जल
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जल एक आम रासायनिक पदार्थ है, जो कि जीवन के सभी ज्ञात रूपों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है.ज्यादातर, जल शब्द का उपयोग केवल इसकी तरल अवस्था या रूप के लिए ही किया जाता है, लेकिन इस पदार्थ की एक ठोस अवस्था, बर्फ और एक गैसीय अवस्था जल वाष्प या भाप भी है. जल पृथ्वी की सतह के 71% भाग को ढकता है[1].पृथ्वी पर, यह अधिकांशतः महासागरों और अन्य बड़े जल निकायों में पाया जाता है, साथ ही 1.6 प्रतिशत जल भूमिगत जल स्रोतों में और 0.001 प्रतिशत जल वायु में वाष्प, बादल (वायु में निलम्बित ठोस और द्रव जल कणों से निर्मित), और अवक्षेपण के रूप में पाया जाता है.[2] सतही जल का 97% भाग लवणी समुद्र, 2.4% ग्लेशियर और ध्रुवीय बर्फ की टोपी, और 0.6% अन्य सतही जल स्रोत जैसे नदी, झील और तालाब हैं.
पृथ्वी के पानी की एक बहुत छोटी राशि जैविक निकायों और विनिर्मित उत्पादों के भीतर निहित है. शेष पानी बर्फ की टोपियों, ग्लेशियरों, जल स्रोतों, या झीलों में, पाया जाता है, कभी कभी धरती पर जीवन के लिए साफ पानी उपलब्ध कराता है.
जल लगातार वाष्पीकरण या वाष्पोत्सर्जन (जल वाष्प का उत्सर्जन), अवक्षेपण, औरप्रवाह के चक्र से गुजरता हुआ आम तौर पर समुद्र में पहुँच जाता है. हवाएं उसी दर से जल को भूमि के ऊपर प्रवाहित करती हें जिस दर से समुद्र में जल का प्रवाह होता है.
भूमि के ऊपर, वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन, भूमि पर अवक्षेपण में योगदान देते हैं.
स्वच्छ, ताजा पीने का पानी मानव और अन्य जीवन के लिए आवश्यक है. दुनिया के लगभग हर हिस्से में पिछले दशकों के दौरान सुरक्षित पेय जल की उपलब्धि में निरंतर सुधार हुआ है.[3][4] प्रति व्यक्ति सकल घरेलु उत्पाद और सुरक्षित जल की उपलब्धि के बीच स्पष्ट सम्बन्ध है.[5] हालांकि, कुछ पर्यवेक्षकों ने अनुमान लगाया है कि 2025 तक दुनिया की आधी से अधिक जनसंख्या जल पर आधारित जोखिम का सामना कर रही होगी.[6] जल दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह रासायनिक पदार्थों की अधिकाश किस्मों के लिए एक विलायक का काम करता है, और औद्योगिक शीतलन व परिवहन को सहज बनता है. ताजे जल का लगभग 70 प्रतिशत भाग कृषि के द्वारा प्रयुक्त किया जाता है.[7]
| जल | |
पृथ्वी की सतह पर प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला एक यौगिक. |
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| जानकारी और लक्षण | |
| सामान्य नाम | जल |
| IUPAC नाम | ऑक्सीडेन |
| वैकल्पिक नाम | पानी, डाई हाईड्रोजन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन हाइड्रोक्साइड, (अधिक) |
| आण्विक सूत्र | H2O |
| CAS संख्या | 7732-18-5 |
| InChI | InChI = 1/H2O/h1H2 |
| आण्विक द्रव्यमान | 18.0153 ग्राम / मोल |
| घनत्व और प्रावस्था | 0.998 ग्राम / सेमी ³ (20 °सेल्सियस, 1 वायुमंडलीय दाब पर तरल) 0.917 ग्राम/ सेमी ³ (0 °सेल्सियस, 1 वायुमंडलीय दाब पर ठोस) |
| गलनांक | 0 डिग्री सेल्सियस (273.15 केल्विन, 32° फारेनहाइट) |
| क्वथनांक | 99.974 डिग्री सेल्सियस (373.124 केल्विन, 211.95 ° फारेनहाइट) |
| विशिष्ट ऊष्मा | 4.184 जूल / (ग्राम.केल्विन) (20 ° पर तरल) 74.539 जूल / (मोल.केल्विन) (25 °क पर तरल) |
| पूरक आंकडों का पृष्ठ | |
| दावामुक्ति और संदर्भ | |
अनुक्रम |
रासायनिक और भौतिक गुण[संपादित करें]
जल एक रासायनिक पदार्थ है जिसका रासायनिक सूत्र H2O है: जल के एक अणु में दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं जो एक ऑक्सीजन परमाणु के साथ सह संयोजी बंध के द्वारा जुड़े रहते हैं.
जल प्रकृति में द्रव्य की तीनों सामान्य अवस्थाओं में पाया जाता है, और पृथ्वी पर भिन्न रूप ले सकता है: जल वाष्प और आकाश में बादल; समुद्री जल और ध्रुवीय समुद्रों में बर्फ की चट्टानें; ग्लेशियर और पर्वतों में नदियां; भूमि में भूमिगत जलस्रोत में तरल.
जल के प्रमुख रासायनिक और भौतिक गुण हैं:
- जल मानक ताप और दाब पर एक स्वाद रहित और गंध रहित द्रव है. पानी और बर्फ का रंग, आंतरिक रूप से, फीका और हल्का नीला होता है, यद्यपि जल अल्प मात्रा में रंगहीन हीं होता है. बर्फ भी रंगहीन प्रतीत होती है, और जल वाष्प भी एक गैस के रूप में अदृश्य है.[8]
- जल पारदर्शी होता है, और इसीलिए जलीय पौधे पानी के भीतर जीवित रह सकते हैं, क्योंकि सूर्य का प्रकाश उन तक पहुँच सकता है.
केवल प्रबल परा बैंगनी प्रकाश को थोडा बहुत अवशोषित कर लिया जाता है.
- चूंकि ऑक्सीजन की विद्युत ऋणात्मकता हाइड्रोजन से अधिक होती है, जल एक ध्रुवीय अणु है.
ऑक्सीजन में हल्का सा ऋणात्मक आवेश पाया जाता है, और हाइड्रोजन में हल्का सा धनात्मक आवेश पाया जाता है, इससे इस निकाय को प्रबल प्रभावी द्विध्रुवीय अवस्था प्राप्त होता है.
प्रत्येक अणु के भिन्न द्विध्रुवों के बीच अंतर्क्रिया एक शुद्ध आकर्षण बल उत्पन्न करती है, जो जल के उच्च पृष्ठ तनाव से सम्बंधित होता है.
- इस द्विध्रुवीय स्वभाव के कारण जल के अणु हाइड्रोजन बंध बनाने की प्रवृति रखते हैं, यह प्रवृति जल को संसजन की क्षमता देती है.[9]
- जल के अणुओं के बीच क्षीण अंतर्क्रिया (वांडरवॉल्स बल) के कारण जल का पृष्ठ तनाव उच्च होता है, क्योंकि यह ध्रुवीय है. पृष्ठ तनाव के कारण उत्पन्न प्रत्यास्थता केशिका लहर को जन्म देती है.
- जल की ध्रुवीय प्रवृति के कारण इसमें उच्च आसंजन क्षमता होती है.
सभी संवहनी पौधे, जैसे पेड़ इत्यादि इसी गुण पर निर्भर हैं.
- जल एक बहुत ही प्रबल विलायक है, इसे सार्वत्रिक विलायक कहा जाता है, यह कई प्रकार के पदार्थों को अपने में विलेय कर लेता है. वे पदार्थ जो पानी में अच्छी तरह से घुल जाते हैं, जैसे नमक, चीनी, अम्ल, क्षार, और कुछ गैसें: विशेष रूप से ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड (कार्बोनिकरण) "हाइड्रोफिलिक पदार्थ" (जल-स्नेही) कहलाते हैं, जबकि वे पदार्थ जो पानी में नहीं घुलते हैं, (जैसे वसा और तेल), "हाइड्रोफोबिक" (जल-विरोधी) पदार्थ कहलाते हैं.
- कोशिका के सभी मुख्य (प्रोटीन, DNA, और पोलीसैकेराइड) अवयव पानी में विलेयशील होते हैं.
- शुद्ध पानी की की विद्युत चालकता अल्प होती है, लेकिन बहुत कम मात्रा में आयनिक पदार्थ जैसे सोडियम क्लोराइड को विलेय कर देने पर विद्युत चालकता बहुत अधिक बढ़ जाती है.
- पानी (और अन्य सभी द्रवों) का क्वथनांक बैरोमीटर का दबाव से प्रत्यक्ष रूप से सम्बंधित है.
उदाहरण के लिए, माउंट एवरेस्ट की चोटी पर जल 68 °से. (154 °फ़ै.)[18] पर उबलता है और , समुद्र के स्तर पर लगभग 100 °से. (212 °फ़ै.)[19] पर उबलता है.
इसके विपरीत, भूउष्मा निकासों के पास समुद्र की गहराई में जल, का तापमान सैंकडों डिग्री तक पहुँच जाता है, और फिर भी तरल ही बना रहता है.
- सभी ज्ञात पदार्थों में जल की विशिष्ट उष्मा, अमोनिया के बाद दूसरे नंबर पर उच्चतम है, साथ ही इसकी वाष्पीकरण की उष्मा भी उच्च होती है (40.65 किलो जूल मोल−1), इन दोनों का कारण है जल के अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध.
ये दोनों असाधारण गुण, तापमान में बड़ी अस्थिरता को नियंत्रित करते हुए, पृथ्वी के जलवायु को सम बनाने में जल की मदद करते हैं.
- पानी का अधिकतम घनत्व 3.98 °से. (39.16 °फ़ै.)[20] पर होता है.[10] जल का घनत्व जम जाने पर, 9% के विस्तार के साथ कम हो जाता है. इसी वजह से एक असामान्य घटना होती है: बर्फ पानी के ऊपर तैरती है, इसीलिए जलीय जीव आंशिक रूप से जमे हुए तालाब के भीतर जीवित रहते हैं, क्योंकि तल पर तापमान लगभग 4 °से. (39 °फ़ै.)[23] के आसपास रहता है.
