चंद्रयान-२

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चंद्रयान-२
Chandrayaan-2
मिशन प्रकार चन्द्र कक्षयान , लैंडर तथा रोवर
संचालक (ऑपरेटर) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
वेबसाइट www.isro.gov.in/chandrayaan2-home
मिशन अवधि कक्षयान: 1 वर्ष
विक्रम लैंडर: <15 दिन[1]
प्रज्ञान रोवर: <15 दिन[1]
अंतरिक्ष यान के गुण
निर्माता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
लॉन्च वजन कुल योग: 3,877 कि॰ग्राम (8,547 पौंड)[2][3]
पेलोड वजन कक्षयान: 2,379 कि॰ग्राम (5,245 पौंड)[2][3]
विक्रम लैंडर:1,471 कि॰ग्राम (3,243 पौंड)[2][3]
प्रज्ञान रोवर: 27 कि॰ग्राम (60 पौंड)[2][3]
ऊर्जा

कक्षयान: 1 किलोवाट[4] विक्रम लैंडर: 650 वाट

प्रज्ञान रोवर: 50 वाट
मिशन का आरंभ
प्रक्षेपण तिथि 14 जुलाई 2019, 21:21 यु.टी.सी (योजना) [5]
रॉकेट भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान संस्करण 3[6][7]
प्रक्षेपण स्थल सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
ठेकेदार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
चन्द्रमा कक्षीयान
कक्षीय निवेशनसितंबर 6, 2019 (योजना)[5]
कक्षा मापदंड
निकट दूरी बिंदु100 कि॰मी॰ (62 मील)[8]
दूर दूरी बिंदु100 कि॰मी॰ (62 मील)[8]
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भारतीय चन्द्रयान अभियान
← चंद्रयान-1 चंद्रयान-3

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रयान-1 के बाद दूसरा चंद्र अन्वेषण अभियान है,[9][10] जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने विकसित किया है।[11] अभियान को जीएसएलवी संस्करण 3 प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपण करने की योजना है।[12][7] इस अभियान में भारत में निर्मित एक चंद्र कक्षयान, एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल होंगे। इस सब का विकास इसरो द्वारा किया जायेगा।[13] भारत चंद्रयान-2 को 15 July 2019 में प्रक्षेपण करने की योजना बना रहा है।[14]

चंद्रयान-2 लैंडर और रोवर चंद्रमा पर लगभग 70° दक्षिण के अक्षांश पर स्थित दो क्रेटरों मज़िनस सी और सिमपेलियस एन के बीच एक उच्च मैदान पर उतरने का प्रयास करेगा। पहिएदार रोवर चंद्र सतह पर चलेगा और जगह का रासायनिक विश्लेषण करेगा। पहिएदार रोवर चन्द्रमा की सतह पर चलेगा तथा वहीं पर विश्लेषण के लिए मिट्टी या चट्टान के नमूनों को एकत्र करेगा। आंकड़ों को चंद्रयान-2 कक्षयान के माध्यम से पृथ्वी पर भेजा जायेगा।[15][16][17]

चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 14 जुलाई 2019 को 21:21 यूटीसी पर निर्धारित है।

इतिहास[संपादित करें]

12 नवम्बर 2007 को इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी (रोसकोसमोस) के प्रतिनिधियों ने चंद्रयान-2 परियोजना पर साथ काम करने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। [18] ऑर्बिटर तथा रोवर की मुख्य जिम्मेदारी इसरो की होगी तथा रोसकोसमोस लैंडर के लिए जिम्मेदार होगा.

भारत सरकार ने 18 सितंबर 2008 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस अभियान को स्वीकृति दी थी।[19] अंतरिक्ष यान के डिजाइन को अगस्त 2009 में पूर्ण कर लिया गया जिसमे दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने अपना संयुक्त योगदान दिया.[20][21]

हालांकि इसरो ने चंद्रयान -2 कार्यक्रम के अनुसार पेलोड को अंतिम रूप दिया।[22] परंतु अभियान को जनवरी 2013 में स्थगित कर दिया गया।[23] तथा अभियान को 2016 के लिये पुनर्निर्धारित किया। क्योंकि रूस लैंडर को समय पर विकसित करने में असमर्थ था। [24][25] रोसकोसमोस को बाद में मंगल ग्रह के लिए भेज़े फोबोस-ग्रन्ट अभियान मे मिली विफलता के कारण चंद्रयान -2 कार्यक्रम से अलग कर दिया गया।[24] तथा भारत ने चंद्र मिशन को स्वतंत्र रूप से विकसित करने का फैसला किया।[23]

डिजाइन[संपादित करें]

