ठोस

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ठोस (solid) पदार्थ की एक अवस्था है, जिसकी पहचान पदार्थ की संरचनात्मक दृढ़ता और विकृति (आकार, आयतन और स्वरूप में परिवर्तन) के प्रति प्रत्यक्ष अवरोध के गुण के आधार पर की जाती है। ठोस पदार्थों में उच्च यंग मापांक और अपरूपता मापांक होते है। इसके विपरीत, ज्यादातर तरल पदार्थ निम्न अपरूपता मापांक वाले होते हैं और श्यानता का प्रदर्शन करते हैं. भौतिक विज्ञान की जिस शाखा में ठोस का अध्ययन करते हैं, उसे ठोस-अवस्था भौतिकी कहते हैं। पदार्थ विज्ञान में ठोस पदार्थों के भौतिक और रासायनिक गुणों और उनके अनुप्रयोग का अध्ययन करते हैं। ठोस-अवस्था रसायन में पदार्थों के संश्लेषण, उनकी पहचान और रासायनिक संघटन का अध्ययन किया जाता है।

ठोस के अभिलक्षण[संपादित करें]

ठोस अवस्था के अभिलक्षणिक गुणधर्म निन्नलिखित हैं।

  • वे निश्चित द्रव्यमान, आयतन एवं आकार के होते हैं ।
  • अंतराआण्विक दूरियाँ लघु होती हैं ।
  • अंतराआण्विक बल प्रबल होते हैं ।
  • उनके अवयवी कणों (परमाणुओं, अणुओं अथवा आयनों ) की स्थितियाँ निश्चित होती हैं और यह कण केवल अपनी माध्य स्थितियों के चारों ओर दोलन कर सकते हैं ।
  • वे असंपीड्य और कठोर होते हैं। [1]

ठोस के प्रकार[संपादित करें]

ठोस का वर्गीकरण अनेक आधारों पर किया गया है।

अवयवी कणों की व्यवस्था में उपस्थित क्रम की प्रकृति के आधार पर[संपादित करें]

ठोसों को उनके अवयवी कणों की व्यवस्था में उपस्थित क्रम की प्रकृति के आधार पर क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय में वर्गीकृत किया जाता है।

क्रिस्टलीय[संपादित करें]

देखें मुख्य लेख क्रिस्टलीय ठोस

क्रिस्टलीय ठोस साधारणत ः लघु क्रिस्टलों की अत्यधिक संख्या से बना होता है, उनमें प्रत्येक का निश्चित ज्यामितिय आकार होता है। क्रिस्टल में परमागुओं, अगुओं अथवा आयनों का क्रम सुव्यवस्थित होता है । इसमें दीर्घ परासी व्यवस्था होती है अर्थात् कणों की व्यवस्थाका खास पैटर्न होता है जिसकी निस्चित क्रम से पुनरावृत्ति होती है। क्रिस्टलीय ठोसो का गलनांक निश्चित होता है। क्रिस्टलीय ठोस विषमदैशिक प्रकृति के होते हैं अर्थात् उनके कुछ भौतिक गुण जैसे विद्युतीय प्रतिरोधकता और अपवर्तनांक एक ही क्रिस्टल में भिन-भिन दिशाओं में मापने पर भिन-भिन मान प्रदर्शित करते हैं। यह अलग- अलग दिशाओं में कणों की भिन व्यवस्था से उत्पन्न होता है । भिन-भिन दिशाओं में कणों की व्यवस्था अलग होने पर एक ही भौतिक गुण का मान प्रत्येक दिशा में भिन पाया जाता है। [2] उदाहरण- सोडियम क्लोराइड, क्वार्ट्ज आदि। अधिकतर ठोस पदार्थ क्रिस्टलीय प्रकृति के होते हैं। उदाहरण के लिए सभी धात्विक तत्व; जैसे- लोहा, ताँबा और चाँदी; अधात्विक तत्व; जैसे-सल्फर, फॉसफोरस और आयोडीन एवं यौगिक जैसे सोडियम क्लोराइड, जिंक सल्पाइड और नेप्थेलीन क्रिस्टलीय ठोस हैं। क्रिस्टलीय ठोसों को उनमें परिचालित अंतराआण्विक बलों की प्रकृति के आधार पर चार संवर्गो में वर्गीकृत किया जा सकता है- आण्विक, आयनिक, धात्विक और सहसंयोजक। [3]

अक्रिस्टलीय[संपादित करें]

अक्रिस्टलीय ठोस असमान आकृति के कणों से बने होते हैं । इन ठोसों में अवयवी कणों परमागुओं, अणुओं अथवा आयनों की व्यवस्था केवल लघु परासी होती है। इस व्यवस्था में नियमित और आवर्ती पैटर्न केवल अल्प दूरियों तक देखा जाता है । अक्रिस्टलीय ठोसों की संरचना द्रवों के सदृश होती हैं । अक्रिस्टलीय ठोस ताप के एक निश्चित परास पर नरम हो जाते हैं और गलाकर साँचे में ढाले जा सकते हैं और इनसे विभिन आकृतियाँ बनाई जा सकती हैं । गर्म करने पर किसी एक तापमान पर वे क्रिस्टलीय बन जाते हैं । अक्रिस्टलीय ठोसों की प्रकृति समदैशिक होती है क्योंकि भिन-भिन दिशाओं में उनमें दीर्घ परासी व्यवस्था नहीं होती और सभी दिशाओं में अनियमित विन्यास होता है । अत कणों की भिन्न-भिन्न कोण से भी भौतिक गुण का मान समान होता है। [4] उदाहरण - काँच, रबर, प्लास्टिक आदि। अक्रिस्टलीय ठोसों के हमारे दैनिक जीवन में अनेक अनुप्रयोग हैं । अक्रिस्टलीय सिलिकन सूर्य के प्रकाश का विद्युत में रूपांतरण करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

बहुलक[संपादित करें]

मृत्कला[संपादित करें]

मिश्रण[संपादित करें]

जैव-पदार्थ[संपादित करें]

अर्द्धचालक[संपादित करें]

रसायनिक विश्लेषण[संपादित करें]

ठोस का रसायन[संपादित करें]

अकार्बनिक[संपादित करें]

कार्बनिक[संपादित करें]

ठोस-तरल रसायन[संपादित करें]

सुक्ष्म-तकनीक[संपादित करें]

अनुप्रयोग[संपादित करें]

भौतिक गुण[संपादित करें]

इलेक्टॉनिक[संपादित करें]

ऑप्टिकल[संपादित करें]

डाय-इलेक्ट्रिक[संपादित करें]

यांत्रिकी[संपादित करें]

उष्मीय-यांत्रिकी[संपादित करें]

विद्युत-यांत्रिकी[संपादित करें]

उष्मीय-वैद्युतिकी[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. रसायनशास्त्र, भाग-१, (कक्षा १२) , एनसीईआरटी, नई दिल्ली, पृष्ठ-२
  2. रसायनशास्त्र, भाग-१, (कक्षा १२) , एनसीईआरटी, नई दिल्ली, पृष्ठ-२-३
  3. रसायनशास्त्र, भाग-१, (कक्षा १२) , एनसीईआरटी, नई दिल्ली, पृष्ठ-४
  4. रसायनशास्त्र, भाग-१, (कक्षा १२) , एनसीईआरटी, नई दिल्ली, पृष्ठ-२-३

बाहरी कड़ी[संपादित करें]