- जल कई तरल पदार्थों जैसे एथेनोल के साथ सभी अनुपातों में विलेयशील होता है, और एकमात्र समांगी तरल का निर्माण करता है. दूसरी ओर, पानी और अधिकांश तेल अविलेय होते हैं, और आम तौर पर शीर्ष से बढ़ते हुए घनत्व के अनुसार परतों का निर्माण करते हैं.
एक गैस के रूप में, जल वाष्प पूरी तरह से वायु में विलेयशील है.
- जल कई अन्य विलायकों के साथ एजोट्रोप बनता है.
- हाइड्रोजन के एक ऑक्साइड के रूप में, जल का निर्माण तब होता है जब हाइड्रोजन या हाइड्रोजन युक्त यौगिक जलते हैं अथवा ऑक्सीजन या ऑक्सीजन युक्त यौगिकों के साथ क्रिया करते हैं. जल एक ईंधन नहीं है, यह हाइड्रोजन के दहन का एक अंतिम उत्पाद है. विद्युत अपघटन या किसी अन्य विधि के द्वारा जल के हाइड्रोजन ओर ऑक्सीजन में विभाजन हेतु आवश्यक उर्जा की मात्रा, हाइड्रोजन ओर ऑक्सीजन के पुनर्संयोजन से मुक्त होने वाली ऊर्जा से अधिक होती है.[11]
- वे तत्व जो हाइड्रोजन से अधिक विद्युतीय धनात्मक होते हैं, जैसे लिथियम, सोडियम, कैल्शियम, पोटाशियम और सीजियम, वे जल के अणु से हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करके, हाइड्रोक्साइड बनाते हैं.
एक ज्वलनशील गैस होने के कारण, इस प्रकार मुक्त हुई हाइड्रोजन खतरनाक होती है, ओर इन तत्वों में से अधिक धनात्मक तत्वों के साथ जल की क्रिया बहुत अधिक विस्फोटक हो सकती है.
- विशाल ग्रहों यूरेनस और नेप्च्यून की बहुत अधिक गहराई में जल का एक बहुत अधिक दबाव धात्विक बन सकता है, जो इन ग्रहों के चुम्बकीय क्षेत्रों की पीढियों के लिए बहुत अधिक प्रभावी होता है.[तथ्य वांछित][26]
स्वाद और गंध[संपादित करें]
जल कई भिन्न पदार्थों को अपने में घोल सकता है, जिससे इसे कई प्रकार की स्वाद ओर गंध प्राप्त होती है. वास्तव में, मानव और अन्य जंतुओं ने, ऐसी संवेदनाओं को विकसित कर लिया है, जिससे वे इस बात का मूल्यांकन कर सकते हैं कि पानी पीने योग्य है या नहीं, यह उन्हें अधिक खारा या सड़ा हुआ पानी पीने से बचाता है.
मनुष्य ठंडे से गुनगुना पानी पीना पसंद करते हैं; ठंडे पानी में रोगाणुओं के पाए जाने की संभावना कम होती है. झरने के पानी में या मिनरल वाटर में पाया जाने वाला स्वाद इसमें घुले हुए लवणों के कारण होता है, क्योंकि शुद्ध H2O स्वाद रहित ओर गंध रहित होता है.
इस प्रकार, झरने के पानी या मिनरल वाटर में शुद्धता का सन्दर्भ विषकारी पदार्थों, प्रदूषकों, ओर सूक्ष्म रोगाणुओं के अभाव से है.
प्रकृति में जल का वितरण[संपादित करें]
जल ब्रह्मांड में[संपादित करें]
संभवतया ब्रह्माण्ड का अधिकांश पानी तारे के निर्माण के दौरान एक उप-उत्पाद के रूप में निर्मित होता है.
जब तारों का जन्म होता है, उस समय गैस ओर धूल का बाहर की ओर प्रबल प्रवाह होता है.
जब बाहर की ओर आते हुए ये पदार्थ अंततः आस पास की गैसों को प्रभावित करते हैं, प्रबल तरंगें गैस पर दाब डालती हैं ओर उसे गर्म कर देती हैं.
इस गर्म ओर सघन गैस में तेजी से जल का उत्पादन होता है.[12]
हमारी गेलेक्सी आकाश गंगा के भीतर अंतरातारकीय बादलों में भी जल का पता लगाया गया है. अंतरातारकीय बादल अंत में संघनित होकर हमारी तरह का सौर नाब्युला और सौर तंत्र बनाते हैं.
जल वाष्प निम्न पर मौजूद है:
- बुध - वातावरण में 3.4%, और पानी की एक बड़ी मात्रा बुध के बहिर्मंडल में.[13]
- शुक्र - वातावरण में 0.002%
- पृथ्वी- वातावरण में अल्प मात्रा में (मौसम के साथ बदलती रहती है)
- मंगल - वातावरण में 0.03%
- बृहस्पति - वातावरण में 0.0004%
- शनि - केवल बर्फों में ही.
- एनसेलाडस (शनि का उपग्रह) वातावरण में 91%
- बहिर्ग्रह जो HD 189733 b [14] ओर HD 209458 b के रूप में जाने जाते हैं.[15]
तरल पानी निम्न पर मौजूद है:
- पृथ्वी - सतह का 71%
- चन्द्रमा - पानी की थोड़ी सी मात्रा (2008 में) उस ज्वाला मुखी के बिन्दुओं में पायी गयी जिसे 1971 में अपोलो 15 चालक दल द्वारा चंद्रमा से धरती पर लाया गया.[16]
ठोस सबूत बताते हैं कि तरल जल शनि के उपग्रह एनसेलाडस ओर बृहस्पति के उपग्रह यूरोपा की सतह के ठीक नीचे उपस्थित हैं.
जल बर्फ निम्न पर मौजूद है:
- पृथ्वी- मुख्यतः बर्फ की चादर पर
- मंगल पर ध्रुवीय बर्फ की टोपियां
- टाइटन
- यूरोपा
- एनसेलाडस
- धूमकेतु और धूमकेतु स्रोत आबादियाँ (क्विपर बेल्ट और ऊर्ट बादल वस्तुएं).
जल बर्फ चंद्रमा, सेरेज और टेथ्स पर उपस्थित हो सकता है. जल और अन्य वाष्पशील पदार्थ संभवतया यूरेनस और नेप्च्यून की आंतरिक संरचना में पाए जाते हैं.
जल और आवास क्षेत्र[संपादित करें]
]] जल का तरल अवस्था में अस्तित्व और कुछ सीमा तक पृथ्वी पर इसका ठोस और गैसीय अवस्था में पाया जाना पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में महत्वपूर्ण है, जैसा कि हम जानते हैं.पृथ्वी सौर तंत्र के आवासीय क्षेत्र में स्थित है; यदि यह सूर्य से थोड़ी और दूर या नजदीक होती, (लगभग 5% या लगभग 8 लाख किलोमीटर), वे परिस्थितियां जो तीनों रूपों की उपस्थिति के लिए उत्तरदायी हैं, स्वतः ही उनके अस्तित्व की सम्भावना बहुत कम हो जाती.[17][18]
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसने एक वायुमंडल को अपने साथ जकडा हुआ है. वायुमंडल में जल वाष्प और कार्बन डाइऑक्साइड एक तापमान बफर (ग्रीनहाउस प्रभाव) उपलब्ध कराते हैं, जो अपेक्षाकृत स्थिर सतही तापमान को बनाये रखने में मदद करता है.
यदि पृथ्वी छोटी होती, पतला वायुमंडल तापमान को चरम सीमाओं पर पहुंचा देता, इस प्रकार ध्रुवीय बर्फ की चोटी के अलावा जल का संचय नहीं हो पाता. (जैसा कि मंगल पर है)
ऐसा प्रस्तावित किया गया है कि जीवन खुद ही उन परिस्थितियों का रख रखाव कर सकता है, जिसने इसके निरंतर अस्तित्व की अनुमति दी है.[तथ्य वांछित][40] पृथ्वी का सतही ताप, आने वाले सूर्य के विकिरणों के भिन्न स्तरों (आतपन) के बावजूद, भूगर्भिक समय के दौरान अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि, ग्रीन हाउस गैसों और सतही या वायुमंडलीय एल्बेडो के संयुक्त प्रभाव के माध्यम से एक गतिक प्रक्रिया पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करती है. इस प्रस्ताव को गेया परिकल्पना के रूप जाना जाता है.
एक ग्रह पर पानी की अवस्था परिवेश के दबाव पर निर्भर करती है, जिसका निर्धारण ग्रह के गुरुत्व के द्वारा होता है. यदि एक ग्रह पर्याप्त भारी है, तो इस पर उपथित जल बहुत अधिक उच्च ताप पर भी ठोस हो सकता है, क्योंकि गुरुत्व उच्च दाब उत्पन्न करेगा.
पृथ्वी पर जल की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न सिद्धांत हैं.
पृथ्वी पर जल[संपादित करें]
जल विज्ञान (हाइड्रोलोजी) वह विज्ञान है जिस में पूरी पृथ्वी पर जल की गतियों, इसके वितरण, ओर इसकी गुणवत्ता का अध्ययन किया जाता है. पानी के वितरण का अध्ययन हाइड्रोग्राफी कहलाता है. भूजल के वितरण और गतियों का अध्ययन जलभूविज्ञान (हाइड्रोज्योलोजी), ग्लेशियर के जल का अध्ययन ग्लेशियर विज्ञान (ग्लेशियोलोजी), अंतर्देशीय जल का अध्ययन लिम्नोलोजी, और समुद्रों के वितरण का अध्ययन ओशेनोग्राफी कहलाता है.
जल विज्ञान के साथ पारिस्थितिकी प्रक्रियाओं को पारिस्थितिक जल विज्ञान (इकोहाइड्रोलोजी) में अध्ययन किया जाता है.
