चम्पावत

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चम्पावत
—  कस्बा  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तराखण्ड
ज़िला चम्पावत
जनसंख्या ३९५८ (2001 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 1,610 मीटर (5,282 फी॰)
आधिकारिक जालस्थल: 210.212.78.56/50cities/champawat/english/home.asp

Erioll world.svgनिर्देशांक: 29°20′N 80°06′E / 29.33°N 80.10°E / 29.33; 80.10

चम्पावत भारत के उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले का मुख्यालय है। पहाड़ों और मैदानों के बीच से होकर बहती नदियाँ अद्भुत छटा बिखेरती हैं। चंपावत में पर्यटकों को वह सब कुछ मिलता है जो वह एक पर्वतीय स्थान से चाहते हैं। वन्यजीवों से लेकर हरे-भरे मैदानों तक और ट्रैकिंग की सुविधा, सभी कुछ यहाँ पर है।

यह कस्बा समुद्र तल से १६१५ मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। चम्पावत कई वर्षों तक कुमाऊँ के शासकों की राजधानी रहा है। चन्द शासकों के किले के अवशेष आज भी चम्पावत में देखे जा सकते हैं।

भूगोल[संपादित करें]

चम्पावत की भौगोलिक स्थिति 29°20′N 80°06′E / 29.33°N 80.10°E / 29.33; 80.10.[1] पर है। इसकी औसत ऊंचाई है १,६१० मीटर (१,२८९ फीट).

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

बालेश्रवर मंदिर[संपादित करें]

बालेश्वर महादेव मंदिर

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण चन्द शासन काल में करवाया गया था। इस मंदिर की वास्तुकला बहुत सुन्दर है। ऐसा माना जाता है कि बालेश्रवर मंदिर का निर्माण १०-१२ ईसवीं शताब्दी में हुआ था।

नागनाथ मंदिर[संपादित करें]

इस मंदिर में की गई वास्तुकला बहुत सुन्दर है। यह कुमाऊँ के पुराने मंदिरों में से एक है।

मीठा-रीठा साहिब[संपादित करें]

यह सिक्खों के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक है। यह स्थान चम्पावत से ७२ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि सिक्खों के प्रथम गुरू, गुरू नानक जी यहां पर आए थे। यह गुरूद्वारा जहां पर स्थित है वहां लोदिया और रतिया नदियों का संगम होता है। गुरूद्वार परिसर पर रीठे के कई वृक्ष लगे हुए है। ऐसा माना जाता है कि गुरू के स्पर्श से रीठा मीठा हो जाता है। गुरूद्वारा के साथ में ही धीरनाथ मंदिर भी है। बैसाख पूर्णिमा के अवसर पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है।

काली कुमाऊं का शहर और किला

पूर्णनागिरी मंदिर[संपादित करें]

यह पवित्र मंदिर पूर्णनागिरी पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर तंकपुर से २० किलोमीटर तथा चम्पावत से ९२ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पूरे देश से काफी संख्या में भक्तगण इस मंदिर में आते हैं। इस मंदिर में सबसे अधिक भीड़ चैत्र नवरात्रों ( मार्च-अर्प्रैल) में होती है। यहां से काली नदी भी प्रवाहित होती है जिसे शारदा के नाम से जाना जाता है।

श्यामलातल[संपादित करें]

यह जगह चम्पावत से ५६ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके साथ ही यह स्थान स्वामी विवेकानन्द आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध है जो कि खूबसूरत श्यामातल झील के तट पर स्थित है। इस झील का पानी नीले रंग का है। यह झील १.५ वर्ग किलोमीटर तक फैली हुई है। इसके अलावा यहां लगने वाला झूला मेला भी काफी प्रसिद्ध है।

पंचेश्रवर[संपादित करें]

यह स्थान नेपाल सीमा के समीप स्थित है। इस जगह पर काली और सरयू नदियां आपस में मिलती है। पंचेश्रवर भगवान शिव के मंदिर के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। काफी संख्या में भक्तगण यहां लगने वाले मेलों के दौरान आते हैं। और इन नदियों में डूबकी लगाते हैं।

देवीधुरा[संपादित करें]

