चंद्रयान-२

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चंद्रयान-२
मिशन प्रकार चन्द्रमा ऑर्बिटर, लैंडर तथा रोवर
संचालक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
मिशन अवधि ऑर्बिटर: 1 वर्ष
लैंडर : 14-15 दिन[1]
रोवर: 14-15 दिन[1]
अंतरिक्ष यान के गुण
निर्माता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
लॉन्च वजन संयुक्त: 3,250 किग्रा (7,170 पाउन्ड)[2]
पेलोड वजन ऑर्बिटर: 1,400 किग्रा (3,100 पाउन्ड)
रोवर: 20 किग्रा (44 पाउन्ड)[3]
मिशन का आरंभ
प्रक्षेपण तिथि 2018 (2018)
रॉकेट भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान[4]
प्रक्षेपण स्थल सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
ठेकेदार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
चन्द्रमा कक्षीयान
Orbit parameters
Periselene 100 किमी (62 मील)[2]
Aposelene 100 किमी (62 मील)[2]
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भारतीय चन्द्रयान अभियान
← चन्द्रयान-1

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रयान -1 के बाद दूसरा चंद्र अन्वेषण अभियान है। जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने विकसित किया है। अभियान को जीएसएलवी प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपण करने की योजना है।[4]इस अभियान में भारत में निर्मित एक लूनर ऑर्बिटर (चन्द्र यान) तथा एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल होंगे। इस सब का विकास इसरो द्वारा किया जायेगा। भारत चंद्रयान-2 को 2018 में प्रक्षेपण करने की योजना बना रहा है।[5]

इसरो के अनुसार यह अभियान विभिन्न नयी प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल तथा परीक्षण के साथ-साथ 'नए' प्रयोगों को भी करेगा।[6][7] [8] पहिएदार रोवर चन्द्रमा की सतह पर चलेगा तथा ऑन-साइट विश्लेषण के लिए मिट्टी या चट्टान के नमूनों को एकत्र करेगा। आंकड़ों को चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के माध्यम से पृथ्वी पर भेजा जायेगा।[9] मायलास्वामी अन्नादुराई के नेतृत्व में चंद्रयान-1 अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली टीम चंद्रयान-2 पर भी काम कर रही है।

इतिहास[संपादित करें]

12 नवम्बर 2007 को इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी (रोसकोसमोस) के प्रतिनिधियों ने चंद्रयान-2 परियोजना पर साथ काम करने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। [10]ऑर्बिटर तथा रोवर की मुख्य जिम्मेदारी इसरो की होगी तथा रोसकोसमोस लैंडर के लिए जिम्मेदार होगा.

भारत सरकार ने 18 सितंबर 2008 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस अभियान को स्वीकृति दी थी।[11] अंतरिक्ष यान के डिजाइन को अगस्त 2009 में पूर्ण कर लिया गया जिसमे दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने अपना संयुक्त योगदान दिया.[12][13]

हालांकि इसरो ने चंद्रयान -2 कार्यक्रम के अनुसार पेलोड को अंतिम रूप दिया।[14]परंतु अभियान को जनवरी 2013 में स्थगित कर दिया गया।[15] तथा अभियान को 2016 के लिये पुनर्निर्धारित किया। क्योंकि रूस लैंडर को समय पर विकसित करने में असमर्थ था। [16][17] रोसकोसमोस को बाद में मंगल ग्रह के लिए भेज़े फोबोस-ग्रन्ट अभियान मे मिली विफलता के कारण चंद्रयान -2 कार्यक्रम से अलग कर दिया गया।[16]तथा भारत ने चंद्र मिशन को स्वतंत्र रूप से विकसित करने का फैसला किया।[15]

डिजाइन[संपादित करें]

अंतरिक्ष यान

इस अभियान को श्रीहरिकोटा द्वीप के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान द्वारा भेजे जाने की योजना है; उड़ान के समय इसका वजन लगभग 3,250 किलो होगा।[2][4][18]दिसंबर 2015 को, इस अभियान के लिये 603 करोड़ रुपये की लागत आवंटित की गई।[19]