ग्रह की सतह पर, इसके ऊपर, और इसके नीचे पाया जाने वाला जल सामूहिक रूप से जलमंडल (हाइड्रोस्फेयर) बनता है. पृथ्वी पर जल का लगभग आयतन (दुनिया की कुल जल आपूर्ति) है 1360000000[42] km3 (326000000[43] mi3). इस खंड में:[तथ्य वांछित]
- 1320000000[45] km3 (316900000[46] mi3 या 97.2%) महासागरों में है.
- 25000000[47] km3 (6000000[48] mi3 या 1.8%) ग्लेशियरों, बर्फ की टोपियों, और बर्फ की चादरों में है.
- 13000000[49] km3 (3000000[50] mi3 या 0.9%) भूजल है.
- 250000[51] km3 (60000[52] mi3 या 0.02%) झीलों, अंतर्देशीय समुद्रों और नदियों में ताजा जल है.
- 13000[53] km3 (3100[54] mi3 या 0.001%) किसी दिए गए समय पर वायुमंडलीय जल वाष्प है.
भूजल और ताजा जल मानव के लिए जल स्रोतों के रूप में उपयोगी या संभावित रूप से उपयोगी है.
तरल जल, जल निकायों जैसे महासागर, समुद्र, झील, नदी, नाला, नहर, तालाब या पोखर में पाया जाता है.
पृथ्वी पर पाया जाने वाला जल मुख्य रूप से समुद्री जल है. जल वातावरण में ठोस, द्रव और वाष्प अवस्था में भी उपस्थित है. यह भूजल स्रोतों में भूजल के रूप में भी पाया जाता है.
जल कई भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण है. भूजल चट्टानों में सर्वव्यापी है, और इस भूजल का दबाव फॉलटिंग के प्रतिरूप को प्रभावित करता है.
मेंटल में उपस्थित जल उस गलन के लिए उत्तरदायी है जो ज्वालामुखी उत्पन्न करता है. पृथ्वी की सतह पर, जल रासायनिक और भौतिक दोनों प्रकार की अपक्षय प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण है. पानी और, एक कम लेकिन महत्वपूर्ण सीमा तक बर्फ, बड़ी मात्रा में उस तलछट के स्थानान्तरण के लिए जिम्मेदार हैं, जो पृथ्वी की सतह पर उत्पन्न होती है.
स्थानांतरित तलछट का जमाव कई प्रकार की अवसादी चट्टानों का निर्माण करता है, जो पृथ्वी के इतिहास के भूगर्भिक रिकार्ड बनाती है.
जल चक्र[संपादित करें]
जल चक्र (जो वैज्ञानिक रूप से हाइड्रोलोजिक चक्र के रूप में जाना जाता है) का अर्थ है मृदा जल, सतही जल, भूजल, और पोधों, वायुमंडल के बीच, जल मंडल के भीतर, जल का निरंतर आदान प्रदान.
जल चक्र के दौरान जल इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में से होकर गुजरता है, इसमें निम्न लिखित स्थानान्तरण प्रक्रियाएं शामिल हैं:
- महासागरों व अन्य जल निकायों से वायु में जल का वाष्पीकरण और स्थलीय पौधों व जंतुओं से वायु में जल का वाष्पोत्सर्जन.
- वायु से संघनित होने वाली जल वाष्प से, अवक्षेपण और इसका पृथ्वी या महासागर में गिरना.
- भूमि से जल का प्रवाह जो आम तौर पर समुद्र में पहुंचता है.
महासागरों के ऊपर का अधिकांश जल वाष्प महासागर में ही पहुँच जाता है, लेकिन समुद्र में होने वाले जल प्रवाह की समान दर से हवाएं जल वाष्प को भूमि पर भी ले जाती हैं, यह दर लगभग 36 Tt प्रति वर्ष होती है.
भूमि के ऊपर वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन लगभग 71 Tt प्रति वर्ष का योगदान देते हैं.
भूमि के ऊपर 71 Tt प्रति वर्ष की दर पर होने वाले अवक्षेपण के भिन्न रूप हैं: सबसे आम वर्षा, बर्फ और ओले और साथ ही कोहरा और ओस भी कुछ योगदान देते हैं. हवा में संघनित जल भी सूर्य के प्रकाश को अपवर्तित करके इंद्रधनुष का निर्माण कर सकता है.
जल का प्रवाह जो अक्सर दो नदियों के बीच की उंची भूमि पर इकठ्ठा होता है, बह कर नदियों में चला जाता है. एक गणितीय मॉडल जो नदी या धारा प्रवाह को बताने के लिए और जल की गुणवत्ता के मानकों की गणना के लिए प्रयुक्त होता है, हाइड्रोलोजिकल स्थानान्तरण मॉडल कहलाता है. कुछ पानी को कृषि के लिए सिंचाई हेतु मोड़ दिया जाता है. नदियाँ और समुद्र यात्रा और व्यापार के लिए अवसर उपलब्ध करते हैं
कटाव के द्वारा, प्रवाह नदी घाटियां और डेल्टा बनाते हुए, वातावरण को आकार प्रदान करता है, जो आबादी केंद्र स्थापित करने के लिए उपजाऊ मृदा और समतल मैदान उपलब्ध कराते हैं. बाढ़ तब आती है जब एक भूमि का निचला क्षेत्र पानी से ढक जाता है. यह तब होता है जब एक नदी अपने किनारों से अतिप्रवाहित हो जाती है या समुद्र से बाढ़ आ जाती है. सूखा कुछ महीनों या वर्षों की स्थिति है जब एक क्षेत्र में जल की आपूर्ति में कमी आ जाती है. यह तब होता है जब एक क्षेत्र लगातार औसत से नीचे अवक्षेपण प्राप्त करता है.
ताजे जल का भंडारण[संपादित करें]
कुछ प्रवाहित होता हुआ जल कुछ अवधि के लिए संचित हो जाता है जैसे झीलों में. अधिक ऊंचाई पर सर्दी के दौरान, और सुदूर उत्तर और दक्षिण में,बर्फ की टोपियों, बर्फ पैक और ग्लेशियरों में बर्फ एकत्रित हो जाती है.
जल जमीन में से भी निस्यन्दित हो कर भूमिगत जल स्रोतोंमें चला जाता है. यह भूजल बाद में बसंत में अधिक विशेष रूप से गर्म झरनों और गीजरों में बह कर सतह पर वापिस आ जाता है.भूजल को कृत्रिम रूप से कुओं में भी निकाला जाता है. यह जल भंडारण महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वच्छ, ताजा पानी मानव और अन्य भूमि आधारित जीवन के लिए आवश्यक है. दुनिया के कई भागों में, यह कम आपूर्ति में है.
ज्वार[संपादित करें]
{0{1}}ज्वार पृथ्वी पर समुद्र की सतह का चक्रीय चढ़ाव और उतार है, जो समुद्र पर कार्य करने वाले चंद्रमा और सूर्य के ज्वारीय बल के कारण होता है. ज्वार समुद्र की गहराई में और जल निकायों के मुहानों में परिवर्तन लाते हैं, और दोलन तरंगें उत्पन्न करते हैं जो ज्वारीय धाराएँ कहलाती हैं. दी गयी स्थिति में उत्पन्न होने वाले परिवर्तित होते हुए ज्वार, पृथ्वी के सापेक्ष चंद्रमा और सूर्य की परिवर्तित होती हुई स्थिति का परिणाम हैं. साथ ही पृथ्वी का घूर्णन और स्थानीय बेथीमिट्री भी इसके कारक हैं.
समुंद्र के किनारे की पट्टी जो ज्वार के दौरान डूब जाती है, और भाटे के दौरान दिखाई देने लगती है, अंतर्ज्वारिय क्षेत्र, समुद्री ज्वार का एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक उत्पाद है.
जीवन पर प्रभाव[संपादित करें]
एक जैविक दृष्टि से, जल के कई विशिष्ट गुण हैं, जो जीवन के प्रसार के लिए महत्वपूर्ण हैं और इसे अन्य पदार्थों से अलग बनाते हैं.
यह इस भूमिका को निभाने के लिए कार्बनिक यौगिकों को कई प्रकार से अभिक्रिया करने की अनुमति देता है, जो अंततः प्रतिकृति में सहायक है. जीवन के सभी ज्ञात रूप जल पर निर्भर करते हैं. जल एक विलायक के रूप में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शरीर में कई पदार्थों को अपने में विलेय करता है और साथ ही शरीर में कई उपापचयी प्रक्रियाओं का एक आवश्यक भाग है. उपापचय उपचय और अपचय का कुल योग है. उपचय में अणु निर्जलीकरण (ऐसी एन्जाइमी रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से जिन्हें ऊर्जा की आवश्यकता होती है) के द्वारा क्रिया करके बड़े अणु बनाते हैं, (उदाहरण स्टार्च, प्रोटीन और ट्राईग्लीसराइड, ईंधन और जानकारी के संग्रह के लिए)
अपचय में, बड़े अणुओं से छोटे अणुओं के निर्माण के लिए उनके बंधों को तोड़ने हेतु जल का प्रयोग होता है (उदाहरण ग्लूकोस, वसा अम्ल और अमीनो अम्ल का उपयोग ऊर्जा उपयोग या अन्य उद्देश्य के लिए इंधन हेतू होता है) इस प्रकार से इन उपापचय की प्रक्रियाओं के लिए जल आवश्यक है केन्द्रीय भूमिका निभाता है. इसलिए, पानी के बिना, इन उपापचयी प्रक्रियाओं का अस्तित्व नहीं होगा, गैस अवशोषण, धूल संग्रह, आदि जैसी प्रक्रियाओं को अपने स्थान पर बनाये रखने के लिए हमें विचार करना होगा.
जल प्रकाश संश्लेषण और श्वसन की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण है. प्रकाशसंश्लेषी कोशिकाएं सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके जल के अणु को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ देती हैं. हाइड्रोजन, CO2 (वायु या पानी से अवशोषित की गयी) के साथ संयोजित होकर ग्लूकोज बनाती है और इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन भी मुक्त होती है. सभी जीवित कोशिकायें इस प्रकार के ईंधन का उपयोग करती हैं और सूर्य की ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए हाइड्रोजन और कार्बन का ऑक्सीकरण करती हैं, इस प्रक्रिया में जल और CO2 में परिवर्तन आता है (कोशिकीय श्वसन).
