बुध (ग्रह)
बुध ग्रह की तीन दृश्य रंगीन मानचित्रों द्वारा क्रमशः १००० नै.मी, ७०० नै.मी एवं ४३० नै.मी तरंगदैर्घ्य की मैसेन्जर अंतरिक्ष यान द्वारा भेजी गई छवि।
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उपनाम
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| विशेषण | मर्क्यूरियन, मर्क्यूरियल, बुधीय[1] | |||||||||
| युग J2000 | ||||||||||
| सूर्योच्य |
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| अपसौरिका |
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| अर्ध मुख्य अक्ष |
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| विकेन्द्रता | 0.205 630[3] | |||||||||
| परिक्रमण काल | ||||||||||
| संयुति काल | 115.88 d[3] | |||||||||
| औसत परिक्रमण गति | 47.87 km/s[3] | |||||||||
| माध्य कोणान्तर | 174.796° | |||||||||
| झुकाव |
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| आरोह पात का अनुलम्ब | 48.331° | |||||||||
| Argument of perihelion | 29.124° | |||||||||
| उपग्रह | कोई नहीं | |||||||||
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भौतिक विशेषताएँ
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| माध्य त्रिज्या | ||||||||||
| सपाटता | 0[6] | |||||||||
| तल-क्षेत्रफल |
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| आयतन |
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| द्रव्यमान |
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| माध्य घनत्व | 5.427 ग्रा/सें.मी3[5] | |||||||||
| विषुवतीय सतह गुरुत्वाकर्षण | ||||||||||
| पलायन वेग | 4.25 कि.मी/सें[5] | |||||||||
| नाक्षत्र घूर्णन काल |
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| विषुवतीय घूर्णन वेग | 10.892 km/h (3.026 m/s) | |||||||||
| अक्षीय नमन | 2.11′ ± 0.1′[7] | |||||||||
| उत्तरी ध्रुव दायां अधिरोहण |
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| उत्तरी ध्रुवअवनमन | 61.45°[3] | |||||||||
| अल्बेडो | ||||||||||
| सतह का तापमान 0°उ, 0°प [11] 85°उ, 0°प[11] |
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| स्पष्ट परिमाण | −2.6[9] to 5.7[3][10] | |||||||||
| कोणीय व्यास | 4.5" – 13"[3] | |||||||||
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वायु-मंडल[3]
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| सतह पर दाब | नाममात्र | |||||||||
| संघटन | ||||||||||
बुध सौर मंडल का सूर्य से सबसे निकट स्थित और आकार मे सबसे छोटा ग्रह है। ,यम(प्लूटो) को पहले सबसे छोटा ग्रह माना जाता था पर अब इसका वर्गीकरण बौना ग्रह के रूप मे किया जाता है। यह सूर्य की एक परिक्रमा करने मे ८८ दिन लगाता है। यह लोहे और जस्ते का बना हुआ हैं। यह अपने परिक्रमा पथ पर २९ मील प्रति क्षण की गति से चक्कार लगाता हैं।
बुध सूर्य के सबसे पास का ग्रह है और द्रव्यमान से आंठवे क्रमांक पर है। बुध व्यास से गैनिमीड और टाईटन चण्द्रमाओ से छोटा है लेकिन द्रव्यमान मे दूगना है।
कक्षा : ५७,९१०,००० किमी (०.३८ AU) सूर्य से
व्यास : ४८८० किमी
द्रव्यमान : ३.३०e२३ किग्रा
अनुक्रम |
[संपादित करें] नामकरण
ग्रहीय प्रणाली नामकरण के कार्य समूह ने बुध पर पांच घाटियों के लिए नए नामों को मंजूरी दी है: एंगकोर घाटी (Angkor Vallis), कैहोकीया घाटी (Cahokia Vallis), कैरल घाटी (Caral Vallis), पाएस्टम घाटी (Paestum Vallis), टिमगेड घाटी (Timgad Vallis)। [12]
[संपादित करें] इतिहास
