असंगति अलंकार

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार।

असंगति - कारण और कार्य में संगति न होने पर असंगति अलंकार होता है । जैसे -

                      हृदय घाव मेरे पीर रघुवीरै ।

घाव तो लक्ष्मण के हृदय में है , पर पीड़ा राम को है , अत: असंगति अलंकार है ।

2- उरझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति।