तबला

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तबला
तबला
वर्गीकरण

भारतीय तालवाद्य, बकरे की खाल से मढ़े जिस पर स्याही रहती है।

इस श्रेणी के अन्य वाद्य

पखावज, मृदंग, ढोलक

अन्य लेख

ज़ाकिर हुसैन, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत, अमीर ख़ुसरो, उस्ताद अल्लारक्खा, त्रिलोक गुर्टू, चतुर लाल

तबला

तबला उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय वाद्ययंत्र में से एक है जिसका प्रयोग शास्त्रीय संगीत से लेकर हर तरह के संगीत में किया जाता है।

इसका प्रयोग भारतीय संगीत में मुख्य रूप से मुख्य संगीत वाद्य यंत्रो का साथ देनेवाले वाद्ययंत्र के रूप में किया जाता है। इसके दो हिस्से होते हैं, जो लकड़ी के खाले डिब्बे की तरह होते हैं और बजाते समय दोनों के लिये दो अलग अलग हाथ प्रयोग किये जाते हैं। दायें हाथ से बजाये जानेवाले यंत्र को, जो आकार में बड़ा होता है, तबला, दायाँ या दाहिना कहा जाता है। जबकि छोटे यंत्र को जो आकार में छोटा होता है और बायें हाथ से बजाया जाता है सिद्दा, या बायाँ कहा जाता है। सिद्दा को बजाते समय बायें हाथ की उँगलियों, हथेली और कलाई का प्रयोग किया जाता है। दोनो यंत्र पुआल के एक गद्दे पर रखा जाता है जिसे छुट्टा कहा जाता है।

दोनो यंत्रो के उपर बीच में एक काला वृतनुमा आकृति होती है। जो अक्सर या तो चंदन या एक अन्य काले पदार्थ की बनी होती है जिसे स्याही कहा जाता है। ये काली वृतनुमा आकृति चमड़े के छाल के उपर लगी होती है।

इतिहास

२०० बीसी - भाजे लेणे, यहां तबला बजानेवाली स्त्री

तबला के जड़ें भारत में पाए जाते हैं। भारत में महाराष्ट्र राज्य में Bhaja गुफाओं में नक्काशियों 200 ई.पू. के लिए डेटिंग, तबला और एक नृत्य प्रदर्शन एक और महिला खेल रहे एक महिला से पता चलता है।

प्रसिद्ध तबला वादक

यह भी देखें

भारतीय वाद्ययंत्र

बाहरी कड़ियाँ

श्रेणी:संगीत