लैलतुल जायज़ा

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लैलतुल जायज़ा : लैलतुल जायज़ा या बरकतों वाली रात, ईद उल-फ़ित्र और ईद अल-अज़हा धा दोनों से पहले की रात है। रमज़ान के महीने के साथ इसका विशेष महत्व है और इस महीने में सभी उपवासों और अच्छे कार्यों के लिए पुरस्कार अर्जित करना है। माना जाता है कि यह रात मुसलमानों के लिए एक धन्य रात और प्रार्थना और दुआएं देने के लिए महान है। [1][2]

सुनन इब्न माजा में एक हदीस में उल्लेख है, पैग़म्बर मुहम्मद ने कहा है। [3]

जो कोई भी दो ईदों से पहले की रातों में (इबादत में) खड़ा होता है, वह अपने रब से पुरस्कार की उम्मीद करता है, उसका दिल नहीं मरेगा, जब कि दूसरे दिल मर जाते हैं।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Khan, Sami. "Night before Eid al-Fitr or 'Laylatul Jaiza': Best practices, prayers for 'night of reward'". मूल से 30 मई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 31 मई 2020.
  2. "Shawwal: What to Do On Eid Night, Eid Day, and During the Month - MuslimMatters.org". muslimmatters.org. मूल से 30 मई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 31 मई 2020.
  3. Zia-e-Taiba, I.T Department of. "zaietaiba -". www.ziaetaiba.com. मूल से 30 मई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 31 मई 2020.