भारत के ज्वालामुखियों की सूची

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यहाँ भारत में सक्रिय, सुप्त / विलुप्त ज्वालामुखियों की एक सूची दी गई है।

नाम ऊंचाई अवस्थिति अंतिम विस्फोट प्रकार
मीटर फीट निर्देशांक राज्य
बैरन द्वीप 354 1161 12°16′41″N 93°51′29″E / 12.278°N 93.858°E / 12.278; 93.858 अंडमान द्वीपसमूह 2017 मिश्रित ज्वालामुखी
नर्कोन्दम 710 2329 13°26′N 94°17′E / 13.43°N 94.28°E / 13.43; 94.28 अंडमान द्वीपसमूह 560 kyrs BP मिश्रित ज्वालामुखी
दक्कन बन्ध -- -- 18°31′N 73°26′E / 18.51°N 73.43°E / 18.51; 73.43 महाराष्ट्र 66 mya --
बारातांग -- -- 12°04′N 92°28′E / 12.07°N 92.47°E / 12.07; 92.47 अंडमान द्वीपसमूह 2003 से सक्रिय गारामुखी
धनोधर पर्वत 386 1266.4 23°27′N 69°20′E / 23.45°N 69.34°E / 23.45; 69.34 गुजरात निष्क्रिय ज्वालामुखी विलुप्त
धोसी पहाड़ी 1170 3840 28°04′N 76°02′E / 28.06°N 76.03°E / 28.06; 76.03 हरयाणा 732 Ma बीपी (वर्तमान से लाख साल पहले) विलुप्त
तोशाम पहाड़ी 207 679 28°53′N 75°55′E / 28.88°N 75.92°E / 28.88; 75.92निर्देशांक: 28°53′N 75°55′E / 28.88°N 75.92°E / 28.88; 75.92 हरयाणा 732 Ma बीपी (वर्तमान से लाख साल पहले) विलुप्त

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

R, Bhutani, K. Pande, J.S. Ray, R.S. Smitha, N. Awasthi & A. Kumar, Paper No. 268-9, 2014 GSA Annual Meeting in Vancouver, British Columbia (19–22 October 2014)

भारत का भूगोल या भारत का भौगोलिक स्वरूप से आशय भारत में भौगोलिक तत्वों के वितरण और इसके प्रतिरूप से है जो लगभग हर दृष्टि से काफ़ी विविधतापूर्ण है। दक्षिण एशिया के तीन प्रायद्वीपों में से मध्यवर्ती प्रायद्वीप पर स्थित यह देश अपने ३२,८७,२६३ वर्ग किमी क्षेत्रफल के साथ विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है। साथ ही लगभग १.३ अरब जनसंख्या के साथ यह पूरे विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश भी है।

भारत की भौगोलिक संरचना में लगभग सभी प्रकार के स्थलरूप पाए जाते हैं। एक ओर इसके उत्तर में विशाल हिमालय की पर्वतमालायें हैं तो दूसरी ओर और दक्षिण में विस्तृत हिंद महासागर, एक ओर ऊँचा-नीचा और कटा-फटा दक्कन का पठार है तो वहीं विशाल और समतल सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान भी, थार के विस्तृत मरुस्थल में जहाँ विविध मरुस्थलीय स्थलरुप पाए जाते हैं तो दूसरी ओर समुद्र तटीय भाग भी हैं। कर्क रेखा इसके लगभग बीच से गुजरती है और यहाँ लगभग हर प्रकार की जलवायु भी पायी जाती है। मिट्टी, वनस्पति और प्राकृतिक संसाधनो की दृष्टि से भी भारत में काफ़ी भौगोलिक विविधता है।

प्राकृतिक विविधता ने यहाँ की नृजातीय विविधता और जनसंख्या के असमान वितरण के साथ मिलकर इसे आर्थिक, सामजिक और सांस्कृतिक विविधता प्रदान की है। इन सबके बावजूद यहाँ की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक एकता इसे एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करती है। हिमालय द्वारा उत्तर में सुरक्षित और लगभग ७ हज़ार किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा के साथ हिन्द महासागर के उत्तरी शीर्ष पर स्थित भारत का भू-राजनैतिक महत्व भी बहुत बढ़ जाता है और इसे एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करता है।