जल अम्ल-क्षार उदासीनीकरण और एंजाइम प्रक्रिया के लिए भी केन्द्रीय भूमिका निभाता है.
एक अम्ल, जो एक हाइड्रोजन आयन (H+, जो प्रोटोन है) दाता है, का उदासीनीकरण एक क्षार के द्वारा किया जा सकता है, जिसका हाइड्रोक्साइड आयन(OH−) प्रोटोन ग्राही है, और जल बनाता है.
जल को उदासीन माना जाता है, जिसका pH (हाइड्रोजन आयन सांद्रता का नकारात्मक लघुगणक) मान 7 है. अम्लों के pH मान 7 से कम होते हैं और क्षारों के pH मान 7 से अधिक होते हैं.
आमाश्य में पाया जाने वाला अम्ल (HCl) पाचन की प्रक्रिया में उपयोगी है. हालांकि, ग्रहणी पर इसके संक्षारक प्रभाव को अस्थायी रूप से एल्युमिनियम हाइड्रोक्साइड जैसे किसी क्षार के अंतर्ग्रहण के द्वरा उदासीन किया जा सकता है, इस उदासीनीकरण की प्रक्रिया में जल और लवण अमोनियम क्लोराइड बनता है.
मानव जैव विज्ञान जिसमें एंजाइम शामिल हैं, आम तौर पर 7.4 के एक जैविक उदासीन pH मान पर कार्य करते हैं.
उदाहरण के लिए इशरीकिया कोलाई की एक कोशिका में 70%, एक मानव शरीर में 60-70%, पौधे में 90% तक पानी होता है, और एक वयस्क जेलिफ़िश का शरीर 94-98% तक पानी से बना होता है.
जलीय जीवन रूप[संपादित करें]
पृथ्वी पर जल जीवन से भरा है. सबसे प्रारम्भिक जीवन रूप जल में ही उत्पन्न हुए; लगभग सभी मछलियां पानी में ही रहती हैं, और कई प्रकार के समुद्री जंतु हैं, जो पानी में ही रहते हैं जैसे डोलफिन्स और व्हेल्स.
कुछ प्रकार के जंतु जैसे उभयचर, अपने जीवन का कुछ भाग पानी में और कुछ भाग थल पर बिताते हैं.
पौधे जैसे केल्प और शैवाल पानी में वृद्धि करते हैं और कुछ अधोजलीय पारितंत्रों का आधार बनाते हैं.
प्लेंक्टन सामान्यतः समुद्री खाद्य श्रृंखला का आधार है.
जलीय जंतुओं को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करनी होती है. और वे ऐसा कई प्रकार से करते हैं.
मछली में फेफडों के स्थान पर गलफड़े होते हैं, हालांकि मछलियों की कुछ प्रजातियों जैसे फुफ्फुस मछली में दोनों होते हैं. समुद्री स्तनपायी जैसे डॉल्फ़िन, व्हेल्स, ओटर्स और सील को वायु में सांस लेने के लिए बार बार सतह पर आना पड़ता है. छोटे जीवन रूप अपनी त्वचा के माध्यम से ऑक्सीजन अवशोषित करने में सक्षम होते हैं.
मानव सभ्यता पर प्रभाव[संपादित करें]
सभ्यताओं का विकास ऐतिहासिक रूप से नदियों और प्रमुख जल निकायों के आस पास ही हुआ है; मेसोपोटामिया, की तथाकथित सभ्यता का उद्भव मुख्य नदियों टाइग्रिस और युफ्रेट्स के बीच हुआ; इजिप्ट का प्राचीन समाज पूरी तरह से नील नदी पर निर्भर था. बड़े महानगर जैसे रॉटरडैम, लन्दन, मॉन्ट्रियल, पेरिस, न्यू यार्क सिटी, ब्युनोज एयर्स, शंघाई, टोकियो, शिकागो, और होन्ग कोंग इसीलिए सफल हो पाए क्योंकि उन्हें पानी की उपलब्धि बहुत आसानी से होती थी, और इसके परिणामस्वरूप उनके व्यापार में विस्तार हुआ.
सुरक्षित जल बंदरगाहों से युक्त द्वीप जैसे सिंगापुर के विकास का भी यही कारण था. उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व जैसे स्थान जहां पानी अधिक दुर्लभ है, स्वच्छ पेय जल की उपलब्धि मानव के विकास में एक मुख्य कारक रही.
स्वास्थ्य और प्रदूषण[संपादित करें]
मानव उपभोग के लिए उपयुक्त जल पीने का पानी या पेय जल कहा जाता है. जल जो पीने योग्य नहीं है, उसे निस्यन्दन या आसवन ( इसे तब तक गर्म करना जब तक यह पूरी तरह से वाष्प में बदल जाये, और फिर इस वाष्प को इस तरह से संग्रहित करना कि अशुद्धियां पीछे छूट जाएं) या अन्य विधियों (रासायनिक या उष्मा उपचार जो जीवाणुओं को मार डालता है) के द्वारा पेय बनाया जा सकता है. कभी कभी शब्द सुरक्षित जल को अल्प गुणवत्ता देहलीज के पेय जल पर लागू किया जाता है (अर्थात इसका उपयोग प्रभावी रूप से उन मनुष्यों में पोषण के लिए किया जाता है जिनके पास जल के शुद्धिकरण की प्रक्रियाएं उपलब्ध नहीं हैं, और यह किसी प्रकार के नुकसान से बेहतर ही होगा).
जल जो कि पीने के लिए उपयुक्त नहीं है लेकिन यदि इसे तैरने या नहाने के लिए काम में लिए जाने पर मानव के लिए नुकसानदायक नहीं है,तो इसे पेय जल के अलावा कई नामों से पुकारा जाता है, और कभी कभी इसे सुरक्षित जल या "नहाने के लिए सुरक्षित जल" कहा जाता है.
क्लोरीन त्वचा और श्लेष्म झिल्ली को उत्तेजित करती है, इसका उपयोग पानी को पीने योग्य या नहाने योग्य बनाने के लिए किया जाता है.
इसका उपयोग उच्च तकनीकी है और आम तौर पर सरकारी नियमों को ध्यान में रखते हुए ही इसका उपयोग किया जाता है (प्रारूपिक रूप से पेय जल के लिए 1 भाग प्रति मिलियन (पीपीएम), और हालांकि 1-2 पीपीएम क्लोरीन नहाने के पानी के लिए अशुद्धियों के साथ अभिक्रिया नहीं करती है).
विशेष स्थानों में इस प्राकृतिक संसाधन का अभाव होता जा रहा है, और इसकी उपलब्धता एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय है. वर्तमान में, दुनिया भर के एक अरब लोग नियमित रूप से अस्वास्थ्यकर पानी पी रहे हैं. 2003 जी 8 एवियन शिखर सम्मेलन के दौरान अधिकांश देशों ने इस लक्ष्य को स्वीकार किया कि जिन लोगों के लिए सुरक्षित जल और पर्याप्त सफाई उपलब्ध नहीं है, उनकी संख्या को 2015 तक आधा करना होगा.[19] चाहे ये मुश्किल लक्ष्य पा लिया जाये, तो भी अनुमानतः आधा बिलियन लोग सुरक्षित जल प्राप्त नहीं कर पाएंगे, और एक बिलियन से अधिक लोगों को उपयुक्त सफाई उपलब्ध नहीं होगी.
जल की खराब गुणवत्ता और सफाई की बुरी अवस्था घातक होते हैं; प्रति वर्ष 5 मिलियन मौतें प्रदूषित पेय जल के कारण होती हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार सुरक्षित जल प्रतिवर्ष 1.4 मिलियन बच्चों को डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु से बचा सकता है.[20] जल बहरहाल, एक सीमित संसाधन नहीं है, लेकिन पेय जल की वह मात्रा जो चक्रीकरण के द्वारा अवक्षेपण में बदल जाती है, मानव उपभोग से कहीं अधिक है. इसलिए, पृथ्वी के भण्डार में जल की अपेक्षाकृत बहुत कम मात्रा है, (हमारे पेय जल की आपूर्ति का लगभग 1 प्रतिशत, जो लगभग 1 से 10 सालों में भूमिगत जल स्रोतों में फिर से पहुंचता है), जो अनव्यकरणीय संसाधन है, और पृथ्वी पर पाए जाने वाले जल की वास्तविक मात्रा की तुलना में पेय जल व सिंचाई के जल की आपूर्ति बहुत कम होती है, जल के अभाव से युक्त देश जल के आयात की प्राथमिक विधियों के रूप में माल के आयात का उपयोग करते हैं (ताकि स्थानीय मानव उपभोग के लिए पर्याप्त मात्रा बच जाये), चूँकि निर्माण प्रक्रिया में उत्पाद के द्रव्यमान का 10 से 100 गुना उपयोग होता है.
विकासशील दुनिया में, आज भी कुल अपशिष्ट व्यर्थ जल का 90 प्रतिशत बिना उपचार के स्थानीय नदियों और धाराओं में चला जाता है.[21] 50 देश, जो दुनिया की जनसंख्या का लगभग एक तिहाई भाग बनाते हैं, मध्यम या उच्च स्तरीय पानी की परेशानी को सहन कर रहे हैं. इनमें से 17 देश ऐसे हैं जो अपने प्राकृतिक जल चक्र से पुनः आने वाले जल की तुलना में अधिक जल का उपभोग कर लेते हैं.[22] यह दबाव न केवल ताजे जल के सतही स्रोतों जैसे नदियों और झीलों को प्रभावित करता है बल्कि भूजल संसाधनों में भी कमी लता है.
