अत्युक्ति अलंकार

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अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार

काव्य में जहाँ किसी की झूठी वीरता, वियोग, उदारता, प्रेम, सुंदरता, यश आदि का बहुत बढ़ा चढ़ाकर वर्णन किया जाता है कि देखने में हास्यास्पद लगे तो वहां अत्युक्ति अलंकार होता है।जैसे-

इत आवति चलि जेत उत चली छः सातक हाथ। चढ़ी हिंडोरे सी रहै लगी उसासन साथ।।

        -बिहारी 

अतिशयोक्ति और अत्युक्ति मिलते-जुलते अलंकार हैं। अंतर बस इतना है कि उक्ति यदि संभव है तो अतिशयोक्ति अलंकार और यदि असंभव हो तो अत्युक्ति अलंकार।