यह जगह चम्पावत से ४५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह खूबसूरत जगह वराही मंदिर के नाम से जानी जाती है। यहां बगवाल के अवसर पर दो समूह आपस में एक दूसरे पर पत्थर फेकते हैं। यह अनोखी परम्परा रक्षा बन्धन के अवसर की जाती है।

लोहाघाट[संपादित करें]

यह ऐतिहासिक शहर चम्पावत से १४ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान लोहावती नदी के तट पर स्थित है। यह जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इसके अलावा यह स्थान गर्मियों के दौरान यहां लगने वाले बुरास के फूलों के लिए भी प्रसिद्ध है, प्रसिद्द टी.वी. अस्पताल मायावती यही पर हे ।

अब्बोट माउंट[संपादित करें]

अब्बोट माउंट बहुत ही खूबसूरत जगह है। इस स्थान पर ब्रिटिश काल के कई बंगले मौजूद है। यह खूबसूरत जगह लोहाघाट से ११ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा यह जगह २००१ मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

पूर्णनागिरी मंदिर[संपादित करें]

यह पवित्र मंदिर पूर्णनागिरी पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर तंकपुर से २० किलोमीटर तथा चम्पावत से ९२ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पूरे देश से काफी संख्या में भक्तगण इस मंदिर में आते हैं। इस मंदिर में सबसे अधिक भीड़ चैत्र नवरात्रों ( मार्च-अर्प्रैल) में होती है। यहां से काली नदी भी प्रवाहित होती है जिसे शारदा के नाम से जाना जाता है यह नदि नेपाल ओर भारत कि सीमा पर हे । पूर्णागिरी देवी पर केवल उत्तराखंड वासियों की ही नहीं वरन उत्तरप्रदेश के लोगो की भी अटूट आस्था हे

श्यामलातल[संपादित करें]

यह जगह चम्पावत से ५६ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके साथ ही यह स्थान स्वामी विवेकानन्द आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध है जो कि खूबसूरत श्यामातल झील के तट पर स्थित है। इस झील का पानी नीले रंग का है। यह झील १.५ वर्ग किलोमीटर तक फैली हुई है। इसके अलावा यहां लगने वाला झूला मेला भी काफी प्रसिद्ध है।

पंचेश्रवर[संपादित करें]

यह स्थान नेपाल सीमा के समीप स्थित है। इस जगह पर काली और सरयू नदियां आपस में मिलती है। पंचेश्रवर भगवान शिव के मंदिर के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। काफी संख्या में भक्तगण यहां लगने वाले मेलों के दौरान आते हैं। और इन नदियों में डूबकी लगाते हैं।

देवीधुरा[संपादित करें]

यह जगह चम्पावत से ४५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह खूबसूरत जगह वराही मंदिर के नाम से जानी जाती है। यहां बगवाल के अवसर पर दो समूह आपस में एक दूसरे पर पत्थर फेकते हैं। यह अनोखी परम्परा रक्षा बन्धन के अवसर की जाती है।

बनबसा[संपादित करें]

यह नेपाल बोर्डर {महेंद्र नगर } पर स्थ्ति हे, एन. टी. पि. सि का कारखाना यहाँ पर हे यहाँ पर सेना की छावनी भी हे. यहाँ पर एक फार्म हॉउस हे जिसका नाम स्त्रोग फार्म हॉउस हे जिसके की मालिक एक ब्रिटिश नागरिक हे वो यहाँ पर स्कूल एवं अनाथालय चलाते हे.

लोहाघाट[संपादित करें]

यह ऐतिहासिक शहर चम्पावत से १४ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान लोहावती नदी के तट पर स्थित है। यह जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इसके अलावा यह स्थान गर्मियों के दौरान यहां लगने वाले बुरास के फूलों के लिए भी प्रसिद्ध है।

अब्बोट माउंट[संपादित करें]

अब्बोट माउंट बहुत ही खूबसूरत जगह है। इस स्थान पर ब्रिटिश काल के कई बंगले मौजूद है। यह खूबसूरत जगह लोहाघाट से ११ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा यह जगह २००१ मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

संदर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]