मानव उपयोग[संपादित करें]
कृषि[संपादित करें]
कृषि में जल का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग है सिंचाई, और सिंचाई ही सबसे महत्वपूर्ण घटक है जो पर्याप्त भोजन के उत्पादन के लिए उत्तरदायी है. कुछ विकासशील देशों में सिंचाई पानी का 90 प्रतिशत भाग काम में ले लेती है.[23]
जल एक वैज्ञानिक मानक के रूप में[संपादित करें]
7 अप्रैल 1795 को, फ्रांस में ग्राम को परिभाषित किया गया इस परिभाषा के अनुसार "ग्राम शुद्ध जल के उस आयतन के शुद्ध भार के बराबर है, जो पिघलती हुई बर्फ के ताप पर एक मीटर के सौवें भाग के घन के बराबर है." [24] हालाँकि प्रायोगिक उद्देश्य से, एक धात्विक सन्दर्भ मानक, किलोग्राम, जो एक हजार गुना अधिक भारी था, की आवश्यकता थी.
इसीलिए एक लीटर पानी के निश्चित द्रव्यमान को निर्धारित करने के लिए कार्य करने की आवश्यकता थी. इस तथ्य के बावजूद कि ग्राम की डिक्री परिभाषा ने जल को 0 °C पर विशिष्टीकृत किया-यह एक उच्चतम पुनः उत्पन्न किया जा सकने वाला तापमान है-वैज्ञानिकों ने मानक को पुनः परिभाषित करने को चुना और उच्चतम जल घनत्व के तापमान पर अपने मापन का प्रदर्शन किया, जिसे उस समय पर 4 °से. (39 °फ़ै.)[68] के रूप में मापा जाता था.[25]
SI (एसआई) प्रणाली का केल्विन तापमान पैमाना जल के त्रिक बिंदु पर आधारित है, जिसे ठीक 273.16 K or 0.01 °C के रूप में परिभाषित किया जाता है. यह पैमाना सेल्सियस तापमान पैमाने का अधिक सटीक विकास है, जिसे मूल रूप से जल से क्वथनांक (100 डिग्री सेल्सियस के लिए सेट) और गलनांक (0 डिग्री सेल्सियस के लिए सेट) के अनुसार परिभाषित किया जाता था.
प्राकृतिक जल में मुख्यतः समस्थापी हाइड्रोजन -1 और ऑक्सीजन-16 होते हैं, लेकिन भारी समस्थापियों की भी कम मात्रा पायी जाती है. जैसे हाइड्रोजन-2 (ड्यूटिरियम).
ड्यूटिरियम ऑक्साइड या भारी जल की मात्रा बहुत कम होती है, परन्तु यह फिर भी जल के गुणों को प्रभावित करता है.
नदियों और झीलों के जल में समुद्री जल की तुलना में कम ड्यूटिरियम होता है. इसलिए, मानक जल को वियना मानक मध्य महासागर जल विनिर्देश में परिभाषित किया जाता है.
पीने के लिए[संपादित करें]
मानव शरीर में 55% से 78% तक पानी हो सकता है, यह मात्रा शरीर के आकार पर निर्भर करती है.[26] ठीक प्रकार से कार्य करने के लिए, निर्जलीकरण से बचने के लिए शरीर को प्रतिदिन एक से सात लीटर पानी की आवश्यकता होती है; इसकी सटीक मात्रा शरीर के क्रिया स्तर, तापमान, नमी, और अन्य कारकों पर निर्भर करती है.
इसमें से अधिकांश मात्रा का अंतर्ग्रहण खाद्य या पेय पदार्थों के साथ किया जाता है, बजाय प्रत्यक्ष रूप से पीने के. यह स्पष्ट नहीं है कि स्वस्थ लोगों के लिए कितने जल अंतर्ग्रहण की जरुरत होती है, यद्यपि अधिकांश लोगों का मानना है कि प्रतिदिन कम से कम 6-7 गिलास पानी (लगभग 2 लीटर) शरीर में जल की समुचित मात्रा को बनाये रखने के लिए आवश्यक हैं.[27] चिकित्सा साहित्य जल के कम उपभोग, प्रारूपिक तौर पर एक औसत पुरुष के लिए 1 लीटर का पक्ष लेता है, इसके अतिरिक्त जल की वह मात्रा अतिरिक्त आवश्यक है जो गर्म मौसम या शारीरिक अभ्यास के दौरान शरीर से निकल जाती है.[28] जिन लोगों के स्वस्थ गुर्दे हैं, उनके लिए बहुत अधिक पानी पीना मुश्किल होता है, लेकिन (विशेष रूप से गर्म नम मौसम में और शारीरिक व्यायाम के दौरान) बहुत कम पानी पीना खतरनाक हो सकता है. लोग व्यायाम के दौरान जरुरत से ज्यादा पानी पी सकते हैं, हालांकि पानी का नशा (बहुत अधिक पानी पीना) भी घातक हो सकता है.
यह "तथ्य" कि एक व्यक्ति को प्रतिदिन 8 गिलास पानी पीना चाहिए, इसके पीछे कोई वैज्ञानिक स्रोत नहीं है.[29] और भी कुछ मिथक हैं जैसे पानी वजन घटाने और कब्ज में मदद करता है, इन्हें नकारा गया है.[30]
राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद के खाद्य एवं पोषण बोर्ड के द्वारा 1945 में पानी के अंतर्ग्रहण के लिए एक मूल सलाह दी गयी: " विभिन्न व्यक्तियों के लिए एक सामान्य मानक है भोजन की प्रत्येक कैलोरी के लिए 1 मिली लीटर".
इस मात्रा का अधिकांश भाग तैयार भोजन में ही होता है. "[31] संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद के द्वारा दी गयी नवीनतम आहार सन्दर्भ अंतर्ग्रहण रिपोर्ट में सलाह दी गयी (खाद्य स्रोतों सहित): पुरुषों के लिए कुल 3.7 लीटर और महिलाओं के लिए कुल 2.7 लीटर जल की जरुरत होती है.[32] विशेष रूप से, गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिलाओं को जल की सही मात्रा बनाये रखने के लिए अतिरिक्त तरल पदार्थों की जरुरत होती है. चिकित्सा संस्थान के अनुसार-औसतन एक महिला को 2.2 लीटर और एक पुरुष को 3.0 लीटर की जरुरत होती है- गर्भवती महिला के लिए 2.4 लीटर (10 कप) व स्तनपान करने वाली महिला को 3 लीटर (12 कप) पानी की आवश्यकता होती है चूँकि स्तनपान के दौरान तरल की बहुत अधिक मात्रा शरीर से निकल जाती है.[33] यह भी नोट किया गया है कि सामान्य रूप से, 20 प्रतिशत जल खाद्य पदार्थों के साथ ही शरीर में चला जाता है, और शेष पेय जल व पेय पदार्थों (जिसमें कैफीन युक्त पदार्थ भी शामिल हैं) के साथ शारीर में आता है. जल को कई रूपों में शरीर से उत्सर्जित किया जाता है; मूत्र तथा मल के साथ, पसीने के द्वारा, श्वास के दौरान जल वाष्प का उत्सर्जन.
शारीरिक काम और गर्मी में, जल की क्षति बढ़ जाती है, और दैनिक तरल की आवश्यकता बढ़ जाती है.
मानव को ऐसे जल की आवश्यकता होती है जिसमें बहुत अधिक अशुद्धियाँ न हों. आम अशुद्धियों में शामिल हैं धातु लवण और ऑक्साइड (जिसमें तांबा, लोहा, कैल्शियम और सीसा शामिल हैं) [34] और/या हानिकारक जीवाणु जैसे विब्रियो .
कुछ विलेय स्वीकार्य हैं और स्वाद बढ़ाने के लिए वांछनीय है तथा आवश्यक विद्युत अपघट्य भी उपलब्ध कराते हैं.[35]
एक मात्र सबसे बड़ा ताजे जल का स्रोत जो पीने के लिए उपयुक्त है वह है साइबेरिया में झील बैकल, जिसमें लवण और कैल्सियम की मात्रा बहुत कम है और इसलिए यह बहुत स्वच्छ है.
एक घोलने वाले कारक या विलायक के रूप में[संपादित करें]
घोलने की प्रक्रिया (या निलंबन) का उपयोग दैनिक चीजों को धोने के लिए किया जाता है, जैसे मानव शरीर, कपड़े, फर्श, कारें, खाद्य और पालतू जानवर. इसके अलावा, मानव अपशिष्ट को जल के द्वारा ही मलजल प्रणाली में ले जाया जाता है. औद्योगिक देशों में एक सफाई करने वाले विलायक के रूप में सबसे ज्यादा पानी का इस्तेमाल किया जाता है.
जल अपशिष्ट जल के रासायनिक प्रसंस्करण को सहज बना सकता है. एक जलीय वातावरण प्रदूषकों के अपघटन के लिए अनुकूल हो सकता है, क्योंकि इसकी एक समांगी विलयन बनाने की क्षमता होती है, जिसे पम्प किया जा सकता है और आसानी से उपचारित किया जा सकता है. एक विलयन में वायु या ऑक्सीजन को प्रवाहित करके वायवीय उपचार संभव है जो इसके अन्दर पदार्थ की क्रियाशीलता को कम करता है.
जल उन व्यर्थ पदार्थों के जैविक उपचार को भी सहज बनाता है, जो इसके अन्दर घुल चुके हैं.
सूक्ष्मजीव जो पानी में रहते हैं वे पानी घुले हुए व्यर्थ पदार्थों का उपभोग करके उन्हें कम प्रदूषक पदार्थों में अपघटित कर देते हैं.
रीडबेड और अवायवीय पाचक दोनों उस जैविक तंत्र के उदाहरण हैं जो विशेष रूप से उत्सर्जी पदार्थों के उपचार के लिए उपयुक्त है.
प्रारूपिक रूप से व्यर्थ पदार्थों के जैविक और रासायनिक उपचार से, हमेशा एक ठोस अवशेष या केक बचता है जो उपचार प्रक्रिया का परिणाम होता है.
इसके घटक अवयवों के अनुसार, इस 'केक' को सुखा कर जमीन पर उर्वरक के रूप में फैलाया जा सकता है, यदि इसमें लाभकारी गुण हों, या वैकल्पिक रूप से इसे एक लैंडफिल में दबाया जा सकता है या इसका निपटान किया जा सकता है.
