अलवर

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अलवर
अलवर की एक झलक
अलवर शहर का एक दृश्य

अलवर
प्रदेश
 - जिला
राजस्थान
 - अलवर
स्थान 27.34° N 76.38° E
क्षेत्रफल   वर्ग कि.मी.
समय मण्डल IST (UTC+5:30)
जनसंख्या
 - घनत्व

 - /वर्ग कि.मी.
महापौर
नगर पालिका अध्यक्ष
संकेतक
 - डाक
 - दूरभाष
 - वाहन
 
 - ३०१००१
 - +९१-१४४
 - आरजे ०२

अलवर राजस्थान प्रान्त का एक शहर है। यह नगर राजस्थान के मेवात क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा भी है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब १७० कि.मी. की दूरी पर है। अलवर अरावली की पहाडियों के मध्य में बसा है।

[संपादित करें] अलवर क्षेत्र का इतिहास

अलवर एक ऐतिहासिक नगर है और इस क्षेत्र का इतिहास महाभारत से भी अधिक पुराना है। लेकिन महाभारत काल से इसका क्रमिक इतिहास प्राप्त होता है। महाभारत युद्ध से कुछ समय पूर्व यहाँ राजा विराट के पिता वेणु ने मत्स्यपुरी नामक नगर बसा कर उसे अपनी राजधानी बनाया था। राजा विराट ने अपनी पिता की मृत्यु हो जाने के बाद मत्स्यपुरी से ३५ मील पश्चिम में बैराठ नामक नगर बसाकर इस प्रदेश को राजधानी बनाया। इसी विराट नगरी से लगभग ३० मील पूर्व की ओर स्थित पर्वतमालाओं के मध्य में पाण्डवों ने अज्ञातवास के समय निवास किया था। तीसरी शताब्दी के आसपास इधर गुर्जर प्रतिहार वंशीय क्षत्रियों का अधिकार हो गया और इसी क्षेत्र में राजा बाधराज ने मत्स्यपुरी से ३ मील पश्चिम में एक नगर बसाया तथा एक गढ़ भी बनवाया। वर्तमान राजगढ़ दुर्ग के पूर्व की ओर इस पुराने राजगढ़ की बस्ती के चिन्ह अब भी दृष्टिगत होते हैं। पाँचवी शताब्दी के आसपास इस प्रदेश के पश्चिमोत्तरीय भाग पर राज ईशर चौहान के पुत्र राजा उमादत्त के छोटे भाई मोरध्वज का राज्य था जो सम्राट पृथ्वीराज से ३४ पीढ़ी पूर्व हुआ था। इसी की राजधानी मोरनगरी थी जो उस समय साबी नदी के किनारे बहुत दूर कर बसी हुई थी। इस बस्ती के प्राचीन चिन्ह नदी के कटाव पर अब भी पाए जाते हैं। छठी शताब्दी में इस देश के उत्तरीय भाग पर भाटी क्षत्रियों का अधिकार था। राजौरगढ़ के शिलालेख से पता चलता है कि सन् ९५९ में इस प्रदेश पर गुर्जर प्रतिहार वंशीय सावर के पुत्र मथनदेव का अधिकार था जो कन्नौज के भट्टारक राजा परमेश्वर क्षितिपाल देव के द्वितीय पुत्र श्री विजयपाल देव का सामन्त था। इसकी राजधानी राजपुर थी। १३वीं शताब्दी से पूर्व अजमेर के राजा बीसलदेव चौहान ने अलवर मेवात के निकुम्भों पर अपना अधिकार कर लिया और राजा महेश के वंशज मंगल को हराकर यह प्रदेश निकुम्भों से छीन कर अपने वंशज के अधिकार में दे दिया। पृथ्वीराज चौहान और मंगल ने ब्यावर के राजपूतों की लड़कियों से वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किया। सन् १२०५ में कुतुबुद्दीन ऐबक ने चौहानों से यह देश छीन कर पुन: निकुम्बों को दे दिया। १ जून, १७४० रविवार को मौहब्बत सिंह की लानी बख्त कुँवारे ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रताप सिंह रखा गया। इसके पश्चात् सन् १७५६ में मौहब्बत सिंह बखाड़े के युद्ध में जयपुर राज्य की ओर से लड़ता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ। राजगढ़ में उसकी विशाल छतरी बनी हुई है। मौहब्बत सिंह की मृत्यु के बाद उसके पुत्र प्रतापसिंह ने २५ दिसम्बर, १७७५ ई. को अलवर राज्य की स्थापना की।

[संपादित करें] अलवर के पर्यटन स्थल

अलवर के पास घूमने की कई जगहें हैं। सिलिसेढ, सरिस्का वन्य जीव उद्यान और [भरतपुर पक्षी उद्यान]]। अलवर का किला और संग्रहालय भी देखने योग्य हैं। अलवर के कोर्ट की इमारत एक बहुत ही खूबसूरत पुराने महल में बनी हुई है।

अलवर से १७० कि मी की दूरी पे जयपुर और 150 कि मी पे मथुरा , गोवर्धन और[ वृन्दावन स्थित है। पान्दुपोल्, तालवक्ष्,बर्थ्हरि,निलकन्थ्,मुनसि मुसि महारानि कि सत्रि,