भारतीय शुक्र आर्बिटर मिशन

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भारतीय शुक्र आर्बिटर मिशन
मिशन प्रकार शुक्र आर्बिटर
संचालक (ऑपरेटर) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
मिशन अवधि योजना: 1 साल
अंतरिक्ष यान के गुण
बस आई-1के
निर्माता इसरो उपग्रह केंद्र
लॉन्च वजन 1500 किलोग्राम
मिशन का आरंभ
प्रक्षेपण तिथि 2017-2020[1]
रॉकेट ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान[1]
प्रक्षेपण स्थल सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र[1]
ठेकेदार इसरो[1]
शुक्र कक्षीयान

भारतीय शुक्र ऑर्बिटर मिशन (Indian Venusian orbiter mission) शुक्र के वातावरण का अध्ययन करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा शुक्र के लिए प्रस्तावित एक ऑर्बिटर है।[2][3][4] यदि वित्त पोषित होता है, तो इसे 2017 और 2020 के बीच लॉन्च किया जाएगा।[2]

शुक्र के एक्सप्लोरेशन के लिए मिशन का उल्लेख 2017-18 के अनुदान ने स्पेस डिपार्टमेंट ने किया गया है। [5] इसरो ने 2017 में बताया कि सरकार ने मिशन की योजना के लिए मंजूरी दे दी है।[6]

वर्तमान स्थिति[संपादित करें]

चंद्रयान और मंगलायान (मंगल ऑर्बिटर मिशन) की सफलता के आधार पर, इसरो वैज्ञानिकों की एक टीम मंगल और शुक्र के भविष्य अन्तग्रह मिशन के लिए व्यवहार्यता का अध्ययन कर रही है। इस तरह के अन्तग्रह अन्तरिक्ष उडान की योजनाओं पर चर्चा चल रही है। और अध्ययन दल मंगल और शुक्र के मिशन के लिए विभिन्न अवसरों और विकल्पों की तलाश कर रहा है। अध्ययन दल की सिफारिशों के आधार पर, शुक्र और मंगल ग्रह के मिशन की योजना तैयार की जाएगी।

भारत सरकार ने अपने बजट 2017-18 में इसे मंजूर कर दिया। और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अंतरिक्ष विभाग के बजट में 23 प्रतिशत की वृद्धि प्रदान की। अंतरिक्ष विज्ञान अनुभाग के तहत, बजट में "मंगलायान २ और शुक्र के लिए मिशन" प्रावधानों का उल्लेख है।[7]

भारत के बाहर से रुझान[संपादित करें]

जैक्स ब्लमॉन्ट, एक ज्योतिषविज्ञानी, ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को ऑर्बिटर से अलग होने के बाद ग्रह के बेहद गर्म वायुमंडल में तैनात करने के लिए गुब्बारे के साथ कई उपकरणों को डिज़ाइन करने की पेशकश की है।[8]

नासा के साथ भागीदारी[संपादित करें]

फ़रवरी, 2017 में भारत की यात्रा पर, नासा के जेट प्रणोदन प्रयोगशाला के निदेशक माइकल एम वॉटकिन्स ने कहा कि वे कम से कम एक टेलीकमेटिक्स मॉड्यूल डालने के लिए उत्सुक होंगे ताकि नासा के रोवेर्स और भारतीय उपग्रह एक दूसरे से बात कर सकें। वाटकिंस ने कहा कि शुक्र के लिए एक मिशन बहुत ही सार्थक है क्योंकि इस ग्रह के बारे में बहुत कम समझा जाता है और नासा भारत की पहली यात्रा में शुक्र के साथ भागीदारी करने में दिलचस्पी लेगा। उस दिशा में, नासा और इसरो ने इस मिशन को शक्ति प्रदान करने के लिए विद्युत प्रणोदन का उपयोग करने के लिए संयुक्त रूप से अध्ययन करने की कोशिश पर बातचीत शुरू कर दी है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "After Mars, Isro aims for Venus probe in 2-3 years". 9 June 2015.
  2. Ranosa, Ted (July 2015). "India Plans Mission To Venus Following Success Of Mars Orbiter". Tech Times. अभिगमन तिथि 13 October 2015.
  3. Nowakowski, Tomasz (July 2015). "India eyes possible mission to Venus". Spaceflight Insider. अभिगमन तिथि 13 October 2015.
  4. "Isro to undertake the heaviest launch in December". DeccanChronicle.com. 23 July 2016. अभिगमन तिथि 30 March 2017.
  5. [1]
  6. "India eyes a return to Mars and a first run at Venus". ScienceMag.org. 17 February 2017. अभिगमन तिथि 30 March 2017.
  7. India, Press Trust of (12 February 2017). "Budget 2017: ISRO gets funds for 2nd Mars mission, maiden Venus venture". अभिगमन तिथि 30 March 2017 – वाया Business Standard.
  8. Srinivas Laxman (17 February 2012). "India planning Venus mission". Times of India. अभिगमन तिथि 24 July 2012.