भारत के संरक्षित क्षेत्र

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मई 2004 तक, भारत के संरक्षित क्षेत्र 156700 वर्गमीटर, कुल सतह क्षेत्र का लगभग 4.95% हिस्से में फैला हुआ है।

वर्गीकरण[संपादित करें]

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा निर्दिष्ट शब्द के अर्थ में भारत में निम्नलिखित प्रकार के संरक्षित क्षेत्र हैं:

राष्ट्रीय उद्यान[संपादित करें]

राष्ट्रीय उद्यान (आईयूसीएन श्रेणी II): भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान हैली नेशनल पार्क, अब जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, 1936 में स्थापित किया गया था। 1970 तक भारत में 5 राष्ट्रीय उद्यान थे; जबकि वर्तमान में 105 राष्ट्रीय उद्यान हैं। क्षेत्र के संदर्भ में, कुल 39,91 वर्ग किमी (15,413 वर्ग मील) क्षेत्र इसमें शामिल किया, जोकि भारत के कुल सतह क्षेत्र का 1.21% क्षेत्र है।

वन्यजीव अभ्यारण्य[संपादित करें]

वन्यजीव अभ्यारण्य (आईयूसीएन श्रेणी IV): भारत में 543 पशु अभ्यारण्य हैं, जिनमें लगभग 1,16,800 वर्ग किमी (भारत के कुल सतह क्षेत्र का लगभग 4% शामिल है) क्षेत्र शामिल है, और उन्हें वन्यजीव अभयारण्य कहा जाता है। इनमें से 50 बाघ संरक्षित क्षेत्र है और बाघ परियोजना द्वारा शासित होते हैं, और बाघ के संरक्षण में विशेष महत्व के हैं।[1] नवीनतम बाघ रिजर्व अरुणाचल प्रदेश में कमलंग टाइगर रिजर्व है।

संरक्षित जैवमंडल[संपादित करें]

संरक्षित जैवमंडल (यूनेस्को के पदनाम आईयूसीएन श्रेणी V से संबंधित): भारत सरकार ने संरक्षित जैवमंडल भी स्थापित किए हैं, जो प्राकृतिक आवास के बड़े क्षेत्रों की रक्षा करते हैं, और अक्सर एक या अधिक राष्ट्रीय उद्यान और / या संरक्षित क्षेत्रों से मिलकर बने होते हैं, जिनमें बफर जोन भी सम्मलित होते है जोकि सीमित आर्थिक गतिविधियों के लिए खुले रहते हैं। भारत सरकार ने भारत में 18 संरक्षित जैवमंडल की स्थापना की है।[2]

आरक्षित और संरक्षित वन[संपादित करें]

आरक्षित वन और संरक्षित वन (आईयूसीएन श्रेणी IV या VI, संरक्षण के आधार पर): ये वे वन्य भूमि हैं जहां कुछ समुदायों के सदस्यों को स्थायी आधार पर लकडी की कटाई, शिकार, चराई और अन्य गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। आरक्षित वनों में, ऐसी गतिविधियों के लिए स्पष्ट अनुमति की आवश्यकता है। संरक्षित वनो में, ऐसी गतिविधियों को तब तक अनुमति दी जाती है जब तक कि स्पष्ट रूप से प्रतिबंध न लगाया गया हो। इस प्रकार, सामान्यत: आरक्षित वनों में संरक्षित जंगलों की तुलना में उच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान की जाती है।

संरक्षण और सामुदायिक भंडार[संपादित करें]

संरक्षण भंडार और सामुदायिक भंडार (आईयूसीएन श्रेणी V और VI क्रमशः): ये मौजूदा संरक्षित क्षेत्रों से जुड़े क्षेत्र हैं जो पारिस्थितिक मूल्य के हैं और प्रवास गलियारे या मध्यवर्ती क्षेत्र के रूप में कार्य कर सकते हैं। संरक्षण भंडार, सरकारी स्वामित्व वाली भूमि को नामित किया जाता है, जहां से समुदाय निर्वाह प्राप्त कर सकता है, जबकि सामुदायिक भंडार मिश्रित सरकारी / निजी भूमि पर हो सकती हैं। सामुदायिक भंडार, एकमात्र निजी भूमि है जिस पर भारत सरकार द्वारा समझौता संरक्षण प्रदान किया जाता है।

ग्रामीण और पंचायत वन[संपादित करें]

ग्रामीण और पंचायत वन (आईयूसीएन श्रेणी VI): ये वन्य भूमि हैं जो एक गांव या पंचायत द्वारा स्थायी आधार पर प्रशासित की जाती हैं, आवास, वनस्पतियों और जीवों का प्रबंधन समुदाय द्वारा कुछ हद तक संरक्षण प्रदान किया जाता है।

निजी संरक्षित क्षेत्र[संपादित करें]

निजी संरक्षित क्षेत्र: ये वे क्षेत्र हैं जिनके स्वामित्व किसी व्यक्ति या संगठन / निगम के स्वामित्व में नहीं है जो सरकार या सांप्रदायिक निकाय से संबद्ध नहीं है। हालांकि भारतीय कानून ऐसे क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान नहीं करता है, फिर भी कुछ गैर सरकारी संगठन संरक्षण प्रयासों में सहायता के लिए भूमि ट्रस्ट जैसे तरीकों का उपयोग कर रहे हैं और सुरक्षा के सीमित साधन प्रदान कर रहे हैं।

संरक्षित क्षेत्र[संपादित करें]

संरक्षित क्षेत्र: संरक्षण क्षेत्र बड़ी, अच्छी तरह से नामित भौगोलिक संस्थाएं हैं जहां परिदृश्य संरक्षण चल रहा है, और आमतौर पर विभिन्न प्रकार के घटक संरक्षित क्षेत्रों के साथ-साथ निजी स्वामित्व वाली भूमि भी सम्मलित होती है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Chetan Chauhan (21 June 2011), Kawal is tiger reserve no. 42, New Delhi: Hindustan Times, मूल से 26 August 2011 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि 21 June 2011
  2. Ministry of Environment and Forests: "Annual Report 2010-2011"