मैरवान प्रखण्ड (सीवान)

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सीवान, बिहार का एक प्रखण्ड
मैरवा, सीवान, बिहार, देश का नाम*6389  हिंदूसतान 1947 से। (भारत का तीन टुकड़ा होने के बाद से। ज्यादा जानकारी के लिए 8987669908 पर बात करे। / 9996104626 मोबाईल

मोबाईल नंबर 99961046/ भारत का तीन टुकड़ा होने के बाद से। देश का नाम*6389 हिंदू का ही डन26


🌐 🌐मैरवा का संक्षिप्त इतिहास 🌐 🌐

मैरवा, सिवान जिले का एक प्रमुख शहर है ।यह सिवान जिले से महज 15 किलोमीटर दूर है । मैरवा का इतिहास गौरवशाली रहा है ।

    यहां हमेशा हिंदू का सासन रहा है। यह हिंदू डा राजेन्द्  प्रसद कायस्थ रहते आए हैं। भारत का तीन टुकड़ा करने वाले गलत प्रचार करते हैं।पर प्रसिध्ध कवि "तुलसीदास" का भी आगमन हो चुका है ।  यहॉ तक कि सुनने में आया है कि यहाँ महाभारत के पांडवों का भी आगमन हो चुका है । 
          चुकीं मैरवा आज की अपेक्षा पहले उतना समृद्ध नहीं था ईसलिए इसके सटिक इतिहास की जानकारी को उजागर करना शायद संभव नहीं होगा ।
        हालॉकिं सुनने में यह भी आया है कि यहाँ चिनी  प्रसिध्ध इतिहासकार (ह्वेनसांग) भी आया था जिस समय मैरवा कोसल गणराज्य का हिस्सा था।  हो सकता है उसने यहॉ का उल्लेख अपने किताब में किया हो।
         मैरवा का सुप्रसिद्ध बाबा हरिराम ब्रम्हा मंदिर हमें मैरवा के इतिहास से कुछ अवगत कराता है ।
          बाबा हरि राम ब्रह्मा मंदिर, सिवान जिले के मैरवा शहर में झरही नदी के किनारे अवस्थित है।  यह 250  वर्षो से अधिक पुराना मंदिर है।  यह मंदिर 1724 में बनाया गया था। मंदिर के पास एक तालाब है जो कभी सूखा नहीं है लोगों का मानना है कि इस तालाब के पानी का स्रोत 7 कुओं  से है जो इस तालाब में हैं।
         हिन्दी के सुप्रसिद्ध महाकवि तुलसीदास जी का जब यहाँ आगमन हुआ तब मैरवा (कनकगढ़) के नाम से जाना जाता था।  कालांतर में यहाँ "राजा कनक सिंह" का शासन था ।उनका किला वहीं पर था जहॉं आज (हरिराम कॉलेज) है ।
   चुकीं बाबा हरिराम का जन्मस्थान बभनौली था तो जब तुलसीदास जी का यहॉ आगमन हुआ उस समय उन्होंने राजा को आदेश दिया कि आज से कनकगढ़ (मुक्तिधाम) के नाम से जाना जाएगा। बाद में यह मैरवा धाम के नाम से प्रसिध्ध हुआ ।