पश्चिमी तटीय मैदानी क्षेत्र

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पश्चिमी तटीय मैदान भारत के पश्चिमी तट और पश्चिमी घाट पहाड़ियों के बीच 50 किलोमीटर (31 मील) चौड़ाई की एक तटीय मैदान पट्टी है, जो तापी नदी के दक्षिण से शुरू होती है। यह मैदान पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच स्थित हैं। मैदान उत्तर में गुजरात से शुरू होता है और दक्षिण में केरल में समाप्त होता है। इसमें महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक राज्य शामिल हैं। इस क्षेत्र में तीन खंड हैं: तट के उत्तरी भाग को कोंकण (मुंबई-गोवा) कहा जाता है, मध्य खंड को करावली कहा जाता है, जबकि दक्षिणी खंड को मालाबार तट कहा जाता है। इसके उत्तरी भाग में दो खाड़ी हैं: खंबात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी। तट के किनारे की नदियाँ ज्वारनदमुख बनाती हैं और मछली पालन के लिए आदर्श स्थिति प्रदान करती हैं। इस भाग में तटीय भूमि कम होने के कारण यह भूमंडलीय ऊष्मीकरण से अधिक प्रभावित होगा।

पश्चिमी तट के उत्तरी भाग को कोंकण और दक्षिणी भाग को मालाबार कहा जाता है। दक्षिण मालाबार या केरल तट टूट गया है और कुछ लैगून बन गये हैं। उत्तर मालाबार तट को कर्नाटक तट के रूप में जाना जाता है। यहाँ मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले शरवती नदी 275 मीटर ऊँची चट्टान से नीचे गिरती है और जोग जल प्रपात बनाती है।

पश्चिमी तटीय मैदान उत्तर में दक्षिण में कन्याकुमारी से 1,500 किमी, उत्तर में दक्षिण से 10 से 25 किमी तक की चौड़ाई, गुजरात के मैदान कोंकण मैदान (दमन से गोवा, 500 किमी), कर्नाटक के मैदानी इलाके तक फैले हुए हैं। (गोवा से 225 किमी दक्षिण में), और कोंकण से कन्याकुमारी तक 500 किमी की दूरी पर केरल तटीय मैदान पश्चिम तटीय मैदान बनाते हैं। वेस्ट कॉन्टिनेंटल शेल्फ बॉम्बे के तट सबसे चौड़ा (350 किमी) है, जहां तेल से समृद्ध बॉम्बे हाई, प्रसिद्ध हो गया है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

भारत का भूगोल या भारत का भौगोलिक स्वरूप से आशय भारत में भौगोलिक तत्वों के वितरण और इसके प्रतिरूप से है जो लगभग हर दृष्टि से काफ़ी विविधतापूर्ण है। दक्षिण एशिया के तीन प्रायद्वीपों में से मध्यवर्ती प्रायद्वीप पर स्थित यह देश अपने ३२,८७,२६३ वर्ग किमी क्षेत्रफल के साथ विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है। साथ ही लगभग १.३ अरब जनसंख्या के साथ यह पूरे विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश भी है।

भारत की भौगोलिक संरचना में लगभग सभी प्रकार के स्थलरूप पाए जाते हैं। एक ओर इसके उत्तर में विशाल हिमालय की पर्वतमालायें हैं तो दूसरी ओर और दक्षिण में विस्तृत हिंद महासागर, एक ओर ऊँचा-नीचा और कटा-फटा दक्कन का पठार है तो वहीं विशाल और समतल सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान भी, थार के विस्तृत मरुस्थल में जहाँ विविध मरुस्थलीय स्थलरुप पाए जाते हैं तो दूसरी ओर समुद्र तटीय भाग भी हैं। कर्क रेखा इसके लगभग बीच से गुजरती है और यहाँ लगभग हर प्रकार की जलवायु भी पायी जाती है। मिट्टी, वनस्पति और प्राकृतिक संसाधनो की दृष्टि से भी भारत में काफ़ी भौगोलिक विविधता है।

प्राकृतिक विविधता ने यहाँ की नृजातीय विविधता और जनसंख्या के असमान वितरण के साथ मिलकर इसे आर्थिक, सामजिक और सांस्कृतिक विविधता प्रदान की है। इन सबके बावजूद यहाँ की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक एकता इसे एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करती है। हिमालय द्वारा उत्तर में सुरक्षित और लगभग ७ हज़ार किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा के साथ हिन्द महासागर के उत्तरी शीर्ष पर स्थित भारत का भू-राजनैतिक महत्व भी बहुत बढ़ जाता है और इसे एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करता है।