अंतरिक्ष यान

इस अभियान को श्रीहरिकोटा द्वीप के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान द्वारा भेजे जाने की योजना है; उड़ान के समय इसका वजन लगभग 3,250 किलो होगा।[8][7][26] दिसंबर 2015 को, इस अभियान के लिये 603 करोड़ रुपये की लागत आवंटित की गई।[27]

ऑर्बिटर

ऑर्बिटर 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर चन्द्रमा की परिक्रमा करेगा.[28] इस अभियान में ऑर्बिटर को पांच पेलोड के साथ भेजे जाने का निर्णय लिया गया है। तीन पेलोड नए हैं, जबकि दो अन्य चंद्रयान-1 ऑर्बिटर पर भेजे जाने वाले पेलोड के उन्नत संस्करण हैं। उड़ान के समय इसका वजन लगभग 1400 किलो होगा। ऑर्बिटर उच्च रिज़ॉल्यूशन कैमरा (Orbiter High Resolution Camera) लैंडर के ऑर्बिटर से अलग होने पूर्व लैंडिंग साइट के उच्च रिज़ॉल्यूशन तस्वीर देगा।[1][28] ऑर्बिटर और उसके जीएसएलवी प्रक्षेपण यान के बीच इंटरफेस को अंतिम रूप दे दिया है।[29]

लैंडर

चन्द्रमा की सतह से टकराने वाले चंद्रयान-1 के मून इम्पैक्ट प्रोब के विपरीत, लैंडर धीरे-धीरे नीचे उतरेगा। [26] लैंडर किसी भी वैज्ञानिक गतिविधियों प्रदर्शन नहीं करेंगे। लैंडर तथा रोवर का वजन लगभग 1250 किलो होगा। प्रारंभ में, लैंडर रूस द्वारा भारत के साथ सहयोग से विकसित किए जाने की उम्मीद थी। जब रूस ने 2015 से पहले लैंडर के विकास में अपनी असमर्थता जताई। तो भारतीय अधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से लैंडर को विकसित करने का निर्णय लिया। रूस लैंडर को रद्द करने का मतलब था। कि मिशन प्रोफ़ाइल परिवर्तित हो जाएगी। स्वदेशी लैंडर की प्रारंभिक कॉन्फ़िगरेशन का अध्ययन 2013 में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र(SAC),अहमदाबाद द्वारा पूरा कि गयी। [23]

चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के लिए अनुसंधान दल ने लैंडिंग विधि की पहचान की। और इससे जुड़े प्रौद्योगिकियों का अध्ययन किया। इन प्रौद्योगिकियों में उच्च संकल्प कैमरा, नेविगेशन कैमरा, खतरा परिहार कैमरा, एक मुख्य तरल इंजन (800 न्यूटन) और अल्टीमीटर, वेग मीटर, एक्सीलेरोमीटर और इन घटकों को चलाने के लिए सॉफ्टवेयर आदि है।[1][28] लैंडर के मुख्य इंजन को सफलतापूर्वक 513 सेकंड की अवधि के लिए परीक्षण किया जा चुका है। सेंसर और सॉफ्टवेयर के बंद लूप सत्यापन परीक्षण 2016 के मध्य में परीक्षण करने की योजना बनाई है। [29] लैंडर के इंजीनियरिंग मॉडल को कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के चुनलेरे में अक्टूबर 2016 के अंत में भूजल और हवाई परीक्षणों के दौर से गुजरना शुरू किया। इसरो ने लैंडिंग साइट का चयन करने के लिए और लैंडर के सेंसर की क्षमता का आकलन करने में सहायता के लिए चुनलेरे में करीब 10 क्रेटर बनाए।

सबसिस्टम मात्रा (सं.) वजन(किलोग्राम) पावर(वाट)
जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली[30] 1 20 100
स्टार ट्राकर[30] 2 6 15
अल्टीमीटर[30] 2 1.5 8
वेलोसिटी मीटर[30] 2 1.5 8
इमेजिंग सेंसर[30] 2 2 5
रोवर

रोवर का वजन 20-30 किलो के बीच होगा और सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होगा. रोवर चन्द्रमा की सतह पर पहियों के सहारे चलेगा, मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करेगा, उनका रासायनिक विश्लेषण करेगा और डाटा को ऊपर ऑर्बिटर के पास भेज देगा जहां से इसे पृथ्वी के स्टेशन पर भेज दिया जायेगा.[22][26]

प्रारंभिक योजना में रोवर को रूस में डिजाइन और भारत में निर्मित किया जाना था। हालांकि, रूस ने मई 2010 को रोवर को डिजाइन करने से मना कर दिया। इसके बाद, इसरो ने रोवर के डिजाइन और निर्माण खुद करने का फैसला किया। आईआईटी कानपुर ने गतिशीलता प्रदान करने के लिए रोवर के तीन उप प्रणालियों विकसित की:

