भारत के स्वायत्त क्षेत्र

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यह सूची भारत के स्वायत्त क्षेत्रओं की सूची है:

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्वायत्त क्षेत्र[संपादित करें]

  • उत्तर प्रहरी द्वीप

असम में स्वायत्त क्षेत्र[संपादित करें]

  • बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद
  • कारबी आंगलोंग स्वायत्त परिषद
    • कारबी आंगलोंग जिला
  • उत्तरी कछार हिल्स स्वायत्त जिला परिषद
    • उत्तरी कछार हिल्स जिला

जम्मू और कश्मीर में स्वायत्त क्षेत्र[संपादित करें]

  • लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, करगिल
    • लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद
  • लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, लेह
    • लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद

मेघालय में स्वायत्त क्षेत्र[संपादित करें]

  • गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद
    • गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद
  • जैंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद
    • जैंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद
  • खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद
    • खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद

मिजोरम में स्वायत्त क्षेत्र[संपादित करें]

  • चकमा स्वायत्त जिला परिषद
    • चकमा स्वायत्त जिला परिषद
  • लाइ स्वायत्त जिला परिषद
    • लाइ स्वायत्त जिला परिषद
  • मारा स्वायत्त जिला परिषद
    • मारा स्वायत्त जिला परिषद

त्रिपुरा में स्वायत्त क्षेत्र[संपादित करें]

  • त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्रों स्वायत्त जिला परिषद
    • त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्रों स्वायत्त जिला परिषद

पश्चिम बंगाल स्वायत्त क्षेत्र संपादित करें[संपादित करें]

  • दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद
    • दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद

भारत का भूगोल या भारत का भौगोलिक स्वरूप से आशय भारत में भौगोलिक तत्वों के वितरण और इसके प्रतिरूप से है जो लगभग हर दृष्टि से काफ़ी विविधतापूर्ण है। दक्षिण एशिया के तीन प्रायद्वीपों में से मध्यवर्ती प्रायद्वीप पर स्थित यह देश अपने ३२,८७,२६३ वर्ग किमी क्षेत्रफल के साथ विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है। साथ ही लगभग १.३ अरब जनसंख्या के साथ यह पूरे विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश भी है।

भारत की भौगोलिक संरचना में लगभग सभी प्रकार के स्थलरूप पाए जाते हैं। एक ओर इसके उत्तर में विशाल हिमालय की पर्वतमालायें हैं तो दूसरी ओर और दक्षिण में विस्तृत हिंद महासागर, एक ओर ऊँचा-नीचा और कटा-फटा दक्कन का पठार है तो वहीं विशाल और समतल सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान भी, थार के विस्तृत मरुस्थल में जहाँ विविध मरुस्थलीय स्थलरुप पाए जाते हैं तो दूसरी ओर समुद्र तटीय भाग भी हैं। कर्क रेखा इसके लगभग बीच से गुजरती है और यहाँ लगभग हर प्रकार की जलवायु भी पायी जाती है। मिट्टी, वनस्पति और प्राकृतिक संसाधनो की दृष्टि से भी भारत में काफ़ी भौगोलिक विविधता है।

प्राकृतिक विविधता ने यहाँ की नृजातीय विविधता और जनसंख्या के असमान वितरण के साथ मिलकर इसे आर्थिक, सामजिक और सांस्कृतिक विविधता प्रदान की है। इन सबके बावजूद यहाँ की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक एकता इसे एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करती है। हिमालय द्वारा उत्तर में सुरक्षित और लगभग ७ हज़ार किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा के साथ हिन्द महासागर के उत्तरी शीर्ष पर स्थित भारत का भू-राजनैतिक महत्व भी बहुत बढ़ जाता है और इसे एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करता है।