लोकविभाग
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लोकविभाग विश्वरचना सम्बंधी एक जैन ग्रंथ है। इसकी रचना सर्वनन्दि नामक दिगम्बर जैन मुनि ने मूलतः प्रकृत में की थी जो अब अप्राप्य है। किन्तु बाद में सिंहसूरि ने इसका संस्कृत रूपानतर किया जो उपलब्ध है। इस ग्रंथ में शून्य और दाशमिक स्थानीय मान पद्धति का उल्लेख है जो विश्व में सर्व प्रथम इसी ग्रंथ में मिलता है।
बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]
- लोकविभाग (हिन्दी अर्थ सहित) (भारत का आंकिक पुस्तकालय)