पलायन वेग
भौतिकी में किसी वस्तु (जैसे की पृथ्वी) का पलायन वेग उस गति को कहते हैं जिसपर यदि कोई दूसरी वस्तु (जैसे की कोई रॉकेट) पहली वस्तु से रवाना हो तो उसके गुरुत्वाकर्षण की जकड़ से बहार पहुँच सकती है। यदि दूसरी वस्तु की गति पलायन वेग से कम हो तो वह या तो पहली वस्तु के गुरुत्वाकर्षक क्षेत्र में ही रहती है - या तो वह वापस आकर पहली वस्तु पर गिर जाती है या फिर उसके गुरुत्वाकर्षण में क़ैद होकर किसी कक्षा में उसकी परिक्रमा करने लगती है।
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अन्य भाषाओँ में [संपादित करें]
"पलायन वेग" को अंग्रेज़ी में "ऍस्केप विलॉसिटि" कहते हैं और उर्दू-फ़ारसी में "फ़रारी रफ़्तार" या "फ़रारी सिम्तार" (فراری سمتار) कहते हैं।
कुछ वस्तुओं का पलायन वेग [संपादित करें]
- पृथ्वी का पलायन वेग ११.२ किलोमीटर प्रति सैकिंड या ४०,३२० किलोमीटर प्रति घंटा है। इस से अधिक वेग रखने से कोई भी यान हमारा ग्रह छोड़कर सौर मण्डल के दुसरे ग्रहों की ओर जा सकता है।
- अगर पृथ्वी से चलें तो सूरज के गुरुत्वाकर्षक क्षेत्र से निकलने के लिए पलायन वेग ४२.१ किलोमीटर प्रति सैकिंड है। अगर सूरज की ही सतह से चलें तो पलायन वेग ६१७.५ किलोमीटर प्रति सैकिंड है। अगर सही स्थान पर सही पलायन वेग से चलें तो सूरज के गुरुत्वाकर्षण की सीमाएँ तोड़कर कोई यान सौर मण्डल से बाहर निकल सकता है।
नियम [संपादित करें]
किसी गोलाकार वस्तु के लिए, पलायन वेग इस नियम से पाया जा सकता है -
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जहाँ V_e पलायन वेग है, G गुरुत्वाकर्षक स्थिरांक है, M उस ग्रह, तारे, उपग्रह या अन्य वस्तु का द्रव्यमान (मास) है और r आरंभिक स्थान की उस वस्तु के केन्द्रीय बिंदु से दूरी है।
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