हक्कानी अंजुमन

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हक्कानी अंजुमन
(Haqqani Anjuman)
संस्थापक हज़रत मौलाना सूफी मूफ्ती अज़ानगाछी साहेब (र०)[1][2][3]
प्रकार इस्लामिक अशासकीय संस्था(NGO), धार्मिक, सूफ़ीवाद
स्थापना वर्ष सन १८७६ ई०
कार्यालय बागमारी, कोलकाता
मुख्य लोग हज़रत मौलाना सूफी मूफ्ती अज़ानगाछी साहेब (र०) (संस्थापक)
विशेष ध्येय पूरी मानव जाति की सेवा करना और उन्हें सलाह देना.
तरीक़ा खुदा के सच्चे रास्ते का अनुसरण करना और प्रत्येक आदमी को एक बेहतर आदमी बनाना.
मालिक मौजूदा हुज़ूर किबला (र० )
आदर्श वाक्य बिना पैसा में दीन दुनिया का शांति व मंगल
वेबसाइट

http://haqqanianjuman.com,

http://www.haqqanianjuman.net
सन्दर्भ: हक्कानी अंजुमन किसी से दान या पैसा कभी स्विकार नहीं करता है। यह संस्था खुद की वक्फ संपत्तियों से अपने संसाधनों और आय से चलाया जाता है।

हक्कानी अंजुमन[4][5][6] (अंग्रेजी:Haqqani Anjuman ;बांग्ला: হাক্কানী আঞ্জুমান उर्दू: حقانی انجمن ; तमिल भाषा : ஹக்கானி அஞ்சுமான் ; तेलुगू: హక్కాని అంజుమన్ ; गुजराती : હક્કાની અંજુમન ;रूसी भाषा : Хаккани Анджуман ;चीनी भाषा: 哈卡尼安朱曼 कन्नड़: ಹಕ್ಕಾನಿ ಅಂಜುಮನ್ ; मलयालम: ഹഖാനി അൻജുമൻ) एक इस्लामी सूफी गैर सरकारी संगठन है और यह इस्लाम धर्म के दूसरे खलीफा हजरत उमर (र० ) के परिवार से 37 वे वंशज , हज़रत मौलाना सूफी मूफ्ती अज़ानगाछी साहेब (र०) द्वारा स्थापित है। यह सुफिवादी संगठन बिना किसी शुल्क के , पूरी मानव जाति की सेवा करने और उन्हें सही सलाह देने के साथ जुड़ा हुआ है। इस संगठन का केवल एक ही उद्देश्य है और वो है खुदा के सच्चे रास्ते का अनुसरण करना और प्रत्येक आदमी को एक बेहतर आदमी बनाना।

इस हक्कानी अंजुमन का शाब्दिक अर्थ है: -"सत्य का संगठन"

इस हक्कानी अंजुमन के समर्थक दुनिया भर में मौजूद हैं।

नजरिया[संपादित करें]

हजरत रसूल(PBUH) के हदीस के अनुसार, हक्कानी मिशनरीज पैगंबर (PBUH) के वारिस और उत्तराधिकारी हैं। लेकिन पैसे की लागत पर जो मिशनरी खुदा के रास्ते पर लाने के लिये लोगों को उपदेश देते हैं, वह पैगंबर (PBUH) के वारिस और उत्तराधिकारी होने के लिए अपील नहीं कर सकते हैं। कोई भी पैगंबर (PBUH) ने अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने के लिए कभी भी कोई पारिश्रमिक नहीं मांगा।
हज़रत मौलाना सुफी मुफ्ती अज़ानगाछी साहेब र०ए०

मजहबी कार्य[संपादित करें]

५ मुख्य शिक्षा[संपादित करें]

  1. ५ वक़्त का नमाज़ बिना कजा के।
  2. हक़्क़ानी वजीफा (सूरा अल-फातिहा , अल-इखलास, अल-फलक , अल-नास , हक़्क़ानी दुरुद शरीफ और मोनाजत का सम्मिलित रूप) का नियमित पाठ।
  3. हलाल रोजी रोटी पर ध्यान देना और जहाँ तक हो सके तक़वा परहेज़गारी करना।
  4. उर्स कुल मजलिस में सामिल होना।
  5. रसूली अमुली रत्न मुबारक का जियारत करना।

सालाना उर्स[संपादित करें]

बांग्ला कैलेंडर पौष महीने के अनुसार (बांग्ला: পৌষ) पहला शुक्रवार (बांग्ला: শুক্রবার) से अगले रविवार (बांग्ला: রবিবার) तक ,(यानी 10 दिन) के लिए हर साल सालाना उर्स कुल मजलिस (वार्षिक शांति प्रार्थना सभा) इस अंजुमन द्वारा आयोजित किया जाता है। यह सामान्य रूप से १८, बागमरी रोड, कोलकाता-५४ में अंग्रेजी कैलेंडर के दिसंबर के महीने में आता है। एशिया, अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और कई अन्य विभिन्न देशों के सभी मुरीद इस पवित्र दरबार में आते हैं। मुरीदों की कुल संख्या सभा में सामान्य उम्मीद से १ लाख से १.५ लाख के बीच हो जाती है।

विशेष कार्य[संपादित करें]

हक्कानी अंजुमन जाति, धर्म, रंग के फर्क के बिना जीवन की बुराइयों से मानवता के उद्धार के लिए प्रतिबद्ध है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

फेसबुक पेज :
https://www.facebook.com/haqqnianjuman?fref=ts

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. परिचय
  2. हक्कानी अंजुमन के संस्थापक की जयंती के अवसर पर द्वारा वार्षिक शांति प्रार्थना सभा के लिए कोलकाता पुलिस द्वारा नोटिस
  3. जीवनी
  4. हक्कानी अंजुमन के बारे में
  5. हक्कानी अंजुमन उर्स कुल मजलिस सभा आयोजित किया
  6. बांग्लादेश मे हक्कानी अंजुमन द्वरा उर्स कुल मजलिस सभा आयोजित किया गया

22°35′02″N 88°23′02″E / 22.583878°N 88.383777°E / 22.583878; 88.383777"

निर्देशांक: 22°35′02″N 88°23′02″E / 22.583878°N 88.383777°E / 22.583878; 88.383777