दमोह जिले की जनसंख्या 10,81,909 हो गई।
  • 2017 रेल स्वच्छता सर्वे में भारत में 9वा नम्बर लगा है और मध्यप्रदेश में 1st पर है।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

दमोह से ३० किलोमीटर दूर हटा नगर मैं प्राचीन चंडी मंदिर है यहाँ पर अद्यासक्ति माँ दुर्गा चंडी रूप मैं विराजमान है और यहाँ भक्तो की आस्था का केंद्र है इसका इतिहास ज्ञात नहीं है कि कब और किसके द्वारा निर्माण कराया गया पर इसकी स्थापना आर्यो द्वारा देवी उपासना की आगे बढ़ने क लिए की गयी थी जवेरा के नोहटा मैं पुरातन मंदिर खजराहो जिले मैं मिलते है इनका निर्माण चंदेल राजाओं के द्वारा हुआ अभी कुछ समय से यहाँ पर भी नोहटा महोत्सव मनाया जाने लगा है जिससे पर्यटन को बढावा दिया जाये। दमोह मैं बूंदा बहु मंदिर है जो काफी पुराना है इसके अलावा बतियागढ़ का किला, हटा का किला, दमोह का किला, नोहटा का मंदिर है। कुण्डलपुर और निसई जी सूखा का मंदिर जैन बंधुओं हेतु प्रसिद्ध है। यहाँ पर कई सारे मन्दिर है, जो की पुराने और पूज्यनीय है।यहा दमोह से 17 किलो मीटर् कि दुरी पर बदक्पुर में शिव जी का प्राचीन मंदिर है

तहसिले[संपादित करें]

  • दमोह
  • पथरिया
  • हटा
  • पटेरा
  • जवेरा
  • बटियागड़

शिक्षा[संपादित करें]

दमोह जिला शिक्षा के क्षेत्र में पहले कम साक्षर रहा है। परंतु वर्तमान समय में शिक्षा का प्रसार बढ़ रहा है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

इन्हें भी देखो[संपादित करें]