ऑर्बिटर

ऑर्बिटर 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर चन्द्रमा की परिक्रमा करेगा.[20] इस अभियान में ऑर्बिटर को पांच पेलोड के साथ भेजे जाने का निर्णय लिया गया है। तीन पेलोड नए हैं, जबकि दो अन्य चंद्रयान-1 ऑर्बिटर पर भेजे जाने वाले पेलोड के उन्नत संस्करण हैं। उड़ान के समय इसका वजन लगभग 1400 किलो होगा। ऑर्बिटर उच्च रिज़ॉल्यूशन कैमरा (Orbiter High Resolution Camera) लैंडर के ऑर्बिटर से अलग होने पूर्व लैंडिंग साइट के उच्च रिज़ॉल्यूशन तस्वीर देगा।[20][1]ऑर्बिटर और उसके जीएसएलवी प्रक्षेपण यान के बीच इंटरफेस को अंतिम रूप दे दिया है।[21]

लैंडर

चन्द्रमा की सतह से टकराने वाले चंद्रयान-1 के मून इम्पैक्ट प्रोब के विपरीत, लैंडर धीरे-धीरे नीचे उतरेगा। [18]लैंडर किसी भी वैज्ञानिक गतिविधियों प्रदर्शन नहीं करेंगे। लैंडर तथा रोवर का वजन लगभग 1250 किलो होगा। प्रारंभ में, लैंडर रूस द्वारा भारत के साथ सहयोग से विकसित किए जाने की उम्मीद थी। जब रूस ने 2015 से पहले लैंडर के विकास में अपनी असमर्थता जताई। तो भारतीय अधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से लैंडर को विकसित करने का निर्णय लिया। रूस लैंडर को रद्द करने का मतलब था। कि मिशन प्रोफ़ाइल परिवर्तित हो जाएगी। स्वदेशी लैंडर की प्रारंभिक कॉन्फ़िगरेशन का अध्ययन 2013 में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र(SAC),अहमदाबाद द्वारा पूरा कि गयी। [15]

चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के लिए अनुसंधान दल ने लैंडिंग विधि की पहचान की। और इससे जुड़े प्रौद्योगिकियों का अध्ययन किया। इन प्रौद्योगिकियों में उच्च संकल्प कैमरा, नेविगेशन कैमरा, खतरा परिहार कैमरा, एक मुख्य तरल इंजन (800 न्यूटन) और अल्टीमीटर, वेग मीटर, एक्सीलेरोमीटर और इन घटकों को चलाने के लिए सॉफ्टवेयर आदि है।[1][20]लैंडर के मुख्य इंजन को सफलतापूर्वक 513 सेकंड की अवधि के लिए परीक्षण किया जा चुका है। सेंसर और सॉफ्टवेयर के बंद लूप सत्यापन परीक्षण 2016 के मध्य में परीक्षण करने की योजना बनाई है। [21]

सबसिस्टम मात्रा (सं.) वजन(किलोग्राम) पावर(वाट)
जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली[22] 1 20 100
स्टार ट्राकर[22] 2 6 15
अल्टीमीटर[22] 2 1.5 8
वेलोसिटी मीटर[22] 2 1.5 8
इमेजिंग सेंसर[22] 2 2 5


रोवर

रोवर का वजन 20-30 किलो के बीच होगा और सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होगा. रोवर चन्द्रमा की सतह पर पहियों के सहारे चलेगा, मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करेगा, उनका रासायनिक विश्लेषण करेगा और डाटा को ऊपर ऑर्बिटर के पास भेज देगा जहां से इसे पृथ्वी के स्टेशन पर भेज दिया जायेगा.[14][18]

प्रारंभिक योजना में रोवर को रूस में डिजाइन और भारत में निर्मित किया जाना था। हालांकि, रूस ने मई 2010 को रोवर को डिजाइन करने से मना कर दिया। इसके बाद, इसरो ने रोवर के डिजाइन और निर्माण खुद करने का फैसला किया। आईआईटी कानपुर ने गतिशीलता प्रदान करने के लिए रोवर के तीन उप प्रणालियों विकसित की:

  1. त्रिविम कैमरा आधारित 3डी दृष्टि - जमीन टीम को रोवर नियंत्रित के लिए रोवर के आसपास के इलाके की एक 3डी दृश्य को प्रदान करेगा।
  2. काइनेटिक कर्षण नियंत्रण - इसके द्वारा रोवर को चन्द्रमा की सतह पर चलने में सहायक होगा और अपने छह पहियों पर स्वतंत्र से काम करने की क्षमता प्रदान होगी।
  3. नियंत्रण और मोटर गतिशीलता - रोवर के छह पहियों होंगे,प्रत्येक स्वतंत्र बिजली की मोटर के द्वारा संचालित होंगे। इसके चार पहिए स्वतंत्र स्टीयरिंग में सक्षम होंगे। कुल 10 बिजली की मोटरों कर्षण और स्टीयरिंग के लिए इस्तेमाल कि जाएगी।

