ब्रह्माण्ड
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अंतरिक्ष या बाह्य अंतरिक्ष बृम्हांड के एसे स्थान कि ओर इशारा करता है जो कि आपेक्षिक रूप से रिक्त है एवं आकाशीय पिन्ड(ओं) के वायुमंडल के बाहर स्थित है। लोंगों मे प्रचलित बातों के विपरीत यह स्थान पूरी तरह रिक्त निर्वात नही है,बल्कि इसमे कुछ उपस्थित कण(ओं) का प्रभावी घनत्व बहूत कम होता है, वायुमंडल की कोई स्पष्ट सीमा नही है। ब्रह्माण्ड समुच्च्य विश्व का दूसरा नाम है। इसमे जीव और निर्जीव दोनों सम्मिलित हैं।
खगोल शब्द एक अति प्राचीन शब्द है, जिसकी उत्पत्ति अति प्राचीन कालीन भारतीय ऋषियों ने, अपने अन्तरिक्ष सम्बन्धि खोज के उपरान्त अपने निष्कर्ष के रूप में किया था। खगोल शब्द दो शब्द "ख + गोल" से मिलकर बना है। प्रथम शब्द है "ख" जिसका अर्थ अन्तरीक्ष से लिया जाता है और दूसरा शब्द है "गोल" जिसका अर्थ गोलाकार आकृति से लिया जाता है। अतः खगोल शब्द का सम्पूर्ण अर्थ हमारे समक्ष निष्कर्ष रूप में जो आता है वो ये है कि हमारा अन्तरीक्ष गोलाकार आकृति वाला है।
ब्रह्माण्ड शब्द का अर्थ खगोल से लिया जाता है। अगर हम भौतिक रूप से ब्रह्माण्ड को समझना चाहें तो हम ब्रह्माण्ड को सरल भाषा में ऐसे परिभाषित कर सकते हैं कि ब्रह्माण्ड वो है जिसके क्षेत्र में सम्पूर्ण ग्रह, उपग्रह्, तारे आदि स्थित हैं और इस क्षेत्र के अस्तित्व का मूल आधार वो सारे तत्व हैं, जिनके द्वारा ब्रह्माण्ड में स्थित सम्पूर्ण ग्रह, उपग्रह्, तारे आदि निर्मित हैं। ब्रह्माण्डीय क्षेत्र और सम्पूर्ण ग्रह, उपग्रह्, तारों आदि के मध्य मात्र इतना सा अन्तर है कि ब्रह्माडीय क्षेत्र, तत्वों के "मूल" रूप से निर्मित है जोकि स्वतन्त्र हैं, जबकि सम्पूर्ण ग्रह, उपग्रह्, तारे आदि इन्हीं तत्वों के किसी कारणवश आपस में जुडने और जुड़ कर टुटने से निर्मित हैं।