सतत भिन्न

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 \sqrt 2 = 1 + \cfrac{1}{2 + \cfrac{1}{2 + \cfrac{1}{2+\,\cdots}}}
अनन्त सतत भिन्न के रूप में विस्तार का एक उदाहरण

गणित में निम्नलिखित प्रकार के व्यंजक (expression) को सतत भिन्न (continued fraction) कहते हैं।

x = a_0 + \cfrac{1}{a_1 + \cfrac{1}{a_2 + \cfrac{1}{a_3 + \cfrac{1}{\ddots\,}}}}

यहाँ, a0 एक पूर्णांक है तथान्य सभी संख्याएँ ai (i ≠ 0) धनात्मक पूर्णांक हैं। यदि उपरोक्त सतत भिन्न में अंश एवं हर का मान कुछ भी होने की स्वतंत्रता दे दी जाय (जैसे फलन होने की छूट) तो इसे 'सामान्यीकृत सतत भिन्न' कह सकते हैं।

अनुक्रम

उपयोग [संपादित करें]

  • कैलेण्डर सिद्धान्त - ग्रेगरी कैलेण्डर के किस वर्ष में ३६५ दिन और किस वर्ष में ३६६ दिन होंगे, ।इसको निर्धारित करने का आधार सतत भिन्न है।
  • अपरिमेयता (irrationality) का प्रमाण
  • आर्थोगोनल बहुपदों के वैशीष्टीकरण में

कुछ उपयोगी प्रमेय [संपादित करें]

इतिहास [संपादित करें]

प्राचीन काल से ही सतत भिन्नों का उपयोग किया जा रहा है।

आर्यभट ने प्रथम डिग्री तथा द्वितीय डिग्री वाले ।अनिर्धार्य समीकरणों के हल सतत भिन्न के रूप में ही दिये हैं। सोलहवीं शताब्दी में राफेल बम्बेली ने सतत भिन्न के रूप में वर्गमूल निकाला।

इन्हें भी देखें [संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]