पेलोड[संपादित करें]

इसरो ने घोषणा की है कि एक विशेषज्ञ समिति के निर्णय के अनुसार ऑर्बिटर पर पांच तथा रोवर पर दो पेलोड भेजे जायेंगे.[23] हालांकि शुरुआत में बताया गया था कि नासा तथा ईएसए भी इस अभियान में भाग लेंगे और ऑर्बिटर के लिए कुछ वैज्ञानिक उपकरणों को प्रदान करेंगे,[24] इसरो ने बाद में स्पष्ट किया कि वजन प्रतिबंधों के चलते वह इस अभियान पर किसी भी गैर-भारतीय पेलोड को साथ नहीं ले जायेगी.

ऑर्बिटर पेलोड
  • चन्द्र सतह पर मौजूद प्रमुख तत्वों की मैपिंग (मानचित्रण) के लिए इसरो उपग्रह केन्द्र (ISAC), बंगलौर से लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास) और फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL), अहमदाबाद से सोलर एक्स-रे मॉनिटर (XSM).[14]
  • स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से एल और एस बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर); चन्द्र सतह पर वॉटर आइस (बर्फीले पानी) सहित अन्य तत्वों की खोज के लिए. एसएआर से चन्द्रमा के छायादार क्षेत्रों के नीचे वॉटर आइस की उपस्थिति की पुष्टि करने वाले और अधिक साक्ष्य प्रदान किये जाने की उम्मीद है।
  • स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से इमेजिंग आईआर स्पेक्ट्रोमीटर (IIRS); खनिज, पानी, तथा हाइड्रॉक्सिल की मौजूदगी संबंधी अध्ययन हेतु चन्द्रमा की सतह के काफी विस्तृत हिस्से का मानचित्रण करने के लिए.
  • अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (SPL), तिरुअनंतपुरम से न्यूट्रल मास स्पेक्ट्रोमीटर (ChACE2); चन्द्रमा के बहिर्मंडल के विस्तृत अध्ययन के लिए.
  • स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से टेरेन मैपिंग कैमरा-2 (टीएमसी-2); चन्द्रमा के खनिज-विज्ञान तथा भूविज्ञान के अध्ययन के लिए आवश्यक त्रिआयामी मानचित्र को तैयार करने के लिए.
लैंडर पेलोड
  • सेइसमोमीटर - लैंडिंग साइट के पास भूकंप के अध्ययन के लिए [2]
  • थर्मल प्रोब - चंद्रमा की सतह के तापीय गुणों का आकलन करने के लिए[2]
  • लॉंगमोर प्रोब - घनत्व और चंद्रमा की सतह प्लाज्मा मापने के लिए[2]
  • रेडियो प्रच्छादन प्रयोग - कुल इलेक्ट्रॉन सामग्री को मापने के लिए[2]
रोवर पेलोड
  • लेबोरेट्री फॉर इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम्स (LEOS), बंगलौर से लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS).
  • PRL, अहमदाबाद से अल्फा पार्टिकल इंड्यूस्ड एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप (APIXS).

वर्तमान स्थिति[संपादित करें]