एक उष्मा स्थानान्तरणीय तरल के रूप में[संपादित करें]
भिन्न उष्मा आदान प्रादान के तंत्रों में जल और भाप का उपयोग एक उष्मा स्थानान्तरणीय तरल के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है और एक शीतलक और उष्मक दोनों के रूप में इसकी उष्मा क्षमता भी उच्च होती है.
ठंडा पानी तो प्राकृतिक रूप से एक झील या समुद्र से भी उपलब्ध हो सकता है.संघनित होती हुई भाप विशेष रूप से प्रभावी ऊष्मा तरल है क्योंकि इसकी वाष्पीकरण की उष्मा उच्च होती है. इसका एक नुकसान यह है कि पानी और भाप थोड़े संक्षारक होते हैं. लगभग सभी विद्युत संयंत्रों में, जल शीतलक का काम करता है, जो वाष्पीकृत होकर भाप टरबाइन को चलाता है जिससे जनरेटर चलता है.
परमाणु उद्योग में जल को एक न्यूट्रॉन संदमक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. एक दबाव जल रिएक्टर में, जल एक शीतलक और एक संदमक दोनों का काम करता है. यह एक निष्क्रिय सुरक्षा उपाय उपलब्ध करता है, क्योंकि रिएक्टर से पानी को हटाने से भी परमाणु अभिक्रिया की दर कम हो जाती है.
आग बुझाना[संपादित करें]
पानी की उच्च वाष्पीकरण की उष्मा होती है, और यह अपेक्षाकृत निष्क्रिय है, इसी कारण से यह आग बुझाने वाला एक अच्छा तरल है.
पानी का वाष्पीकरण गर्मी को आग से दूर करता है. हालाँकि विद्युत उपकरणों की आग को बुझाने के लिए जल का उपयोग नहीं किया जा सकता है, क्योंकि अशुद्ध जल विद्युतीय रूप से चालक है, या तेल व कार्बनिक विलायकों की आग को भी जल से नहीं बुझाया जा सकता है, क्योंकि ये पानी पर तैरते हैं और जल का विस्फोट के साथ उबलना जलते हुए द्रव को फैला सकता है.
आग बुझाने में जल का उपयोग करते समय भाप विस्फोट के खतरों को भी ध्यान में रखना चाहिए, यह तब हो सकता है जब सीमित स्थान में बहुत गर्म आग पर या हाइड्रोजन विस्फोट में इसका इस्तेमाल किया जाता है, या ऐसे पदार्थ जो पानी के साथ क्रिया करते हैं, जैसे विशेष धातु और गर्म ग्रेफाईट, पानी को अपघटित कर देते हैं,और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं.
ऐसे विस्फोट की ताकत को चेरनोबिल आपदा के दौरान देखा गया, हालांकि आग बुझाने के लिए प्रयुक्त पानी के कारण ऐसा नहीं हुआ बल्कि रिएक्टर की अपनी शीतलन प्रणाली के पानी ने ऐसी स्थिति को उत्पन्न किया. भाप विस्फोट तब हुआ जब कोर के चरम सीमा तक गर्म हो जाने पर पानी भाप में बदला. एक हाइड्रोजन विस्फोट तब हुआ होगा जब भाप और गर्म जिर्कोनियम के बीच में क्रिया हुई होगी.
रासायनिक उपयोग[संपादित करें]
कार्बनिक अभिक्रियाएँ सामान्यतः पानी के साथ या एक उपयुक्त अम्ल क्षार या बफर के जलीय विलयन के साथ ही होती हैं.
जल आमतौर पर अकार्बनिक लवण को दूर करने में कारगर है. अकार्बनिक अभिक्रियाओं में, जल एक आम विलायक है. कार्बनिक अभिक्रियाओं में सामान्यतः इसे अभिक्रिया विलायक के रूप में काम में नहीं लिया जाता है, क्योंकि यह अभिकारकों को ठीक प्रकार से विलेय नहीं करता है, यह उभयधर्मी (अम्लीय और क्षारीय) और नाभिकस्नेही प्रकृति का होता है.
फिर भी, ये गुण कभी कभी वांछनीय होते हैं. इसके अलावा, जल के द्वार डील्स एल्डर अभिक्रिया के त्वरण को भी देखा गया है. अतिजटिल जल हाल ही में अनुसंधान का विषय बन गया है. ऑक्सीजन-संतृप्त अतिजटिल जल कुशलतापूर्वक कार्बनिक प्रदूषकों को स्फोटित कर देता है.
मनोरंजन[संपादित करें]
मनुष्य कई मनोरंजक प्रयोजनों के लिए, जल का उपयोग करता है, साथ ही व्यायाम और खेल के लिए भी पानी का उपयोग किया जाता है.इनमें से कुछ हैं तैराकी, वाटर स्केटिंग, नौकायन, सर्फिंग और गोताखोरी. इसके अलावा, कुछ खेल, जैसे आइस हॉकी और आइस स्केटिंग, बर्फ पर खेले जाते हैं. झील के किनारे, वाटर पार्क लोकप्रिय स्थान हैं जहां पर लोग आराम करने और मनोरंजन के उद्देश्य से जाते हैं. बहुत से लोगों को बहते हुए पानी की आवाज से भी शांति मिलती है. कुछ लोग एक्वेरियम या तालाब में मछलियां या अन्य जंतुओं को शो, मस्ती या साथ के लिए रखते हैं, मनुष्य बर्फ के खेलों के लिए भी पानी का उपयोग करता है, जैसे स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग, जिसके लिए पानी जमा हुआ होना चाहिए.
लोग लड़ खेल की लिए भी पानी का उपयोग कर सकते हैं जैसे स्नोबॉल, वाटर गन, और वाटर बेलून. वे सार्वजनिक या निजी सजावट के लिए फव्वारे बनाने में पानी का उपयोग कर सकते हैं.
जल उद्योग[संपादित करें]
जल उद्योग, घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए पेय जल और व्यर्थ जल सेवाएं (मलजल उपचार सहित) उपलब्ध कराता है.
जल आपूर्ति सुविधाओं में शामिल है, वर्षा जल संचय के लिए वाटर वेल्स सिस्टर्न, जल आपूर्ति नेटवर्क, जल शुद्धिकरण सुविधाएं, जल टैंक, जल टावर और जल की पाइपें जिसमें एक्वीडक्ट शामिल है. वायुमंडलीय जल जनरेटर का विकास किया जा रहा है.
पीने का पानी अक्सर भूमि में कृत्रिम बोरिंग, या कुएं से निकाल कर स्प्रिंग में इकठ्ठा किया जाता है. इस प्रकार से उचित स्थानों पर अधिक कुएं बनाना, जल उत्पादन को बढ़ाने का एक संभावी तरीका है. इसके लिए ऐसा माना जाता है कि भूमिगत जल स्रोत एक उपयुक्त प्रवाह उपलब्ध कराते हैं. अन्य जल स्रोत हैं, वर्षा का जल, नदी या झील का जल. इस सतही जल को हालांकि मानव उपभोग के लिए शुद्ध किया जाना चाहिए. इसमें अघुलित पदार्थों, घुलित पदार्थों, और हानिकारक सूक्ष्म जीवों को हटाना शामिल हो सकता है. लोकप्रिय तरीकों में से एक है रेत से छानना जिससे केवल अघुलित पदार्थ ही हटाये जाते हैं, जबकि क्लोरीनीकरण और उबालने से हानिकारक सूक्ष्म जीव मर जाते हैं.
आसवन ये तीनों कार्य करता है. अधिक उन्नत तकनीकें भी हैं जैसे विपरीत परासरण. उपस्थित महासागरों और समुद्रों के पानी का विलवणिकरण अधिक महंगा तरीका है जिसका उपयोग तटीय शुष्क जलवायु में किया जाता है.
पीने के पानी का वितरण नगर निगम जल प्रणाली के द्वारा या बोतलबंद पानी के रूप में किया जाता है. कई देशों की सरकारों के पास ऐसे कार्यक्रम हैं जिसके द्वारा जरूरतमंद लोगों को मुफ्त में जल वितरित किया जाता है. कई अन्य लोगों का तर्क है कि बाजार तंत्र और मुक्त उद्यम इस दुर्लभ संसाधन का प्रबंधन करने के लिए उत्तम हैं, और ये बांधों और जलाशयों के निर्माण तथा कुओं के बोरिंग के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराते हैं.
पीने के पानी का उपयोग केवल मानव उपभोग के लिए करके इसकी बर्बादी को कम करना एक अन्य विकल्प है. कुछ शहरों जैसे होंग कोंग में, समुद्री जल का उपयोग शौचालयों में फ्लशिंग के लिए किया जाता है ताकि ताजे जल के स्रोतों को संरक्षित किया जा सके.
जल की प्रदूषित करना जल का सबसे बड़ा दुरूपयोग हो सकता है; क्योंकि प्रदूषक पानी के अन्य उपयोगों को सीमित कर देता है, यह संसाधन की बर्बादी है, चाहे प्रदूषक कितना ही फायदेमंद हो.
प्रदूषण के अन्य प्रकार की तरह, यह बाजार की कीमत के मानक खाते में प्रवेश नहीं करता है, यह उन बाहरी कारकों से प्रभावित होता है जिसके लिए बाजार लेखा जोखा नहीं दे सकता है.
इस प्रकार दूसरे लोगों को जल प्रदूषण की कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि निजी फर्म के लाभ इस प्रदूषण के स्थानीय शिकार लोगों को पुनः वितरित नहीं होते हैं.
मानव के द्वारा उपभोग की जाने वाली फार्मास्युटिकल अक्सर जल मार्ग में पहुँच जाती हैं, इनका जलीय जीवन पर हानिकारक प्रभाव होता है, यदि वे जैविक रूप से संचित हो जाएं और ये जैव अपघटनी न हों.
व्यर्थ जल सुविधाएं हैं तूफानी नाले और व्यर्थ जल उपचार संयंत्र. सतह पर प्रवाहित होने वाले जल से प्रदूषण को हटाने का एक अन्य तरीका है बायोस्वेल.