  1. त्रिविम कैमरा आधारित 3डी दृष्टि - जमीन टीम को रोवर नियंत्रित के लिए रोवर के आसपास के इलाके की एक 3डी दृश्य को प्रदान करेगा।
  2. काइनेटिक कर्षण नियंत्रण - इसके द्वारा रोवर को चन्द्रमा की सतह पर चलने में सहायक होगा और अपने छह पहियों पर स्वतंत्र से काम करने की क्षमता प्रदान होगी।
  3. नियंत्रण और मोटर गतिशीलता - रोवर के छह पहियों होंगे,प्रत्येक स्वतंत्र बिजली की मोटर के द्वारा संचालित होंगे। इसके चार पहिए स्वतंत्र स्टीयरिंग में सक्षम होंगे। कुल 10 बिजली की मोटरों कर्षण और स्टीयरिंग के लिए इस्तेमाल कि जाएगी।

पेलोड[संपादित करें]

इसरो ने घोषणा की है कि एक विशेषज्ञ समिति के निर्णय के अनुसार ऑर्बिटर पर पांच तथा रोवर पर दो पेलोड भेजे जायेंगे.[31] हालांकि शुरुआत में बताया गया था कि नासा तथा ईएसए भी इस अभियान में भाग लेंगे और ऑर्बिटर के लिए कुछ वैज्ञानिक उपकरणों को प्रदान करेंगे,[32] इसरो ने बाद में स्पष्ट किया कि वजन प्रतिबंधों के चलते वह इस अभियान पर किसी भी गैर-भारतीय पेलोड को साथ नहीं ले जायेगी.

ऑर्बिटर पेलोड
  • चन्द्र सतह पर मौजूद प्रमुख तत्वों की मैपिंग (मानचित्रण) के लिए इसरो उपग्रह केन्द्र (ISAC), बंगलौर से लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास) और फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL), अहमदाबाद से सोलर एक्स-रे मॉनिटर (XSM).[22]
  • स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से एल और एस बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर); चन्द्र सतह पर वॉटर आइस (बर्फीले पानी) सहित अन्य तत्वों की खोज के लिए. एसएआर से चन्द्रमा के छायादार क्षेत्रों के नीचे वॉटर आइस की उपस्थिति की पुष्टि करने वाले और अधिक साक्ष्य प्रदान किये जाने की उम्मीद है।
  • स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से इमेजिंग आईआर स्पेक्ट्रोमीटर (IIRS); खनिज, पानी, तथा हाइड्रॉक्सिल की मौजूदगी संबंधी अध्ययन हेतु चन्द्रमा की सतह के काफी विस्तृत हिस्से का मानचित्रण करने के लिए.
  • अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (SPL), तिरुअनंतपुरम से न्यूट्रल मास स्पेक्ट्रोमीटर (ChACE2); चन्द्रमा के बहिर्मंडल के विस्तृत अध्ययन के लिए.
  • स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से टेरेन मैपिंग कैमरा-2 (टीएमसी-2); चन्द्रमा के खनिज-विज्ञान तथा भूविज्ञान के अध्ययन के लिए आवश्यक त्रिआयामी मानचित्र को तैयार करने के लिए.
लैंडर पेलोड
  • सेइसमोमीटर - लैंडिंग साइट के पास भूकंप के अध्ययन के लिए [8]
  • थर्मल प्रोब - चंद्रमा की सतह के तापीय गुणों का आकलन करने के लिए[8]
  • लॉंगमोर प्रोब - घनत्व और चंद्रमा की सतह प्लाज्मा मापने के लिए[8]
  • रेडियो प्रच्छादन प्रयोग - कुल इलेक्ट्रॉन सामग्री को मापने के लिए[8]
रोवर पेलोड
  • लेबोरेट्री फॉर इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम्स (LEOS), बंगलौर से लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS).
  • PRL, अहमदाबाद से अल्फा पार्टिकल इंड्यूस्ड एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप (APIXS).