रोमन मिथको के अनुसार बुध व्यापार, यात्रा और चोर्यकर्म का देवता , युनानी देवता हर्मीश का रोमन रूप , देवताओ का संदेशवाहक देवता है। इसे संदेशवाहक देवता का नाम इस कारण मिला क्योंकि यह ग्रह आकाश मे काफी तेजी से गमन करता है।
बुध को ईसा से ३ सहस्त्राब्दि पहले सूमेरीयन काल से जाना जाता रहा है। इसे कभी सूर्योदय का तारा , कभी सूर्यास्त का तारा कहा जाता रहा है। ग्रीक खगोल विज्ञानियो को ज्ञात था कि यह दो नाम एक ही ग्रह के हैं। हेराक्लीटस यहां तक मानता था कि बुध और शुक्र पृथ्वी की नही, सूर्य की परिक्रमा करते है। बुध पृथ्वी की तुलना मे सूर्य के समीप है इसलिये पृथ्वी से उसकी चन्द्रमा की तरह कलाये दिखायी देती है। गैलीलीयो की दूरबीन छोटी थी जिससे वे बुध की कलाये देख नही पाये लेकिन उन्होने शुक्र की कलायें देखी थी।
[संपादित करें] आधुनिक खगोल विज्ञान
अभी तक दो अंतरिक्ष यान मैरीनर १० तथा मैसेन्जर बुध ग्रह जा चूके है। मैरीनर- १० सन १९७४ तथा १९७५ के मध्य तीन बार इस ग्रह की यात्रा कर चूका है। बुध ग्रह की सतह के ४५% का नक्शा बनाया जा चुका है। (सूर्य के काफी समीप होने से हब्ब्ल दूरबीन उसके बाकी क्षेत्र का नक्शा नही बना सकती है।) मैसेन्जर यान २००४ मे नासा द्वारा प्रक्षेपित किया गया था। यह यान भविष्य मे २०११ मे बुध की परिक्रमा करेगा। इसके पहले जनवरी २००८ मे इस यान ने मैरीनर १० द्वारा न देखे गये क्षेत्र की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरे भेंजी थी।
बुध की कक्षा काफी ज्यादा विकेन्द्रीत(eccentric) है, इसकी सूर्य से दूरी ४६,०००,००० किमी(perihelion ) से ७०,०००,००० किमी(aphelion) तक रहती है। जब बुध सूर्य के नजदिक होता है तब उसकी गति काफी धिमी होती है। १९ वी शताब्दि मे खगोलशास्त्रीयो ने बुध की कक्षा का सावधानी से निरिक्षण किया था लेकिन न्युटन के नियमों के आधार पर वे बुध की कक्षा को समझ नही पा रहे थे। बुध की कक्षा न्युटन के नियमो का पालन नही करती है। निरिक्षित कक्षा और गणना की गयी कक्षा मे अंतर छोटा था लेकिन दशको तक परेशान करनेवाला था। पहले यह सोचा गया कि बुध की कक्षा के अंदर एक और ग्रह (वल्कन) हो सकता है जो बुध की कक्षा को प्रभवित कर रहा है। काफी निरिक्षण के बाद भी ऐसा कोई ग्रह नही पाया गया। इस रहस्य का हल काफी समय बाद आइंस्टाइन के साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत(General Theory of Relativity) ने दिया। बुध की कक्षा की सही गणना इस सिद्धांत के स्वीकरण की ओर पहला कदम था।
१९६२ तक यही सोचा जाता था कि बुध का एक दिन और वर्ष एक बराबर होते है जिससे वह अपना एक ही पक्ष सूर्य की ओर रखता है। यह उसी तरह था जिस तरह चन्द्रमा का एक ही पक्ष पृथ्वी की ओर रहता है। लेकिन डाप्लर सिद्धाण्त ने इसे गलत साबीत कर दिया। अब यह माना जाता है कि बुध के दो वर्ष मे तीन दिन होते है। अर्थात बुध सूर्य की दो परिक्रमा मे अपनी स्व्यं की तीन परिक्रमा करता है। बुध और मंडल मे अकेला पिंड है जिसका कक्षा/घुर्णन का अनुपात १:१ नही है।(वैसे बहुत सारे पिंडो मे ऐसा कोई अनुपात ही नही है।)
बुध की कक्षा मे सूर्य से दूरी मे परिवर्तन के तथा उसके कक्षा/घुर्णन के अनुपात का बुध की सतह पर कोई निरिक्षक विचित्र प्रभाव देखेगा। कुछ अक्षांसो पर निरिक्षक सूर्य को उदित होते हुये देखेगा और जैसे जैसे सूर्य क्षितिज से उपर शीर्षबिंदू तक आयेगा उसका आकार बढता जायेगा। इस शीर्षबिंदू पर आकर सूर्य रूक जायेगा और कुछ देर विपरित दिशा मे जायेगा और उसके बाद फिर रूकेगा और दिशा बदल कर आकार मे घटते हुये क्षितिज मे जाकर सूर्यास्त हो जायेगा। इस सारे समय मे तारे आकाश मे सूर्य से तिन गुना तेजी से जाते दिखायी देंगे। निरिक्षक बुध की सतह पर विभिन्न स्थानो अलग अलग लेकिन विचित्र सूर्य की गति को देखेगा।
