फ़ानूस

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रमजान की सजावट में फ़ानूस, काहिरा, मिस्र.

फ़ानूस (अरबे : فانوس) : अर्थात "दिया", "दीप", "चराग" इत्यादी। इस फ़ानूस को पुराने दौर में भी इस्तेमाल किया जाता था। आज इसे ''फ़ानूस-ए-रमदान'' या ''रमदान लान्टेर्न'' कहा जाता है।

व्युत्पत्ति[संपादित करें]

फ़ानूस शब्द, पुरानी मिसर (ईजिप्ट) की परंपरा से लिया गया है। इसके बराबर का ग्रीक शब्द "केंडल" है तो हिन्दी का शब्द दीप है। इस फ़ानूस को उम्मीद और अंधेरे में उजाले का प्रतीक मान जाता है। 

इतिहास[संपादित करें]

पुराना फ़ानूस, रमदान, मिस्र (ईजिप्ट)

फ़ानोस पारंपरिक उपयोग में घरों की सजावट के लिये रहा। इस का इतिहास फ़ातिमी खिलाफ़त के दौर तक जाता है। शुरूआत में इस फ़ानूस या लांटेर्न को खलीफ़ा अल-मुइज़्ज़ लिदीनिल्लाह के कैरो (क़ाहिरा) आने के मौक़े पर जो रमदान का महीना भी था, उनके स्वागत के लिये इस्तेमाल किया गया।[1] लैकिन यह फ़ानूस आज सभी मुस्लिम देशों में उपयोग होने लगा है। 

फ़ानूस

आज[संपादित करें]

आज फ़ानूस का उपयोग दुनिया भर के लोग करने लगे हैं। खास तौर पर एशियाई देशों में इसका विस्त्रुत रूप से उपयोग होने लगा है। इनका इस्तेमाल घरों, होटलों, माल्स, और दीगर प्रदेशों में देखा जासक्ता है। इन्हे कई डिजैनों में, रंगों में और रूप में बनाया जाता है। इनके बनाने में धातु और कांच का प्रयोग करते हैं। 

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 16 जुलाई 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 4 जुलाई 2016.