वर्तमान स्थिति[संपादित करें]

इसरो द्वारा चंद्रयान-2 को भारतीय समयानुसार 15 जुलाई 2019 की तड़के सुबह 2 बजकर 51 मिनट (24 घण्टें के रूप में) में प्रक्षेपण करने की योजना है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Nair, Avinash (31 May 2015). "ISRO to deliver "eyes and ears" of Chandrayaan-2 by 2015-end". The Indian Express. अभिगमन तिथि 7 August 2016.
  2. "Chandrayaan-2 to Be Launched in January 2019, Says ISRO Chief". Gadgets360. NDTV. Press Trust of India. 29 August 2018. अभिगमन तिथि 29 August 2018.
  3. "ISRO to send first Indian into Space by 2022 as announced by PM, says Dr Jitendra Singh". Indian Department of Space. 28 August 2018. अभिगमन तिथि 29 August 2018.
  4. "Chandrayaan-2 - Home". Indian Space Research Organisation. अभिगमन तिथि June 20, 2019.
  5. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; ISRO20190612 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  6. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; gslv3 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  7. Shenoy, Jaideep (28 February 2016). "ISRO chief signals India's readiness for Chandrayaan II mission". The Times of India. Times News Network. अभिगमन तिथि 7 August 2016.
  8. Kiran Kumar, Aluru Seelin (August 2015). Chandrayaan-2 - India's Second Moon Mission. YouTube.com. Inter-University Centre for Astronomy and Astrophysics. अभिगमन तिथि 7 August 2016.
  9. "Chandrayaan-2 nearly ready for July launch".
  10. "ISRO gears up for Chandrayaan-2 mission".
  11. "Chandrayaan-2 launch put off: India, Israel in lunar race for 4th position".
  12. "GSLV-Mk III, India's 'Baahubali' rocket for Gaganyaan, Chandrayaan II".
  13. "India Slips In Lunar Race With Israel As Ambitious Mission Hits Delays".
  14. Prasad, S. (23 January 2016). "Chandrayaan-2 launch likely by 2018". द हिन्दू. अभिगमन तिथि 29 January 2016.
  15. Subramanian, T. S. (4 January 2007). "ISRO plans Moon rover". The Hindu. अभिगमन तिथि 22 October 2008.
  16. Rathinavel, T.; Singh, Jitendra (24 November 2016). "Question No. 1084: Deployment of Rover on Lunar Surface" (PDF). Rajya Sabha.
  17. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; :1 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  18. Chand, Manish (12 November 2007). "India, Russia to expand n-cooperation, defer Kudankulam deal". Nerve. मूल से 13 January 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 January 2014.
  19. Sunderarajan, P. (19 September 2008). "Cabinet clears Chandrayaan-2". द हिन्दू. अभिगमन तिथि 23 October 2008.
  20. "ISRO completes Chandrayaan-2 design". Domain-b.com. 17 August 2009. अभिगमन तिथि 20 August 2009.
  21. "India and Russia complete design of new lunar probe". Sputnik News. RIA Novosti. 17 August 2009. अभिगमन तिथि 20 August 2009.
  22. http://timesofindia.indiatimes.com/india/Payloads-for-Chandrayaan-2-finalised-to-carry-7-instruments/articleshow/6462647.cms Payloads for Chandrayaan-2 finalised, to carry 7 instruments
  23. Ramachandran, R. (22 January 2013). "Chandrayaan-2: India to go it alone". द हिन्दू.
  24. Laxman, Srinivas (6 February 2012). "India's Chandrayaan-2 Moon Mission Likely Delayed After Russian Probe Failure". Asian Scientist. अभिगमन तिथि 5 April 2012.
  25. "India's next moon mission depends on Russia: ISRO chief". NDTV. Indo-Asian News Service. 9 September 2012.
  26. "Chandrayaan-2 to get closer to moon". दि इकॉनोमिक टाइम्स. 2 September 2010. अभिगमन तिथि 4 January 2011.
  27. "Successful commercial launches boost ISRO's reputation in 2015". Business Standard. 29 December 2015. अभिगमन तिथि 2 April 2016.
  28. "Annual Report 2014-2015" (PDF). Indian Space Research Organisation. दिसम्बर 2014. पृ॰ 82.
  29. "Annual Report 2015-2016" (PDF). Indian Space Research Organisation. दिसम्बर 2015. पृ॰ 89.
  30. Rekha, A. R.; Shukkoor, A. Abdul; Mohanlal, P. P. (2011). "Challenges in Navigation System design for Lunar Soft Landing". National Conference on Space Transportation Systems. 16-18 December 2011. Thiruvananthapuram, भारत.. p. 2. http://mohanlalpp.in/mysite/uploads/publish023.pdf. 
  31. Johnson (August 31, 2010). "Three new Indian payloads for Chandrayaan 2, decides ISRO". Indian Express. अभिगमन तिथि 31 अगस्त 2010.
  32. "NASA and ESA to partner for chandrayaan-2". Skaal Times. February 04, 2010. अभिगमन तिथि 22 फरवरी 2010. |first1= missing |last1= in Authors list (मदद); |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]