बुध की सतह पर तापमान ९० डीग्री केल्वीन से ७०० डीग्री केल्वीन तक जाता है। शुक्र पर तापमान इससे गर्म है लेकिन स्थायी है।
[संपादित करें] आंतरिक संरचना
बुध की सतह पर चन्द्रमा के जैसे क्रेटर (गडढे) है। बुध की सतह स्थायी है, उस पर परतो मे कोई गतिविधी नही है। बुध का घनत्व ५.४३ ग्राम/सेमी है और यह पृथ्वी के बाद सबसे ज्यादा घनत्व वाला पिंड है। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ज्यादा है जो घनत्व को बड़ा देता है अन्यथा बुध का घनत्व सबसे ज्यादा होता। इससे ऐसा प्रतित होता है कि बुध का लौह केन्द्र पृथ्वी के लौह केन्द्र से बड़ा है, शायद बाकि सभी ग्रहो के के केन्द्र से भी ज्यादा। बुध की सतह पर सीलीकेट की एक बारीक पपड़ी है।बुध के केन्द्र मे १८०० किमी से १९०० कीमी त्रीज्या की एक लोहे की गुठली है। सीलीकेट की परत (पृथ्वी जैसे ही) ५०० किमी से ६०० किमी मोटी है। सतह की पपड़ी १०० से ३०० किमी की है। शायद लोहे का केन्द्र का कुछ भाग पिघला हुआ है।
[संपादित करें] वातावरण
बुध पर एक हल्का वातावरण है जो मुख्यतः सौर वायु से आये परमाणुओ से बना है। बुध बहुत गर्म है जिससे ये परमाणु उड़कर अंतरिक्ष मे चले जाते है। ये पृथ्वी और शुक्र के विपरीत है जिसका वातावरण स्थायी है, बुध का वातावरण नविन होते रहता है।
[संपादित करें] भूपटल
बुध की सतह पर गढ्ढे काफी गहरे है, कुछ सैकड़ो किमी लम्बे और तीन किमी तक गहरे है। ऐसा प्रतित होता है कि बुध की सतह लगभग ०.१ % संकुचित हुयी है।बुध की सतह पर कैलोरीस घाटी है जो लगभग १३०० किमी व्यास की है। यह चन्द्रमा के मारीया घाटी के जैसी है। शायद यह भी किसी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह के टकराने से बनी है। इन गड्डो के अलाबा बुध ग्रह मे कुछ सपाट पठार भी है जो शायद भूतकाल के ज्वालामुखिय गतिविधीयो से बने है।
[संपादित करें] जल की उपस्थिति
मैरीनर से प्राप्त आंकड़े बताते है कि बुध पर कुछ ज्वालामुखिय गतिविधीयां है लेकिन इसे प्रमाणित करने कुछ और आंकड़े चाहिये। आश्चर्यजनक रूप से बुध के उत्तरी ध्रुवो के गड्डो मे पानी की बर्फ के प्रमाण मीले है।
[संपादित करें] चुंबकिय क्षेत्र
बुध पर हल्का सा चुंबकिय क्षेत्र है जो पृथ्वी के चुंबकिय क्षेत्र की क्षमता का १% है।
[संपादित करें] चन्द्रमा
बुध का कोई भी ज्ञात चन्द्रमा नही है। बुध का चन्द्रमा शून्य है
[संपादित करें] खगोलिय निरिक्षण
बुध सामान्यतः नंगी आंखो से सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से ठीक पहले देखा जा सकता है। बुध सूर्य के काफी समीप होने से इसे देखना मुश्किल होता है।
[संपादित करें] सन्दर्भ
- ↑ गलती उद्घृत करें:
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<ref>का गलत प्रयोग;MallamaSkyनाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है। - ↑ गलती उद्घृत करें:
<ref>का गलत प्रयोग;ephemerisनाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है। - ↑ 11.0 11.1 Vasavada, Ashwin R.; Paige, David A.; Wood, Stephen E. (19 February 1999). "Near-Surface Temperatures on Mercury and the Moon and the Stability of Polar Ice Deposits". Icarus 141: 179–193. Bibcode 1999Icar..141..179V. doi:10.1006/icar.1999.6175. Figure 3 with the "TWO model"; Figure 5 for pole. http://www.gps.caltech.edu/classes/ge151/references/vasavada_et_al_1999.pdf.
- ↑ Planetary Surface Feature News, IAU
[संपादित करें] बाहरी कड़ियां
- बुध के बारे में (अंग्रेज़ी)
- Atlas of Mercury — NASA (अंग्रेज़ी)
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