इद्दत

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इद्दत (अंग्रेज़ी:Iddah) अरबी शब्द है, शाब्दिक अर्थ 'गिनती' है। इस्लाम धर्म में तलाक़ या पति के मरने के पश्चात दूसरे विवाह के अंतराल या मुद्दत को कहते हैं, जिसके बीच वे अन्य पुरुष से विवाह नहीं कर सकतीं।

विवरण[संपादित करें]

मुसलमानों की मान्यता है कि यदि गर्भ हो तो इस अवधि में विस्वास के साथ उसका पता चल जाता है। [1]

इद्दत की किस्में[संपादित करें]

इस्लाम धर्म में इद्दत 7 प्रकार की होती हैं, उनका समय भी विभिन होता है।

क़ुरआन में इद्दत का उल्लेख[संपादित करें]

जब तुम लोग त़लाक़ दो अपनी पत्नियों को, तो उन्हें तलाक़ दो उनकी 'इद्दत' के लिए, और गणना करो 'इद्दत' की तथा डरो अपने पालनहार अल्लाह से और न निकालो उन्हें उनके घरों से और न वह स्वयं निकलें,(क़ुरआन, 65:1)[2]

हे ईमान वालो! जब तुम विवाह करो ईमान वालियों से, फिर तलाक़ दो उन्हें, इससे पूर्व कि हाथ लगाओ उनको, तो नहीं है तुम्हारे लिए उनपर कोई इद्दत,[1] जिसकी तुम गणना करो। तो तुम उन्हें कुछ लाभ पहुँचाओ और उन्हें विदा करो भलाई के साथ। (क़ुरआन, 33:49)

जिन स्त्रियों को तलाक़ दी गयी हो, वे तीन बार रजवती होने तक अपने आपको विवाह से रोके रखें। उनके लिए ह़लाल (वैध) नहीं है कि अल्लाह ने जो उनके गर्भाशयों में पैदा किया[1] है, उसे छुपायें, यदि वे अल्लाह तथा आख़िरत (परलोक) पर ईमान रखती हों,(क़ुरआन, 65:4)

तथा जो निराश[1] हो जाती हैं मासिक धर्म से तुम्हारी स्त्रियों में से, यदि तुम्हें संदेह हो तो उनकी निर्धारित अवधि तीन मास है तथा उनकी, जिन्हें मासिक धर्म न आता हो और गर्भवती स्त्रियों की निर्धारित अवधि ये है कि प्रसव हो जाये 

और तुममें से जो मर जायें और अपने पीछे पत्नियाँ छोड़ जायें, तो वे स्वयं को चार महीने दस दिन रोके रखें।,(क़ुरआन, 2:234)

हदीस में इद्दत का उल्लेख[संपादित करें]

हदीस (बुखारी 5320)

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "इद्दत"- प्रो. डॉक्टर जियाउर्रहमान आज़मी, कुरआन मजीद की इन्साइक्लोपीडिया, हिंदी संस्करण(2010), पृष्ठ 153
  2. Translation of the meanings Surah At-Talāq - Hindi translation - The Noble Qur'an Encyclopedia https://quranenc.com/en/browse/hindi_omari/65/1