इसरो द्वारा चंद्रयान-2 को 2018 में प्रक्षेपण करने की योजना है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Nair, Avinash (31 May 2015). "ISRO to deliver "eyes and ears" of Chandrayaan-2 by 2015-end". The Indian Express. http://indianexpress.com/article/technology/science/sac-to-deliver-eyes-and-ears-of-chandrayaan-2-by-2015-end. अभिगमन तिथि: 7 August 2016. 
  2. Kiran Kumar, Aluru Seelin (August 2015). "Chandrayaan-2 - India's Second Moon Mission". YouTube.com. Inter-University Centre for Astronomy and Astrophysics. https://www.youtube.com/watch?v=1TzL1UTELgc. अभिगमन तिथि: 7 August 2016. 
  3. Subramanian, T. S. (11 May 2014). "Chandrayaan's rover and the moon rocks from Salem villages". The Hindu. http://www.thehindu.com/sci-tech/science/chandrayaans-rover-and-the-moon-rocks-from-salem-villages/article5996869.ece. अभिगमन तिथि: 2 October 2014. 
  4. Shenoy, Jaideep (28 February 2016). "ISRO chief signals India's readiness for Chandrayaan II mission". The Times of India. Times News Network. http://timesofindia.indiatimes.com/city/mangaluru/ISRO-chief-signals-Indias-readiness-for-Chandrayaan-II-mission/articleshow/51178528.cms. अभिगमन तिथि: 7 August 2016. 
  5. Prasad, S. (23 January 2016). "Chandrayaan-2 launch likely by 2018". The Hindu. http://www.thehindu.com/news/cities/puducherry/chandrayaan2-launch-likely-by-2018/article8142591.ece. अभिगमन तिथि: 29 January 2016. 
  6. "Chandrayaan-2 to be finalised in 6 months". The Hindu. 2007-09-07. http://www.hinduonnet.com/2007/09/27/stories/2007092756381500.htm. अभिगमन तिथि: 2008-10-22. 
  7. "Chandrayaan-II will try out new ideas, technologies". The Week. 2010-09-07. http://week.manoramaonline.com/cgi-bin/MMOnline.dll/portal/ep/contentView.do?contentId=7859475&programId=1073754912&pageTypeId=1073754893&contentType=EDITORIAL&BV_ID=@@@. अभिगमन तिथि: 2010-09-07. 
  8. "Landing spots for Chandrayaan-2 identified". DNA India. 21 February 2014. http://www.dnaindia.com/india/report-landing-spots-for-chandrayaan-2-identified-1963786. अभिगमन तिथि: 23 February 2014. 
  9. "ISRO plans Moon rover". The Hindu. 2007-01-04. http://www.hindu.com/2007/01/04/stories/2007010401342200.htm. अभिगमन तिथि: 2008-10-22. 
  10. Chand, Manish (12 November 2007). "India, Russia to expand n-cooperation, defer Kudankulam deal". Nerve. Archived from the original on 13 January 2014. http://web.archive.org/web/20140113024836/http://www.nerve.in/news:25350099047. अभिगमन तिथि: 12 January 2014. 
  11. Sunderarajan, P. (19 September 2008). "Cabinet clears Chandrayaan-2". The Hindu. http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/article1341321.ece. अभिगमन तिथि: 23 October 2008. 
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  14. http://timesofindia.indiatimes.com/india/Payloads-for-Chandrayaan-2-finalised-to-carry-7-instruments/articleshow/6462647.cms Payloads for Chandrayaan-2 finalised, to carry 7 instruments
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  16. Laxman, Srinivas (6 February 2012). "India's Chandrayaan-2 Moon Mission Likely Delayed After Russian Probe Failure". Asian Scientist. http://www.asianscientist.com/2012/02/topnews/india-chandrayaan-2-moon-mission-delayed-after-russian-probe-failure-lev-zelyony-2012/. अभिगमन तिथि: 5 April 2012. 
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  20. "Annual Report 2014-2015" (PDF). Indian Space Research Organisation. December 2014. p. 82. http://www.isro.gov.in/sites/default/files/pdf/AR2014-15.pdf. 
  21. "Annual Report 2015-2016" (PDF). Indian Space Research Organisation. December 2015. p. 89. http://www.isro.gov.in/sites/default/files/article-files/right-to-information/annual_report-15-16.pdf. 
  22. Rekha, A. R.; Shukkoor, A. Abdul; Mohanlal, P. P. (2011). "Challenges in Navigation System design for Lunar Soft Landing". National Conference on Space Transportation Systems. 16-18 December 2011. Thiruvananthapuram, India.. p. 2. http://mohanlalpp.in/mysite/uploads/publish023.pdf. 
  23. Johnson (August 31, 2010). "Three new Indian payloads for Chandrayaan 2, decides ISRO". Indian Express. http://www.indianexpress.com/news/Three-new-Indian-payloads-for-Chandrayaan-2--decides-ISRO/674662. अभिगमन तिथि: 2010-08-31. 
  24. "NASA and ESA to partner for chandrayaan-2". Skaal Times. February 04, 2010. http://www.sakaaltimes.com/SakaalTimesBeta/20100204/4693467461593115964.htm. अभिगमन तिथि: 2010-02-22. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]