औद्योगिक अनुप्रयोग[संपादित करें]
जल का उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है. पनबिजली या जल विद्युत वह विद्युत है जो जल शक्ति से प्राप्त की जाती है. जल विद्युत शक्ति बनाने के लिए ऊंचाई से पानी को एक जल टरबाइन पर गिराया जाता है, जो एक जनरेटर (जनित्र) से जुड़ा होता है.
जल विद्युत एक कम लागत का, गैर-प्रदूषक, और नव्यकरणीय ऊर्जा संसाधन है. ऊर्जा सूर्य द्वारा आपूर्ति की है. सूर्य की उष्मा जल को वाष्पीकृत कर देती है, जो ऊंचाई पर जाकर वर्षा के रूप में संघनित हो जाता है, जहां से यह नीचे बहता है.
दबाव युक्त पानी का प्रयोग वाटर ब्लास्टिंग और वाटर जेट कटर में किया जाता है.
इसके अलावा, बहुत अधिक दबाव की वाटर गन का उपयोग सटीक कटाई के लिए किया जाता है. यह बहुत अच्छी तरह से कार्य करता है, अपेक्षाकृत सुरक्षित है, और वातावरण के लिए हानिकारक भी नहीं है. इसका उपयोग अति उष्मन से बचाने के लिए मशीनरी को ठंडा करने में किया जाता है, या यह सॉ-ब्लेड्स को भी बहुत अधिक गर्म होने से बचाता है.
जल का उपयोग कई औद्योगिक प्रक्रियाओं और मशीनों जैसे भाप टरबाइन और हीट एक्सचेंजर में किया जाता है, इसके अलावा यह एक रासायनिक विलायक के रूप में भी प्रयुक्त होता है. औद्योगिक उपयोग से अनुपचारित जल का निर्वहन प्रदूषण है. प्रदूषण में शामिल है, निर्वहित विलेय (रासायनिक प्रदूषण) और निर्वहित शीतलक जल (ऊष्मा प्रदूषण).
उद्योग में कई अनुप्रयोगों के लिए शुद्ध जल की आवश्यकता होती है और जल की आपूर्ति और मुक्ति दोनों में कई प्रकार की शुद्धिकरण तकनीकों का उपयोग किया जाता है.
खाद्य प्रसंस्करण[संपादित करें]
जल खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एक खाद्य वैज्ञानिक के लिए महत्वपूर्ण है कि वह खाद्य प्रसंस्करण में जल की भूमिका को समझे, ताकि उनके उत्पादों की सफलता को सुनिश्चित किया जा सके.
पानी में पाए जाने वाले विलेय जैसे नमक और शर्करा जल के भौतिक गुणों को प्रभावित करते हैं.
जल का क्वथनांक और गलनांक विलेय से प्रभावित होता है. एक किलोग्राम जल में घुली हुई एक मोल सुक्रोज (शर्करा) जल के क्वथनांक को 0.51 °C बढा देती है, और एक किलोग्राम में घुला हुआ एक मोल नमक क्वथनांक को 1.02 °C बढाता है; समान रूप से, घुलित कणों की संख्या के बढ़ने से, जल का गलनांक कम हो जाता है.[36] जल में विलेय, जल क्रिया को भी प्रभावित करते हैं जो कई रासायनिक क्रियाओं और खाद्य में सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को प्रभावित करता है.[37] जल क्रिया को एक विलयन में जल के वाष्प दबाव और शुद्ध जल के वाष्प दबाव के अनुपात के द्वारा वर्णित किया जा सकता है.[36] जल में विलेय जल क्रिया को कम कर देते हैं. यह जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश जीवाणु वृद्धि जल क्रिया के अल्प स्तर पर रुक जाती है.[37] सूक्ष्म जीवों का विकास न केवल भोजन की सुरक्षा को प्रभावित करता है बल्कि यह संरक्षण और भोजन के शैल्फ जीवन को भी प्रभावित करता है.
पानी की कठोरता भी खाद्य प्रसंस्करण में एक महत्वपूर्ण कारक है. यह नाटकीय रूप से एक उत्पाद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है साथ ही
स्वच्छता में एक भूमिका निभाती है. पानी की कठोरता को इसके प्रति गेलन में हटाये जाने योग्य कैल्शियम कार्बोनेट लवण की मात्रा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है.
जल
की कठोरता का मापन ग्रेन्स में किया जाता है; 0.064 ग्राम कैल्शियम कार्बोनेट एक ग्रेन कठोरता के तुल्य है.[36] जल को मृदु माना जता है यदि इसमें 1 से 4 ग्रेन हों, मध्यम माना जाता है यदि इसमें
5 से 10 ग्रेन हों, और कठोर माना जाता है यदि इसमें 11 से 20 ग्रेन हों.[vague] [36] जल की कठोरता को एक रासायनिक आयन विनिमय प्रणाली का उपयोग करके बदला जा सकता है या उपचारित किया जा सकता है. जल की कठोरता इसके pH संतुलन को भी प्रभावित करती है जो खाद्य प्रसंस्करण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
उदाहरण के लिए, कठोर जल साफ़ पेय पदार्थों के सफल उत्पादन में बाधक है.
जल की कठोरता भी स्वच्छता को प्रभावित करती है; बढ़ती कठोरता के साथ, एक स्वास्थ्यकारी के रूप में इसके उपयोग के लिए प्रभाविता में कमी आती है.[36]
उबालना, भाप देना और लगातार उबालना खाना पकाने के लोकप्रिय तरीकें हैं, जिसके लिए भोजन को पानी में या इसकी गैसीय अवस्था भाप में डुबोना जरुरी होता है.
खाना पकाने में बर्तन धोने के लिए भी जल का उपयोग किया जाता है.
जल राजनीति और जल संकट[संपादित करें]
- इन्हें भी देखें: Water resources, Water law, एवं Water right
जल राजनीति वह राजनीति है जो जल से और जल संसाधनों से प्रभावित होती है. इस कारण से, दुनिया में जल एक रणनीतिय संसाधन है, और कई राजनितिक संघर्षों में एक महत्वपूर्ण तत्व है.
यह स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और जैव विविधता को नुकसान पहुंचाता है.
1.6 अरब लोगों को 1990 के बाद से सुरक्षित जल उपलब्ध हो गया है. http://mdgs.un.org/unsd/mdg/Resources/Static/Products/Progress2008/MDG_Report_2008_En.pdf#page=44. विकासशील देशों में उन लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है जिन्हें सुरक्षित जल उपलब्ध होता है. यह संख्या 1970 [3] में 30 प्रतिशत से बढ़कर 1990 में 71 प्रतिशत हो गयी, 2000 में 79 प्रतिशत और 2004 में 84 प्रतिशत.
इस प्रवृत्ति के जारी रहने का अनुमान है.[4] 2015 तक उन लोगों के अनुपात को आधा करना सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों में से एक होगा जिन्हें सुरक्षित पेय जल निरंतर उपलब्ध नहीं है. इस लक्ष्य की प्राप्ति का अनुमान है.
एक 2006 की संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया कि "सब के लिए पर्याप्त जल है" लेकिन इसकी उपलब्धि कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार से प्रभावित है.[38]
UNESCO(यूनेस्को) के विश्व जल आकलन कार्यक्रम से विश्व जल विकास रिपोर्ट (WWDR, 2003) बताती है कि अगले 20 सालों में, प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध जल की मात्रा 30 प्रतिशत कम हो जायेगी. वर्तमान में दुनिया के 40 प्रतिशत लोगों के पास न्यूनतम स्वच्छता के लिए अपर्याप्त जल है.
2000 में 2.2 मिलियन से अधिक लोग जल से होने वाली एक बीमारी (संदूषित पानी के उपभोग से सम्बंधित) या सूखे के कारण मर गए. 2004 में, यू के चेरिटी वाटर एड ने रिपोर्ट दी कि प्रत्येक 15 सेकंड में एक बच्चा जल से सम्बंधित आसानी से रोकी जा सकने वाली बीमारी के कारण मर जाता है; अक्सर इसका कारण मलजल डिज्पोजल का अभाव होता है; देखें शौचालय.
जल के संरक्षण से संबंधित संगठनों में शामिल हैं अंतरराष्ट्रीय जल एसोसिएशन (IWA), वाटर एड वाटर फर्स्ट, अमेरिकी जल संसाधन एसोसिएशन .जल संबंधी सम्मेलन हैं युनाईटेड नेशंस कन्वेंशन टू कोम्बेट डजरटीफिकेशन (UNCCD), जहाजों पर प्रदूषण को रोकने के लिए अन्तराष्ट्रीय सम्मलेन, समुद्र के नियमों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन और रामसर सम्मलेन. विश्व जल दिवस 22 मार्च को और विश्व महासागर दिवस 8 जून को मनाया जाता है.
किसी माल या सेवा के उत्पादन में प्रयुक्त जल आभासी जल कहलाता है.
धर्म, दर्शन और साहित्य[संपादित करें]
जल को अधिकंश धर्मों में एक शुद्धिकारक माना जाता है. जिन धर्मों में धार्मिक स्नान (अभिषेक) में विश्वास किया जाता है उनमें शामिल हैं ईसाई, हिन्दू, रास्ताफ़ेरियनवाद, इस्लाम, शिंटो, ताओवाद, और यहूदी. एक व्यक्ति का जल में विसर्जन (या आक्षेप या अफ्युजन), ईसाई धर्म का केन्द्रीय संस्कार है, (जहां यह बपतिस्मा कहलाता है); यह अन्य धर्मों का भी एक हिस्सा है, जिनमें शामिल हैं यहूदी (मिक्वाह ), और सिख (अमृत संस्कार ).
इसके अलावा, यहूदी और इस्लाम सहित बहुत से धर्मों में मृत शरीर के लिए शुद्ध जल में धार्मिक स्नान की परम्परा है.इस्लाम में, अधिकांश मामलों में स्वच्छ जल का उपयोग करते हुए शरीर के विशिष्ट भागों को धोने के बाद, पांच दैनिक प्रार्थनाएं की जा सकती हैं (वुडू ).
