अतिशयोक्ति अलंकार

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार है इसका उदाहरण है:

पड़ी अचानक नदी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार ।
राजा ने सोचा इस बार, तब तक चेतक था उस पार ।।

(2) :हनुमान की पूछं मे लगन न पाई आग ।

लंका सारी जल गई गए निसाचर भाग ।

बालों को खोल कर मत चला करो दिन में रास्ता भूल जाएगा सूरज !

आगे नदियां पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।

हनुमान की पूंछ में, लगन न पाई आग। लंका सिगरी जल गई गए, गए निशाचर भाग।

वह शर इधर गांडीव गुड़ से भिन्न जैसे ही हुआ। धड़ से जयद्रथ का इधर सिर छिन वैसे ही हुआ।