शिंटो में, लगभग सभी अनुष्ठानों में एक व्यक्ति या एक क्षेत्र को साफ़ करने के लिए जल का प्रयोग किया जाता है (उदाहरण मिसोगी के अनुष्ठान में) बाइबल के नए अंतर्राष्ट्रीय संस्करण में 442 बार जल का उल्लेख किया गया है और किंग जेम्स संस्करण में 363 बार जल का उल्लेख किया गया है: 2 पीटर 3:5(b) के अनुसार, "पृथ्वी का निर्माण जल में से और जल के द्वारा हुआ" (एनआईवी).
कुछ धर्मों धार्मिक उद्देश्यों के लिए विशेष रूप से तैयार किये गए जल का उपयोग किया जाता है, (ईसाई धर्म में पवित्र जल और सिख व हिन्दू धर्म में अमृत )
कई धर्म विशेष जल स्रोतों को पवित्र या कम से कम शुभ मानते हैं; उदाहरणों में शामिल हैं रोमन कैथोलिक में लॉर्ड्स, कुछ ईसाई चर्चों में जोर्डन नदी (कम से कम प्रतीक रूप में), इस्लाम में ज़म ज़म कुआं और हिन्दुओं में (और कई अन्यों में) गंगा नदी.
अक्सर ऐसा माना जाता है कि जल में आध्यात्मिक शक्तियों का वास है. केल्टिक पौराणिक कथाओं में, सुलिस थर्मल स्प्रिंग्स की स्थानीय देवी है, हिन्दू धर्म में गंगा को भी पवित्र देवी स्वरुप माना जाता है, जबकि सरस्वती को वेदों में देवी माना गया है.
इसके अलावा जल "पंच-तत्वों" (मूल पांच तत्व, अन्य हैं, अग्नि, धरती, आकाश, वायु) में से एक है. वैकल्पिक रूप से, देवता विशेष झरनों, नदियों और झीलों के संरक्षक हो सकते हैं: उदाहरण के लिए ग्रीक और रोमन पौराणिक कथाओं में, पेनेउस एक नदी का देवता था, जो तीन हजार ओशेनिड्स में से एक था.
इस्लाम में, जल न केवल जीवन देता है बल्कि प्रत्येक जीवन खुद जल से बना हुआ है: "वी मेड फ्रॉम वाटर एवरी लिविंग थिंग".[39]
प्राचीन यूनानी दार्शनिक एम्पिडोकल्स ने कहा कि जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु के साथ चार शास्त्रीय तत्वों में से एक है, और इसे य्लेम या ब्रह्मांड का मूल पदार्थ माना गया.
जल को ठंडा और नम माना जाता था. चार शारीरिक मनोदशाओं के सिद्धांत में, जल को कफ से सम्बंधित माना गया है. जल को पारंपरिक चीनी दर्शन में भी पृथ्वी, अग्नि, लकड़ी और धातु के साथ पांच तत्वों में से एक माना गया है.
जल शुद्धिकरण के एक प्रतीक के रूप में साहित्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उदाहरण में शामिल हैं एक नदी का जटिल महत्त्व, जो विलियम फाकनर के द्वारा एज आई ले डाइंग और हेमलेट में दी ड्राऊनिंग ऑफ़ ओफेलिया में दिया गया है.
शेरलोक होल्म्स के अनुसार "जल की एक बूंद से, एक तर्कशास्त्री एक अटलांटिक या एक नियाग्रा की संभावना का अनुमान लगा सकता है चाहे उसने इन दोनों को न देखा हो, न ही इनके बारे में सुना हो." [40]
जल को पारंपरिक और लोकप्रिय एशियाई दर्शन के कुछ भागों में एक रोल मॉडल माना जाता है. जेम्स लेगे का दाओ दी जिंग का 1891 का अनुवाद कहता है "सर्वोच्च उत्कृष्टता जल की तरह (की) ही है.
जल की उत्कृष्टता इस बात में प्रकट होती है
अपनी सभी चीजों को लाभ और अपने कब्जे में प्रकट होता है, इसके विपरीत () के लिए प्रयास के बिना, सभी पुरुषों जो नापसंद कम जगह है. इसलिए (इसका रास्ता) ताओ "के नजदीक है और "दुनिया में जल से अधिक कमजोर और नर्म कुछ नहीं है, और फिर भी चीजों पर हमला करने के लिए इसकी तरह कोई कठोर और प्रबल भी नहीं है;-क्योंकि कुछ भी (इतना प्रभावी) ऐसा नहीं है जिसके लिए इसे परिवर्तित किया जा सके."[41] आज ब्रूस ली व्यापक रूप से उद्धृत करते हैं "अपने मस्तिष्क को खाली करो, निराकार बनो.
निराकार, जल की तरह. यदि आप एक कप में जल डालें, यह कप बन जाता है. यदि आप जल को एक बोतल में डालें तो यह बोतल बन जाता है. यदि आप इसे एक चाय की केतली में डालें तो यह चाय की केतली बन जाती है. अब, जल प्रवाहित हो सकता है या कुचल सकता है. पानी बनो मेरे दोस्त." [42]
यह भी देखें[संपादित करें]
जल को कई नियमों और संदर्भों में वर्णित किया गया है:
- मौसम विज्ञान के अनुसार:
-
-- गति के अनुसार अवक्षेपण | | | | अवस्था के अनुसार अवक्षेपण -- संरेखन =शीर्ष
- ऊर्ध्वाधर (गिरता हुआ ) अवक्षेपण
- वर्षा
- बर्फ़ीलीवर्षा
- बूंदा बांदी
- बर्फ़ीली बूंदा बंदी
- बर्फ
- हिम गुटीकाएं
- हिमकण
- हिमपात
- जमी हुई वर्षा
- ओले
- बर्फ के क्रिस्टल
- क्षैतिज (स्थित) अवक्षेपण
संरेखन=शीर्ष
- तरल अवक्षेपण
- वर्षा
- बर्फ़ीली वर्षा
- बूंदा बांदी
- बर्फ़ीली बूंदा बांदी
- ओस
- ठोस अवक्षेपण
- बर्फ
- हिम गुटिकायें
- हिमकण
- हिमपात
- जमी हुई वर्षा
- ओले
- बर्फ के क्रिस्टल
- निहार
- वायुमंडलीय बर्फ के टुकड़े
- ग्लेज़ आइस
- मिश्रित अवक्षेपण
- लगभग 0 डिग्री सेल्सियस तापमान में
) -
- उड़ते हुए कण
- ऊपर उठते हुए कण (हवा से ऊपर उठते हुए)
- समुद्र की लहरों की बौछार
- उभरी हुई बर्फ
- उपस्थिति के अनुसार
- भूजल
- द्रवित जल
- आकाशीय जल
- जन्मज जल
- ताजा जल
- सतही जल
- मिनरल वाटर या खनिज जल - जिसमें अधिक खनिज शामिल हैं.
- खारा जल
- बेकार हो गया जल या मृत जल- एक अजीब घटना जो तब होती है जब ताजे या खारे जल की एक परत घने लावणी जल के शीर्ष पर आ जाती है, और दोनों परतें मिश्रित नहीं होती हैं. यह जहाज यात्रा के लिए खतरनाक है.
- समुद्री जल
- ब्राइन या नमक का जल में संतृप्त विलयन
- उपयोग के अनुसार
- नल का जल
- बोतलबंद जल
- पीने का पानी या पेय जल - जो रोज पीने के लिए उपयोगी है, सड़ता नहीं है, इसमें संतुलित लवण होते हैं, और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है. (नीचे देखें)
- शुद्ध पानी, प्रयोगशाला-श्रेणी, विश्लेषणात्मक श्रेणी या अभिकर्मक श्रेणी का पानी - जो विज्ञान या अभियांत्रिकी में विशिष्ट उपयोगों के लिए शुद्ध कर दिया गया है. अक्सर मोटे तौर पर इसे प्रकार I, प्रकार II, या प्रकार III, में वर्गीकृत किया जाता है, जल की इस श्रेणी में शामिल है, लेकिन यह निम्न तक सीमित नहीं है:
- अन्य लक्षणों के अनुसार
- मृदु जल - इसमें कम खनिज होते हैं.
- कठोर जल - भूमिगत से, अधिक खनिज शामिल होते हैं.
- आसुत जल, दोहरा आसुत जल, विआयनीकृत जल,- इसमें खनिज नहीं होते हैं.
- क्रिस्टलीकरण का जल - क्रिस्टलीय संरचना में उपस्थित जल
- हाइड्रेट्स - अन्य रासायनिक पदार्थों के साथ बंधित जल
- भारी जल - हाइड्रोजन की भारी परमाणुओं - ड्यूटिरियम से बना हुआ. यह प्रकृति में सामान्य पानी में बहुत कम सांद्रता में पाया जाता है. पहले परमाणु रिएक्टर के निर्माण में इसका प्रयोग किया गया.
- ट्राईटियम युक्त जल
- सूक्ष्म जीव विज्ञान के अनुसार
- धर्म के अनुसार
अन्य विषय[संपादित करें]
संदर्भ[संपादित करें]
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इसके अतिरिक्त पठन[संपादित करें]
water के बारे में, विकिपीडिया के बन्धुप्रकल्पों पर और जाने: 
शब्दकोषीय परिभाषाएं 
पाठ्य पुस्तकें 
उद्धरण 
मुक्त स्त्रोत 
चित्र एवं मीडिया 
समाचार कथाएं 
ज्ञान साधन - John M. DeMan (1999). Principles of Food Chemistry 3rd Edition.
- Vickie A. Vaclavik and Elizabeth W. Christian (2003). Essentials of Food Science 2nd Edition.
- ओ ऐ जोन्स, जे एन लेस्टर और एन वौल्वौलिस, फार्मास्यूटिकल्स: पीने के पानी के लिए एक खतरा? ट्रेंड्ज इन बायोटेकनोलोजी 23(4): 163, 2005
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बाहरी संबंध[संपादित करें]
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